रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च तय की।
Bihar: रेलवे में जमीन के बदले नौकरी से जुड़े चर्चित भ्रष्टाचार मामले में राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जवाब मांगा है। अदालत ने जांच एजेंसी को नोटिस जारी करते हुए मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है और अब इसकी सुनवाई हाई कोर्ट में आगे बढ़ेगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI को जारी किया नोटिस
इस मामले पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने CBI को नोटिस जारी किया। अदालत ने जांच एजेंसी से कहा कि वह इस मामले में अपना जवाब हलफनामे के रूप में दाखिल करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।
लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका में ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय करने के फैसले को रद्द करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और ट्रायल कोर्ट का आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है।
भोला यादव की याचिका पर भी होगी सुनवाई
इस मामले से जुड़ी एक और याचिका पर भी अदालत में सुनवाई होगी। यह याचिका लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी भोला यादव की ओर से दायर की गई है। इस याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें कुछ आरोपितों को माफी देकर उन्हें सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी गई थी।
भोला यादव का कहना है कि इस फैसले की समीक्षा की जानी चाहिए और अदालत को इस पर फिर से विचार करना चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने संकेत दिया है कि दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी ताकि पूरे मामले को व्यापक रूप से समझा जा सके।
अदालत में कपिल सिब्बल की दलील
सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत के सामने यह दलील रखी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई ठोस मामला नहीं बनता।
कपिल सिब्बल ने कहा कि लालू प्रसाद यादव उस समय रेल मंत्री जरूर थे, लेकिन रेलवे में भर्ती प्रक्रिया से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। उनका कहना था कि भर्ती से जुड़े फैसले संबंधित अधिकारियों और विभागों द्वारा लिए जाते थे और इसमें रेल मंत्री की सीधी भूमिका नहीं होती थी।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया जाए जिसमें लालू यादव के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं।
ट्रायल कोर्ट का आदेश
इस मामले में राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने जनवरी महीने में बड़ा फैसला सुनाते हुए लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत ने कहा था कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ पहली नजर में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला बनता है।
अदालत के इस फैसले के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ने वाली थी, लेकिन अब लालू यादव ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इसके चलते इस मामले की कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर नई दिशा में आगे बढ़ेगी।
परिवार के कई सदस्य भी आरोपित
इस मामले में केवल लालू प्रसाद यादव ही नहीं बल्कि उनके परिवार के कई सदस्य भी आरोपित बताए गए हैं। विशेष अदालत ने लालू यादव की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और उनकी बेटियों मीसा भारती तथा हेमा यादव सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोप तय किए थे।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में कई लोगों ने मिलकर कथित रूप से जमीन के बदले रेलवे में नौकरी देने की योजना को अंजाम दिया। अदालत ने माना था कि उपलब्ध दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपों की जांच जरूरी है।
2004 से 2009 के बीच का मामला
यह पूरा मामला साल 2004 से 2009 के बीच का बताया जाता है। उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उस दौरान रेलवे में कुछ लोगों को नौकरी देने के बदले उनसे जमीन ली गई थी।
बताया जाता है कि इन जमीनों को लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी एक कंपनी के नाम पर खरीदा गया। आरोप है कि जमीनों की कीमत बाजार मूल्य से काफी कम दिखाई गई और भुगतान नकद में किया गया। इसके बदले में संबंधित लोगों को रेलवे में विभिन्न पदों पर नौकरी दी गई।
CBI का कहना है कि यह पूरा मामला भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है और इसी वजह से इसकी जांच की जा रही है।












