उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा को लेकर भक्ति और उत्साह का माहौल है। शहर में मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ विभिन्न पूजा पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। इस बार नगर क्षेत्र के 31 स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं। दुर्गा पूजा के इस आयोजन में एक विशेष आकर्षण फतेहगंज स्थित राम-जानकी मंदिर भी है। यहां मां दुर्गा के साथ बाबा नीम करौली और बर्फानी बाबा के दर्शन की व्यवस्था की जा रही है। धार्मिक आस्था के इन विविध स्वरूपों के बीच पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। प्रमुख पूजा पंडालों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों को भी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
अयोध्या में दुर्गा पूजा की तैयारियां नवरात्र शुरू होने से पहले ही तेज हो गई थीं। पूजा समितियों ने पंडालों को सजाने, प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने का काम शुरू कर दिया था। नगर क्षेत्र में 31 स्थानों पर पूजा-अर्चना का क्रम शुरू होने के साथ ही अन्य स्थानों पर भी प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारियां की गईं। केंद्रीय दुर्गापूजा एवं रामलीला समन्वय समिति के अध्यक्ष मनोज जायसवाल के अनुसार, जिले में लगभग 2700 स्थानों पर दुर्गा पूजा पंडालों में मां भगवती की प्रतिमाएं स्थापित की जानी हैं। इसके अतिरिक्त करीब 200 स्थानों पर रामलीला के आयोजन भी प्रस्तावित हैं। इस तरह जिले में नवरात्र और दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता का भी बड़ा अवसर बन रहे हैं।
इस बार श्रद्धालुओं के लिए फतेहगंज स्थित राम-जानकी मंदिर का पूजा पंडाल विशेष आकर्षण बना हुआ है। यहां पहली बार बाबा नीम करौली की प्रतिमा स्थापित किए जाने की जानकारी सामने आई है। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के साथ बाबा नीम करौली और बर्फानी बाबा के दर्शन का अवसर मिलने से श्रद्धालुओं की रुचि बढ़ने की उम्मीद है। बाबा नीम करौली को मानने वाले भक्त देश के अलग-अलग हिस्सों में हैं और उनके प्रति श्रद्धा रखने वाले लोग उनके जीवन, शिक्षाओं और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े स्थानों पर पहुंचते हैं। अयोध्या जैसे धार्मिक महत्व वाले शहर में उनकी प्रतिमा स्थापित होना स्थानीय दुर्गा पूजा आयोजन को एक अलग पहचान दे रहा है। हालांकि, श्रद्धालुओं की वास्तविक संख्या और दर्शन के लिए आने वाली भीड़ का आकलन आयोजन के दौरान ही हो सकेगा।
मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ पूजा पंडालों में धार्मिक कार्यक्रमों और आरती की तैयारियां भी की गई हैं। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु परिवार के साथ पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर स्थानीय समितियां पंडाल सजावट, प्रकाश व्यवस्था और भक्तों के आवागमन को व्यवस्थित करने में जुटी हैं। बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजकों के लिए यह जरूरी है कि प्रवेश और निकास के रास्ते खुले रहें और किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने में परेशानी न हो। प्रशासन ने भी पूजा समितियों के साथ समन्वय बनाकर त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर ध्यान दिया है।
दुर्गा पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने विशेष योजना बनाई है। अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा के अनुसार, त्योहार के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों और पूजा पंडालों की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। पंडालों में पुलिसकर्मियों के साथ महिला पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों की तैनाती की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भीड़ के प्रबंधन में मदद करना और किसी भी अप्रिय स्थिति पर समय रहते कार्रवाई करना है। ड्रोन के माध्यम से ऊंचाई से भीड़ की स्थिति और प्रमुख मार्गों पर गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। पुलिस की मौजूदगी से आयोजन समितियों को भी व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।
प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। विसर्जन के समय घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है और पानी के नजदीक होने के कारण अतिरिक्त सावधानी की जरूरत रहती है। इसी को देखते हुए घाटों पर एसडीआरएफ के जवानों और गोताखोरों की तैनाती की व्यवस्था की गई है। पुलिस और प्रशासन ने आयोजकों से अपील की है कि विसर्जन के दौरान निर्धारित मार्गों और स्थलों का पालन किया जाए तथा सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी न की जाए। पूजा समितियों को भीड़ के साथ समन्वय बनाए रखने, लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने और जरूरत पड़ने पर प्रशासन की सहायता लेने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक आयोजन और विसर्जन बिना किसी बड़ी परेशानी के संपन्न हों।
इस वर्ष दुर्गा पूजा और रामलीला के आयोजनों को लेकर जिले में व्यापक तैयारियां की गई हैं। केंद्रीय दुर्गापूजा एवं रामलीला समन्वय समिति के अनुसार, 19 अक्टूबर की रात से प्रतिमाओं को जीआईसी मैदान में एकत्र किए जाने की योजना है। इसके बाद 20 अक्टूबर को प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जानी है। प्रस्तावित यात्रा जीआईसी मैदान से फतेहगंज, चौक, रिकाबगंज, सिविल लाइन और छावनी क्षेत्र से होते हुए निर्मली कुंड तक पहुंचेगी। इस दौरान यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। आयोजन से संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर व्यवस्थाओं को बेहतर रखने की तैयारी की गई है। <
पूजा पंडालों की सुरक्षा को लेकर आयोजकों को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। इनमें पंडालों और प्रतिमाओं की निगरानी, सीसीटीवी की व्यवस्था, स्वयंसेवकों की ड्यूटी और अग्नि सुरक्षा जैसे पहलू शामिल हैं। बिजली की सजावट और अस्थायी संरचनाओं वाले पंडालों में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना की आशंका कम की जा सके। आयोजकों को सार्वजनिक रास्तों को बाधित न करने और ध्वनि विस्तारक यंत्रों की आवाज निर्धारित सीमाओं में रखने की हिदायत भी दी गई है। पुलिस-प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को पूजा करने में सुविधा मिले और त्योहार के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।
अयोध्या में दुर्गा पूजा का यह आयोजन धार्मिक परंपराओं, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक गतिविधियों का संगम है। एक ओर शहर के 31 स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन हो रहे हैं, वहीं राम-जानकी मंदिर में बाबा नीम करौली और बर्फानी बाबा की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दूसरी ओर, जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा पंडालों और रामलीला आयोजनों की तैयारियां जारी हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए ड्रोन निगरानी, पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मियों और विसर्जन घाटों पर बचाव दल की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। अब प्रशासन और आयोजन समितियों की प्राथमिकता यह है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिले और नवरात्र, दुर्गा पूजा तथा प्रतिमा विसर्जन के कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों।









