अमेरिका ने चीन, भारत और यूरोपीय संघ सहित 16 देशों के खिलाफ नई ट्रेड जांच शुरू की है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम ट्रेड असंतुलन कम करने और अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 16 प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के खिलाफ नई ट्रेड जांच की घोषणा की है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ प्रोग्राम को रद्द करने के बाद टैरिफ दबाव (Tariff Pressure) फिर से बनाने के लिए उठाया गया है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर के अनुसार यह जांच उन देशों की इंडस्ट्रियल कैपेसिटी और ट्रेड प्रैक्टिस की समीक्षा करेगी जो अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं।
ग्रीर ने कहा कि इस जांच में चीन, यूरोपियन यूनियन, भारत, जापान, साउथ कोरिया और मेक्सिको जैसे देशों को शामिल किया गया है। नए टैरिफ इस गर्मियों तक लागू हो सकते हैं।
किन देशों पर हो सकती है कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस अमेरिकी जांच के दायरे में आने वाले अन्य देशों में ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं। हालांकि कनाडा, जो अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, उसे इस जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया है।
जैमीसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि यह कदम व्यापार में संतुलन बनाने और अमेरिकी उद्योगों को संरक्षित करने की कोशिश है। इसके तहत उन देशों की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और उत्पादन की तुलना अमेरिका से की जाएगी।
जांच का मकसद और फोकस
ग्रीर ने बताया कि इस जांच का मुख्य उद्देश्य उन इकॉनमी पर फोकस करना है जिनके बारे में अमेरिका के पास सबूत हैं कि वे लगातार बड़े ट्रेड सरप्लस या अनावश्यक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी के जरिए बाजार में दबाव बना रहे हैं।
जांच में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी:

- बड़े करंट अकाउंट सरप्लस
- सरकारी सब्सिडी (Subsidy) और सरकारी कंपनियों की नॉन-कमर्शियल गतिविधियां
- कम घरेलू मजदूरी और अपर्याप्त लेबर स्टैंडर्ड
- पर्यावरण मानकों का पालन न होना
- सब्सिडी वाले लोन और करेंसी प्रैक्टिस
ग्रीर ने कहा कि ये कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं कि अमेरिका का ट्रेड सिस्टम संतुलित और निष्पक्ष रहे।
चीन के खिलाफ पहला टार्गेट
यह नई जांच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी के फैसले के बाद शुरू हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में कहा था कि नेशनल इमरजेंसी कानून के तहत ट्रंप के लगाए गए ग्लोबल टैरिफ गैर-कानूनी थे। इसके बाद ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत 150 दिनों के लिए टेम्पररी 10% टैरिफ लागू किया।
ट्रंप के पहले टर्म में, उन्होंने चीन के कई आयातों पर लगभग 25% टैरिफ लगाने के लिए सेक्शन 301 जांच का उपयोग किया था। इसे कोर्ट चुनौतियों के लिए अधिक मजबूत कानूनी टूल माना जाता है।
सेक्शन 301 की भूमिका
सेक्शन 301 उन कानूनी प्रावधानों में से एक है, जिसका उपयोग अमेरिकी प्रशासन विदेशी ट्रेड प्रैक्टिस की जांच और आवश्यक टैरिफ लागू करने के लिए करता है। ग्रीर ने बताया कि इस जांच से अमेरिका यह पता लगाएगा कि कौन से देश अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का उपयोग बाजार में असंतुलन बनाने के लिए कर रहे हैं।
इस जांच में बड़े ट्रेड सरप्लस वाले देश, सरकारी सब्सिडी, कम मजदूरी दर और पर्यावरण नियमों का पालन न करने वाले देशों को प्राथमिकता दी जाएगी। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस तरह के कदम अमेरिकी उद्योगों और रोजगार की रक्षा करेंगे।









