भगवंत मान की अधिकारियों को नसीहत, बोले- ऐसा काम करें कि तबादले पर लोग कहें, इन्हें यहीं रहना चाहिए था

पंजाब CM भगवंत मान ने अधिकारियों से ईमानदारी और निष्ठा से काम करने को कहा। बोले, तबादले के समय जनता कहे कि इन्हें यहीं रहना चाहिए था।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अधिकारियों से ईमानदारी और निष्ठा के साथ ड्यूटी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिकारी ऐसा काम करें कि तबादले के समय जनता उन्हें याद करे। मान ने जनसेवा, प्रशासनिक जवाबदेही और जनता का विश्वास जीतने पर जोर दिया।

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रशासनिक अधिकारियों से ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का काम ऐसा होना चाहिए कि तबादले के समय लोग कहें कि उन्हें यहीं रहना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने डीजीपी, डीएसपी, उपायुक्तों और अतिरिक्त उपायुक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन अधिकारियों का प्राथमिक दायित्व अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना है।

ईमानदारी से काम करें अधिकारी, जनता का भरोसा जीतें

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पद पर रहते हुए ऐसा काम करना चाहिए, जिससे जनता के बीच उनकी अच्छी छवि बने। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से मिलने वाले सुकून की तुलना धन-दौलत से नहीं की जा सकती। व्यक्ति चाहे कितनी भी संपत्ति जमा कर ले, अंत में कुछ भी साथ नहीं जाता।

भगवंत मान की अधिकारियों को नसीहत, बोले- ऐसा काम करें कि तबादले पर लोग कहें, इन्हें यहीं रहना चाहिए था

मान ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने पद और अधिकारों का इस्तेमाल जनसेवा के लिए करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनता के साथ अधिकारियों का सीधा संपर्क होता है। ऐसे में उनका व्यवहार, निर्णय और काम करने का तरीका लोगों के अनुभव को प्रभावित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियां इस तरह निभानी चाहिए कि उनके तबादले के समय लोग उनके काम को याद करें और उन्हें उसी स्थान पर बनाए रखने की इच्छा जताएं। उनके अनुसार, प्रशासन में ईमानदारी और जनता का विश्वास किसी भी अधिकारी की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

प्रशासनिक अधिकारी भी सरकार का अहम हिस्सा

भगवंत मान ने कहा कि सरकार चलाने की जिम्मेदारी केवल मुख्यमंत्री या मंत्रियों तक सीमित नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी भी शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि अधिकारी ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करते हैं, तो सरकार की छवि बेहतर होती है। वहीं, जमीनी स्तर पर होने वाली गलतियों का असर पूरी सरकार की प्रतिष्ठा पर पड़ता है।

उन्होंने डीजीपी सहित उपस्थित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक मतभेद बने रह सकते हैं और केंद्र सरकार तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ मतभेद लोकतंत्र की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। हालांकि, इन परिस्थितियों के बावजूद अधिकारियों को अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटना चाहिए।

मान ने महाराजा रणजीत सिंह के किले का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से पंजाब में बेहतर शासन व्यवस्था स्थापित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने ईमानदारी, जवाबदेही और जनहित को प्रशासनिक कामकाज का आधार बनाने पर जोर दिया।

प्रशासन में युवा और महिला अधिकारियों की भागीदारी

मुख्यमंत्री ने प्रशासन में युवा अधिकारियों और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज कई युवा अधिकारी उपायुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

मान के अनुसार, कुछ युवा अधिकारियों ने उनसे बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की कल्पना नहीं की थी। मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में अधिकारियों को अपनी भूमिका को गंभीरता से निभाने और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की प्रेरणा दी।

उन्होंने अधिकारियों को अपने परिवार और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ व्यक्तिगत जीवन का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। पद का उद्देश्य केवल अधिकारों का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना भी होना चाहिए।

कलाकार के रूप में मिले प्यार का किया जिक्र

अपने संबोधन में भगवंत मान ने कलाकार के रूप में मिले लोगों के प्यार का भी उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे भी अपने काम और व्यवहार से जनता के बीच भरोसा और सम्मान हासिल करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए अधिकारियों को अपने फैसलों और व्यवहार से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। उनका संदेश था कि किसी अधिकारी की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके काम और जनता के साथ उसके व्यवहार से बनती है।

अपने संबोधन के अंत में मान ने पंजाबी अंदाज में कहा, “जिंदा रहे तो फिर मिलेंगे, लेकिन इस पंजाबी दिल ने कहा है कि मिलते रहे तो जिंदा रहेंगे।” उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को बधाई दी और जनसेवा के प्रति समर्पित रहने की अपील की।

Leave a comment