बांका में 1200 वर्मी कंपोस्ट पीट बनाने का लक्ष्य, किसानों की घटेगी लागत और मिट्टी की सेहत सुधरेगी

बांका में 1200 वर्मी कंपोस्ट पीट बनेंगे। अनुदान से किसानों की लागत घटेगी और मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।

बिहार के बांका जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 1200 वर्मी कंपोस्ट पीट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग किसानों को अनुदान देकर रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

बिहार: बांका जिले में खेतों की मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती की लागत कम करने के लिए किसानों को खुद वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में 1200 जैविक खाद पीट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए किसानों को आर्थिक सहायता और अनुदान भी दिया जा रहा है। इस पहल से जैविक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक खाद के इस्तेमाल को कम करने की उम्मीद है।

बांका में 1200 वर्मी कंपोस्ट पीट बनाने की तैयारी

बिहार के बांका जिले में मिट्टी की उर्वरता सुधारने और किसानों की खेती लागत कम करने के लिए जैविक खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक खादों पर अत्यधिक निर्भरता के बीच कृषि विभाग किसानों को अपने खेतों और घरों के पास वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में जिले में कुल 1200 जैविक खाद पीट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए प्रखंडवार लक्ष्य भी तय किए गए हैं।

बांका में 1200 वर्मी कंपोस्ट पीट बनाने का लक्ष्य, किसानों की घटेगी लागत और मिट्टी की सेहत सुधरेगी

योजना के तहत किसानों को वर्मी कंपोस्ट पीट के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता और अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को जैविक खाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करना और खेती में रासायनिक खाद पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद करना है।

वर्मी कंपोस्ट से सुधरेगी मिट्टी की सेहत

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक संजय कुमार के अनुसार, किसान घर या खेत में आसानी से जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। वर्मी कंपोस्ट बनाने में केंचुओं की मदद ली जाती है, जो गोबर, सड़े-गले पत्तों और दूसरे जैविक पदार्थों को पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदलने में सहायक होते हैं।

मिट्टी की अच्छी सेहत फसलों की वृद्धि और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व पौधों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्मी कंपोस्ट मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी संरचना सुधारने में मदद कर सकता है। इसके नियमित और उचित इस्तेमाल से किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिल सकता है।

इस तरह तैयार होती है जैविक खाद

वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए सबसे पहले ईंटों की मदद से जरूरत के अनुसार पीट बनाया जाता है। इसमें गोबर, सड़े-गले पत्ते और अन्य जैविक पदार्थ डाले जाते हैं। इसके बाद इसमें केंचुए छोड़े जाते हैं। खाद तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान उचित नमी और हवा का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सही देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में जैविक पदार्थों से खाद तैयार की जा सकती है। तैयार वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल सब्जियों, बाग-बगीचों और खेतों में उगाई जाने वाली फसलों में किया जा सकता है।

किसानों को मिलेगा आर्थिक लाभ

बांका में 1200 वर्मी कंपोस्ट पीट बनाने की पहल से किसानों को अपने स्तर पर जैविक खाद तैयार करने का अवसर मिलेगा। सरकारी अनुदान से पीट निर्माण की शुरुआती लागत में सहायता मिल सकती है। इससे किसान खेतों में उपलब्ध गोबर और जैविक अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे।

कृषि विभाग की इस योजना का लक्ष्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत कम करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने में मदद करना है। किसानों को खाद बनाने की सही विधि और उसके उचित इस्तेमाल की जानकारी मिलने से इस पहल के बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।

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