केंद्र की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण योजना को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। पहले चरण में अदाणी और NTPC समेत सात कंपनियों ने आवेदन किया है, जिससे आयात निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
Business: केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, पहले चरण में अदाणी एंटरप्राइजेज, NTPC समेत सात कंपनियों ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवेदन किए हैं। सरकार को उम्मीद है कि योजना से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और LNG, यूरिया, अमोनिया तथा मेथनॉल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
अदाणी और NTPC समेत सात कंपनियां मैदान में
कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि योजना के पहले चरण में बड़े कॉर्पोरेट समूहों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ओर से कुल सात आवेदन मिले हैं। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने यूरिया उत्पादन से जुड़ी तीन परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है। वहीं गैलेंट इस्पात लिमिटेड ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) और सिंथेसिस गैस (सिंगैस) उत्पादन परियोजना के लिए प्रस्ताव दिया है।
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NTPC लिमिटेड ने सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG) परियोजना के लिए आवेदन किया है। श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड ने सिंगैस उत्पादन और तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (TFL) ने यूरिया उत्पादन परियोजना के लिए प्रस्ताव जमा किया है।
मंत्रालय के मुताबिक, शुरुआती चरण में मिली यह प्रतिक्रिया बताती है कि उद्योग कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और औद्योगिक विकास को गति देने वाले महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर देख रहा है।
कोयले से बनेंगे सिंगैस, यूरिया और हाइड्रोजन जैसे उत्पाद
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2026 में इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य घरेलू कोयला और लिग्नाइट को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलने वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना है। इनमें सिंगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन प्रमुख हैं।
सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर इन उत्पादों का उत्पादन बढ़ने से LNG, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 में इन उत्पादों का कुल आयात मूल्य लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा था।
यह योजना 2030 तक देश में 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने के लक्ष्य का भी हिस्सा है। इसमें 75 मिलियन टन क्षमता इसी योजना के माध्यम से विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
3 लाख करोड़ रुपये तक निवेश की उम्मीद
सरकार के अनुसार, कोयला गैसीकरण योजना से देश में 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है। इसके साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि योजना में उद्योग की रुचि नहीं होने से जुड़ी खबरें समय से पहले थीं। पहले चरण में सात आवेदन मिलने को उन्होंने योजना और भारत के कोयला गैसीकरण मिशन में उद्योग के विश्वास का प्रमाण बताया।
वर्तमान योजना जनवरी 2024 में मंजूर की गई 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना का विस्तार है। उस योजना के तहत फिलहाल आठ कोयला गैसीकरण परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में लागू की जा रही हैं।
दूसरे चरण के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू
कोयला मंत्रालय ने योजना का दूसरा चरण भी मंगलवार से खोल दिया है। प्रस्ताव अनुरोध (RFP) के अनुसार, आवेदन जमा करने की नई अवधि हर दो महीने के अंतराल पर खोली जाएगी। इससे पात्र कंपनियों को अपनी परियोजनाओं के लिए आवेदन करने के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, निविदा जारी होने के बाद पहले दौर के आवेदन 7 जुलाई को जमा किए गए थे। अब दूसरे चरण की शुरुआत से कोयला गैसीकरण क्षेत्र में नए प्रस्तावों और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार इसे घरेलू संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आयात बिल कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।









