माह-ए-रमजान के आखिरी अशरे की शुरुआत: बरौनी में इबादत और दुआओं का बढ़ा माहौल

माह-ए-रमजान के आखिरी अशरे की शुरुआत: बरौनी में इबादत और दुआओं का बढ़ा माहौल
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बरौनी में माह-ए-रमजान के आखिरी अशरे की शुरुआत हो गई है। रमजान के इस अंतिम चरण को इस्लाम में बेहद अहम माना जाता है, इसलिए मस्जिदों और घरों में इबादत का माहौल और ज्यादा बढ़ गया है। रोजेदार अल्लाह की इबादत, दुआ और कुरान की तिलावत में ज्यादा समय बिताते नजर आ रहे हैं।

रमजान के आखिरी दस दिनों को “अखिरी अशरा” कहा जाता है, जिसे जहन्नम से निजात का दौर भी माना जाता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की कोशिश करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। बरौनी के कई मस्जिदों में भी विशेष नमाज और इबादत का आयोजन किया जा रहा है।

इन दिनों मस्जिदों में नमाजियों की संख्या भी बढ़ जाती है। विशेष रूप से इशा और तरावीह की नमाज में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। कई लोग एतिकाफ भी बैठते हैं, जिसमें वे मस्जिद में रहकर लगातार इबादत करते हैं और दुनियावी कामों से दूर रहते हैं।

रमजान के आखिरी अशरे में शब-ए-कद्र की रात को भी बहुत महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि इस रात में की गई इबादत हजार महीनों की इबादत से बेहतर होती है। इसी वजह से लोग इन दिनों ज्यादा से ज्यादा नमाज, तिलावत और दुआ करने की कोशिश करते हैं।

बरौनी के स्थानीय धार्मिक विद्वानों का कहना है कि रमजान का आखिरी अशरा आत्मिक शुद्धि और अल्लाह की रहमत पाने का सबसे अहम समय होता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस पवित्र समय का पूरा लाभ उठाएं और ज्यादा से ज्यादा इबादत करें।

रोजेदार इन दिनों सहरी और इफ्तार के साथ-साथ जरूरतमंदों की मदद करने में भी आगे आ रहे हैं। कई जगहों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है और गरीबों को भोजन तथा जरूरी सामान भी वितरित किया जा रहा है। इससे समाज में भाईचारा और आपसी सहयोग की भावना भी मजबूत होती नजर आ रही है।

 
 

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