भागलपुर में विक्रमशिला पुल बंद होते ही गंगा पार करने वालों की बढ़ी परेशानी, तीन दिनों में 1.56 लाख यात्रियों ने जहाजों का लिया सहारा

विक्रमशिला पुल बंद होने के बाद तीन दिनों में 1.56 लाख यात्रियों ने गंगा पार की। जानिए फेरी सेवा, जहाजों की क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी
भागलपुर में विक्रमशिला पुल बंद होते ही गंगा पार करने वालों की बढ़ी परेशानी, तीन दिनों में 1.56 लाख यात्रियों ने जहाजों का लिया सहारा
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विक्रमशिला सेतु भागलपुर को नवगछिया और कोसी-सीमांचल के कई इलाकों से जोड़ने वाला प्रमुख पुल है। इस पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। नौकरी, कारोबार, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। पुल बंद होने से इन गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा है। खासकर उन लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं, जिन्हें रोजाना गंगा के दोनों किनारों के बीच यात्रा करनी पड़ती है।

पुल पर आवागमन बंद करने का फैसला क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और स्थायी मजबूतीकरण के लिए लिया गया है। एक अक्टूबर से पुनर्स्थापन कार्य शुरू करने की योजना के तहत पुल पर बनी अस्थायी बेली ब्रिज संरचनाओं को हटाने का काम किया जाना है। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों पर स्थायी स्टील ट्रस ब्रिज लगाने और सड़क की संरचना को मजबूत करने का काम प्रस्तावित है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद पुल पर आवागमन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य है। हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान लोगों को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने गंगा में फेरी सेवा की व्यवस्था की है। भागलपुर की ओर से बियाडा और बाबूपुर घाट तथा नवगछिया की ओर से जाह्नवी गंगा घाट को जलमार्ग से यात्रा के प्रमुख केंद्रों के रूप में तैयार किया गया है। इन घाटों के माध्यम से यात्रियों को गंगा के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से घोषित व्यवस्था के अनुसार, यात्रियों के साथ साइकिल और मोटरसाइकिल को भी निर्धारित जहाजों से निःशुल्क पार कराने की सुविधा दी गई है।

जहाजों की क्षमता अलग-अलग रखी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ जहाजों में एक बार में 72 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है, जबकि बड़े जहाजों में 600 तक यात्रियों को ले जाने की व्यवस्था है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जहाजों पर निर्धारित क्षमता के अनुसार ही यात्रियों को बैठाने और लाइफ जैकेट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर रोक लगाने के साथ ही घाटों पर भीड़ नियंत्रित करने और यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी गई है।

गंगा पार करने के लिए यात्रियों की संख्या बढ़ने से घाटों पर व्यवस्थाएं बनाए रखना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। यात्रियों को जहाज तक पहुंचने, टिकट या प्रवेश संबंधी प्रक्रिया पूरी करने और अपने वाहन को सुरक्षित तरीके से चढ़ाने-उतारने के दौरान अतिरिक्त समय लग सकता है। खासकर मोटरसाइकिल से यात्रा करने वाले लोगों को घाट पर पहुंचने से लेकर दूसरी ओर निकलने तक पूरी प्रक्रिया के लिए समय रखना पड़ रहा है। यदि एक साथ बड़ी संख्या में लोग घाट पहुंचते हैं, तो प्रतीक्षा का समय बढ़ सकता है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले उपलब्ध सेवा और घाट की स्थिति की जानकारी लेने की जरूरत है।

इसका असर दैनिक यात्रियों पर भी दिखाई दे रहा है। भागलपुर और नवगछिया के बीच आने-जाने वाले सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, विद्यार्थी और व्यापारी समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त योजना बनाने को मजबूर हैं। पुल बंद होने के कारण पहले की तरह सीधे सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं है। अब लोगों को घाट तक पहुंचने, जहाज का इंतजार करने और गंगा पार करने के बाद आगे की यात्रा पूरी करने में लगने वाले समय को ध्यान में रखना पड़ता है। नियमित रूप से यात्रा करने वालों के लिए यह बदलाव उनके दैनिक कार्यक्रम को प्रभावित कर रहा है

प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी तैयारियां की हैं। यात्रियों की आवाजाही व्यवस्थित रखने के लिए बैरिकेडिंग, पुलिस बल की तैनाती और आवश्यक सुरक्षा संसाधनों की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। नदी में परिचालन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है। यात्रियों को जहाज पर चढ़ते और उतरते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए तथा चालक दल और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन लेकर यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

विक्रमशिला पुल बंद होने का असर केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। भागलपुर और नवगछिया के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी इस मार्ग पर निर्भर करती हैं। हालांकि आम यात्रियों के लिए जल परिवहन की व्यवस्था की गई है, लेकिन मालवाहक वाहनों की आवाजाही और सामान की ढुलाई के लिए अलग व्यवस्था तथा निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों को वैकल्पिक मार्गों और उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार अपनी योजना बनानी पड़ रही है। इससे यात्रा और माल ढुलाई की समय-सारणी में बदलाव की स्थिति पैदा हो सकती है।

तीन दिनों में 1.56 लाख यात्रियों का गंगा पार करना इस बात को सामने लाता है कि पुल बंद रहने के दौरान जल परिवहन की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। यात्रियों की इतनी बड़ी संख्या को संभालने के लिए जहाजों का संचालन, घाटों पर भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और दोनों किनारों पर संपर्क मार्गों का सुचारू रहना बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में यात्रियों की वास्तविक जरूरत के अनुसार जल परिवहन की व्यवस्था को बनाए रखना प्रशासन के सामने अहम जिम्मेदारी होगी।

फिलहाल, विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य के दौरान भागलपुर और नवगछिया के बीच यात्रा करने वाले लोगों को जलमार्ग और उपलब्ध वैकल्पिक रास्तों के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनानी होगी। यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने, घाटों पर सुरक्षा नियमों का पालन करने और निर्धारित क्षमता वाले जहाजों से ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है। पुल की मरम्मत पूरी होने तक वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

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