उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत आभा सैचुरेशन के मामले में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जनसंख्या के अनुपात में लोगों की आभा आईडी बनाने के अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए जिले को यह उपलब्धि मिली है। इस सफलता के पीछे स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम की संयुक्त भूमिका बताई गई है। जिले में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने और अधिक से अधिक नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए गए। इस उपलब्धि को स्वास्थ्य विभाग की टीम के समन्वय और अभियान में जुटे कर्मचारियों की मेहनत से जोड़कर देखा जा रहा है।
आभा सैचुरेशन में प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करने पर सुलतानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भारत भूषण को लखनऊ में आयोजित ‘आयुष्मान संवाद’ कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। आठ अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ था, जहां उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्हें सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के आठ वर्ष पूरे होने और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रगति पर चर्चा की गई। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और डिजिटल माध्यमों से जोड़ने के प्रयासों को भी रेखांकित किया गया। सीएमओ डॉ. भारत भूषण ने इस उपलब्धि का श्रेय किसी एक अधिकारी या कर्मचारी के बजाय जिले की पूरी स्वास्थ्य टीम को दिया। उनके अनुसार, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम ने मिलकर लोगों को आभा आईडी बनवाने के लिए प्रेरित किया और अभियान को आगे बढ़ाया। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान के उपयोग और उसके लाभों के बारे में जानकारी देना अभियान का अहम हिस्सा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से नागरिकों तक पहुंच बनानी होती है, ताकि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से अधिक से अधिक लोग जुड़ सकें।
आभा का पूरा नाम आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट है। यह नागरिकों को दी जाने वाली 14 अंकों की विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को डिजिटल रूप में व्यवस्थित रखने और जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से उपलब्ध कराने में मदद करना है। आभा आईडी के माध्यम से जांच रिपोर्ट, चिकित्सकीय पर्चे और उपचार से जुड़े रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखे जा सकते हैं। इससे मरीज के पुराने इलाज से संबंधित जानकारी को संभालना आसान हो सकता है। जब नागरिक अपनी सहमति देते हैं, तब संबंधित स्वास्थ्य रिकॉर्ड को उपचार में शामिल स्वास्थ्य संस्थानों के साथ साझा भी किया जा सकता है। इससे डॉक्टरों को मरीज के पुराने उपचार और जांच की जानकारी समझने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल स्वास्थ्य पहचान का एक प्रमुख उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना है। अक्सर मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में इलाज कराने के दौरान पुराने पर्चे, जांच रिपोर्ट और दूसरी चिकित्सकीय जानकारी साथ ले जानी पड़ती है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रूप में रखने में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, आभा आईडी अपने आप में मुफ्त इलाज या स्वास्थ्य बीमा की गारंटी नहीं है। यह एक डिजिटल स्वास्थ्य पहचान है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य रिकॉर्ड को जोड़ने और नागरिक की सहमति से साझा करने में किया जा सकता है। इसे आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी कार्ड से अलग समझना चाहिए, क्योंकि दोनों की भूमिका अलग-अलग है।
सुलतानपुर में इस उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले कर्मचारियों का योगदान अहम बताया गया है। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आशा कार्यकर्ता तथा एएनएम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों से संपर्क करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देना, पात्र नागरिकों तक पहुंच बनाना और लोगों को जरूरी प्रक्रियाओं के बारे में समझाना उनके कार्य का हिस्सा है। आभा आईडी निर्माण अभियान में भी लोगों को इसके उद्देश्य और उपयोग के बारे में बताना जरूरी होता है। जिले में टीम के सामूहिक प्रयासों से जनसंख्या के अनुपात में आभा निर्माण के लक्ष्य को बेहतर ढंग से पूरा किया गया, जिसके बाद सुलतानपुर को प्रदेश में पहला स्थान मिला।
आभा सैचुरेशन का अर्थ केवल कुल कितनी आईडी बनाई गईं, यह देखना नहीं है, बल्कि आबादी के अनुपात में डिजिटल स्वास्थ्य पहचान के कवरेज का आकलन करना भी है। इसलिए जिले की इस उपलब्धि को जनसंख्या के सापेक्ष प्रदर्शन के संदर्भ में देखा जा रहा है। डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ तभी व्यापक हो सकता है, जब नागरिकों को पहचान बनाने के साथ-साथ उसके इस्तेमाल, रिकॉर्ड की गोपनीयता और अपनी सहमति के महत्व की जानकारी भी हो। स्वास्थ्य रिकॉर्ड संवेदनशील जानकारी होते हैं, इसलिए उन्हें साझा करने का निर्णय नागरिक की सहमति और संबंधित व्यवस्था के नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
जिले को मिली इस उपलब्धि के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को आगे भी मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी रहेगी। आभा आईडी निर्माण के साथ नागरिकों को यह समझाना भी जरूरी है कि वे अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को किस तरह सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग कैसे कर सकते हैं। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डिजिटल प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से लागू करने से मरीजों को सुविधा मिल सकती है। साथ ही, कर्मचारियों को तकनीकी प्रक्रियाओं के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन देना और नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना भी इस व्यवस्था की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
सुलतानपुर की यह उपलब्धि जिले के स्वास्थ्य विभाग के सामूहिक प्रयासों को पहचान दिलाती है। सीएमओ डॉ. भारत भूषण ने चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के योगदान को इसका आधार बताया है। लखनऊ में आयोजित आयुष्मान संवाद कार्यक्रम में मिला सम्मान जिले में आभा सैचुरेशन के बेहतर प्रदर्शन की औपचारिक पहचान है। अब आगे की चुनौती इस प्रगति को बनाए रखने, डिजिटल स्वास्थ्य पहचान के वास्तविक उपयोग को बढ़ावा देने और नागरिकों को स्वास्थ्य रिकॉर्ड के सुरक्षित प्रबंधन के प्रति जागरूक करने की होगी।










