बेंगलुरु पुलिस ने लग्जरी कारों को बार-बार गिरवी रखकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 1.74 करोड़ रुपये मूल्य के सात वाहन जब्त किए गए हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पुलिस ने लग्जरी कारों को बार-बार गिरवी रखकर विभिन्न फाइनेंसरों से बड़ी रकम हासिल करने वाले एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से लगभग 1.74 करोड़ रुपये मूल्य के सात लग्जरी और अन्य वाहन जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी फर्जी वाहन दस्तावेज तैयार कर एक ही कार पर कई बार ऋण लेकर वित्तीय संस्थानों और वाहन मालिकों दोनों को निशाना बनाते थे। प्रारंभिक जांच में यह एक सुनियोजित और लंबे समय से संचालित धोखाधड़ी का मामला प्रतीत हो रहा है।
चार आरोपी गिरफ्तार, कई वाहन जब्त
पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान प्रभाकर, प्रशांत, वेणुगौड़ा और भागेश के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से सात वाहन बरामद किए, जिनमें दो टोयोटा फॉर्च्यूनर, एक वोल्वो, एक टोयोटा इनोवा, एक फोर्ड, एक मारुति स्विफ्ट और अन्य वाहन शामिल हैं। जब्त किए गए वाहनों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 1.74 करोड़ रुपये बताई गई है। पुलिस का कहना है कि इनमें से कई वाहन कथित रूप से धोखाधड़ी की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए थे।
कैसे काम करता था यह कथित फ्रॉड नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी खुद को ऑटोमोबाइल ब्रोकर बताकर उन कार मालिकों से संपर्क करते थे, जिनके पास 40 से 50 लाख रुपये मूल्य की लग्जरी कारें थीं और जिन्हें कम अवधि के लिए 4 से 5 लाख रुपये के ऋण की आवश्यकता होती थी। कार मालिकों से वाहन गिरवी रखवाने के बाद आरोपी कथित रूप से वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) में छेड़छाड़ करते थे या फर्जी स्वामित्व दस्तावेज तैयार कर लेते थे। इसके बाद उसी वाहन को दूसरे फाइनेंसर के पास गिरवी रखकर 20 से 25 लाख रुपये तक का बड़ा ऋण हासिल किया जाता था। इस तरह एक ही वाहन का उपयोग कई बार ऋण लेने के लिए किया जाता था, जिससे विभिन्न वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
पुराने लोन चुकाकर फिर दोहराते थे धोखाधड़ी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। दूसरे फाइनेंसर से प्राप्त राशि का एक हिस्सा पहले फाइनेंसर का ऋण चुकाने में लगाया जाता था। इसके बाद वाहन को वापस हासिल कर लिया जाता और फिर उसी वाहन को किसी अन्य फाइनेंसर के पास गिरवी रखकर दोबारा ऋण लिया जाता था। इस चक्र को लगातार दोहराकर आरोपी कई संस्थानों से बड़ी रकम जुटाने में सफल हो जाते थे। यही कारण है कि कई मामलों में धोखाधड़ी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई।
फर्जी दस्तावेजों ने जांच को बनाया चुनौतीपूर्ण
जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों द्वारा तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज इतने वास्तविक प्रतीत होते थे कि पहली नजर में उनकी पहचान करना आसान नहीं था। कई वाहनों के वास्तविक स्वामित्व की पुष्टि करने में भी पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों में की गई तकनीकी छेड़छाड़ के कारण यह पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है कि किन वाहनों के असली मालिक कौन हैं और किन-किन वित्तीय संस्थानों को धोखा दिया गया।
शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कई वाहन मालिकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि ब्रोकरों ने उन्हें ऋण दिलाने के नाम पर उनकी कारें अपने कब्जे में लीं, लेकिन बाद में वाहन वापस नहीं लौटाए। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान कई वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और वाहन रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, जिसके बाद कथित धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
कई और मामलों का खुलासा होने की संभावना
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह केवल कुछ सीमित मामलों तक ही सक्रिय नहीं था। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि बेंगलुरु के विभिन्न इलाकों में कई वाहन मालिक और फाइनेंस कंपनियां इस कथित धोखाधड़ी का शिकार हो सकती हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा कुल कितनी राशि की वित्तीय धोखाधड़ी की गई।
वाहन ऋण लेने वालों और फाइनेंसरों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों से बचने के लिए वाहन मालिकों और फाइनेंसरों दोनों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। किसी भी वाहन को गिरवी रखने या ऋण स्वीकृत करने से पहले स्वामित्व दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच, आरसी का डिजिटल सत्यापन और अधिकृत रिकॉर्ड का मिलान करना आवश्यक है। वित्तीय संस्थानों को भी आधुनिक दस्तावेज सत्यापन प्रणाली अपनाने और संदिग्ध लेन-देन की नियमित निगरानी करने की सलाह दी जाती है।
पुलिस जांच जारी
पुलिस फिलहाल आरोपियों के बैंक लेन-देन, संपत्तियों, वाहन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य शहरों या राज्यों तक जुड़े हुए हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा धोखाधड़ी की वास्तविक राशि प्रारंभिक अनुमान से कहीं अधिक निकल सकती है।











