आलू के गिरते दाम से बछवाड़ा के किसान परेशान: लागत निकालना भी मुश्किल, कोल्ड स्टोर में रखना पड़ रहा आलू

बछवाड़ा प्रखंड में आलू के दाम लगातार गिर रहे हैं। बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से किसान परेशान हैं और अपनी उपज को कोल्ड स्टोर में रखने को मजबूर हो रहे हैं।
आलू के गिरते दाम से बछवाड़ा के किसान परेशान: लागत निकालना भी मुश्किल, कोल्ड स्टोर में रखना पड़ रहा आलू
Photo Credit / Attribution: google

बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों आलू के दाम में आई गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अच्छी पैदावार के बावजूद बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि कई किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई आलू की फसल को तुरंत बेचने के बजाय कोल्ड स्टोर में रखने को मजबूर हो गए हैं, ताकि भविष्य में यदि कीमत बढ़े तो उन्हें थोड़ा बेहतर दाम मिल सके। हालांकि कोल्ड स्टोर में भंडारण कराने का खर्च भी कम नहीं होता, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ जाती है।

बछवाड़ा प्रखंड के कई गांवों में इस बार आलू की खेती बड़े पैमाने पर की गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें अच्छी कीमत मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। मौसम भी खेती के अनुकूल रहा, जिससे उत्पादन काफी अच्छा हुआ। लेकिन जब फसल तैयार होकर बाजार में पहुंची तो कीमत उम्मीद से काफी कम निकली। इससे किसानों को भारी निराशा हाथ लगी है।

किसानों का कहना है कि आलू की खेती में लागत काफी अधिक आती है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो जाता है। इसके बाद जब फसल तैयार होती है और बाजार में कम कीमत मिलती है तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। कई किसानों का कहना है कि वर्तमान में जो कीमत मिल रही है, उससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

स्थानीय बाजारों में इन दिनों आलू की कीमत में लगातार गिरावट देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में आलू की आपूर्ति ज्यादा होने के कारण कीमत कम हो गई है। आसपास के कई जिलों से भी बड़ी मात्रा में आलू बाजार में आ रहा है, जिससे कीमत पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में व्यापारी भी कम कीमत पर ही आलू खरीद रहे हैं, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।

कई किसानों ने बताया कि वे मजबूरी में अपनी फसल को कोल्ड स्टोर में रखवा रहे हैं। उनका मानना है कि यदि अभी आलू बेच दिया जाए तो उन्हें बहुत कम कीमत मिलेगी, जबकि कुछ समय बाद बाजार में मांग बढ़ने पर कीमत में सुधार हो सकता है। हालांकि कोल्ड स्टोर में आलू रखने के लिए भी प्रति बोरा शुल्क देना पड़ता है, जिससे किसानों की लागत और बढ़ जाती है। इसके अलावा फसल को कोल्ड स्टोर तक ले जाने में भी परिवहन का खर्च उठाना पड़ता है।

किसानों का कहना है कि यदि सरकार किसानों के हित में कोई ठोस कदम उठाए तो उन्हें राहत मिल सकती है। कई किसानों ने आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके। उनका कहना है कि यदि कीमत इसी तरह कम रही तो भविष्य में किसान आलू की खेती करने से भी पीछे हट सकते हैं।

बछवाड़ा क्षेत्र के कई किसानों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में खेती की लागत लगातार बढ़ी है। खाद और बीज की कीमत में वृद्धि हुई है, वहीं मजदूरी भी महंगी हो गई है। ऐसे में यदि फसल का उचित दाम नहीं मिलता है तो किसानों के लिए खेती करना और भी मुश्किल हो जाता है। कई किसानों का कहना है कि खेती अब धीरे-धीरे घाटे का सौदा बनती जा रही है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार उत्पादन अधिक होने के कारण बाजार में आलू की आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे कीमत में गिरावट आई है। उनका कहना है कि यदि कुछ समय बाद बाजार में मांग बढ़ती है तो कीमत में सुधार हो सकता है। साथ ही किसानों को बेहतर भंडारण और विपणन की सुविधा मिलने से भी स्थिति में सुधार आ सकता है।

वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को फसल भंडारण और बाजार से जुड़ी जानकारी दी जा रही है, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है और किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए।

फिलहाल बछवाड़ा प्रखंड के किसान बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में आलू की कीमत में सुधार होगा। किसानों को भरोसा है कि यदि बाजार में मांग बढ़ती है तो उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा। तब तक कई किसान अपनी उपज को कोल्ड स्टोर में सुरक्षित रखकर बेहतर समय का इंतजार कर रहे हैं।

Leave a comment