बांग्लादेश में राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर मचा राजनीतिक घमासान, BNP और छात्र आंदोलन में बढ़े मतभेद

बांग्लादेश में राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन के इस्तीफे को लेकर विपक्ष और छात्र आंदोलन में टकराव, चुनाव से पहले संवैधानिक और राजनीतिक संकट गहरा गया।

बांग्लादेश में चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी और छात्र आंदोलन के बीच राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है।

Dhaka: बांग्लादेश में चुनाव से पहले राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और छात्र आंदोलन के बीच मतभेद उभर आए हैं। ढाका में द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार यह विवाद ऐसे समय में तेज हुआ है जब पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की सेहत खराब होने के कारण उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है। उनकी हालत पहले से अधिक नाजुक मानी जा रही है।

बीएनपी का विरोध

बीएनपी ने राष्ट्रपति के पद को खाली करने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया है। बुधवार को मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक के बाद बीएनपी के स्टैंडिंग कमिटी सदस्य नजूरुल इस्लाम खान ने कहा कि राष्ट्रपति पद खाली होने से देश संवैधानिक संकट में फंस सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी संवैधानिक या राजनीतिक संकट पैदा करने की कोशिश करेगा, तो प्रजातांत्रिक दल और विभिन्न संगठन इसका सामना करेंगे। खान ने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने और नया संकट पैदा न करने की अपील की।

बीएनपी के अन्य सदस्य अमीर खासरू महमूद और सलाहुद्दीन अहमद ने भी यही रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और इसे खाली करना संवैधानिक और राष्ट्रीय संकट पैदा कर सकता है।

छात्र आंदोलन की मांगें

वहीं एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट और जातीय नागरिक कमिटी ने राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन को हटाने की मांग दोहराई। छात्र आंदोलन का कहना है कि 1972 का संविधान राजनीतिक संकट को लंबा खींचता है और देश में फासीवादी ढांचे को मजबूत करता रहा है। मूवमेंट के कन्वेनर हसनत अब्दुल्लाह ने कहा कि वे सभी राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय एकता में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं। उन्होंने चेताया कि जो दल इस मांग में शामिल नहीं होंगे, उनका बहिष्कार किया जाएगा।

बांग्लादेश में राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर मचा राजनीतिक घमासान, BNP और छात्र आंदोलन में बढ़े मतभेद

अब्दुल्लाह ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और मूवमेंट पर भरोसा रखने को कहा। जातीय नागरिक कमिटी के सदस्य नासिर उद्दीन पतवारी ने बताया कि वे राजनीतिक एलीट से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन राउंडटेबल डिस्कशन नहीं चाहते। उनका कहना था कि मुद्दों का समाधान सड़कों पर ही होगा।

अंतरिम सरकार का रुख

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने राष्ट्रपति के पद पर किसी भी निर्णय को कानूनी प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक सहमति और राष्ट्रीय एकता से तय करने की बात कही है। सूचना सलाहकार नहिद इस्लाम ने कहा कि राष्ट्रपति का पद रहना या न रहना अब कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक निर्णय है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धरना न देने की अपील की और कहा कि सरकार को उनका संदेश मिल चुका है।

मुख्य सलाहकार के प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को हटाने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। सरकार इस मामले में सभी हितधारकों से परामर्श कर रही है।

विवाद की शुरुआत

यह विवाद रविवार को तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन ने एक बयान में कहा कि उन्हें शेख हसीना का इस्तीफे का पत्र मिलने की खबर मिली, लेकिन कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिला। उन्होंने बताया कि कई बार इस्तीफा लेने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। इसके बाद विधि सलाहकार आसिफ नजूरुल ने राष्ट्रपति पर झूठ बोलने और उनकी मानसिक क्षमता पर सवाल उठाया। छात्र संगठनों ने इस बयान के बाद इस्तीफे की मांग तेज कर दी।

सप्ताह की शुरुआत में छात्र संगठन और अन्य आंदोलनकारी बांगभवन के पास इकट्ठा हुए। सुरक्षा के कई स्तर होने के बावजूद प्रदर्शनकारी कभी-कभी परिसर के बाहर इकट्ठा होते रहे।

राष्ट्रपति का चुनाव बाद इस्तीफा देने का इशारा

हालांकि विवाद तेज है, खबर है कि राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन चुनाव के बाद पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने एक विदेशी मीडिया एजेंसी को बताया कि वे फरवरी चुनाव के बाद इस्तीफा देना चाहते हैं। उन्होंने यूनुस सरकार द्वारा अपनी उपेक्षा का हवाला दिया, जिसमें सात महीने तक कोई मुलाकात न होना, प्रेस विभाग हटाना और दूतावासों से तस्वीरें हटाना शामिल था। राष्ट्रपति ने कहा, "मैं पद छोड़ना चाहता हूं, लेकिन चुनाव तक बने रहूंगा।"

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