LS College में प्रिंटर विवाद गहराया, स्नातक चुनाव में उपकरण के इस्तेमाल पर प्राचार्य से जवाब तलब

मुजफ्फरपुर के LS कॉलेज में चुनाव के दौरान प्रिंटर इस्तेमाल पर विवाद गहराया। BRABU ने प्राचार्य से स्पष्टीकरण मांगा, छात्रों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
LS College में प्रिंटर विवाद गहराया, स्नातक चुनाव में उपकरण के इस्तेमाल पर प्राचार्य से जवाब तलब
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मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज (LS College) में स्नातक चुनाव के दौरान प्रिंटर के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया है। चुनाव में उपकरण के उपयोग को लेकर उठे सवालों के बाद कॉलेज के प्राचार्य से जवाब मांगा गया है। इस मामले ने कॉलेज प्रशासन की भूमिका, चुनावी प्रक्रिया में उपकरणों के इस्तेमाल और संबंधित नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

स्नातक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। ऐसे में चुनाव के दौरान इस्तेमाल किए गए किसी उपकरण को लेकर सवाल उठने पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगना मामले की जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

विश्वविद्यालय से जुड़े इस मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में आईक्यूएसी कार्यालय में उपलब्ध हेवी ड्यूटी प्रिंटर के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इस प्रिंटर का उपयोग आगामी विधानसभा परिषद चुनाव के एक प्रत्याशी के निजी चुनावी कार्य के लिए किया गया। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि और जिम्मेदारी तय होना जांच तथा संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में प्राचार्य से जवाब मांगा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुलपति के निर्देश पर पहले आईक्यूएसी समन्वयक से जानकारी ली गई थी। इसके बाद कुलानुशासक को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। निरीक्षण के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की।

विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि जिस समय की घटना का उल्लेख किया गया है, उस दौरान प्राचार्य कार्यालय में मौजूद नहीं थीं। रिपोर्ट के अनुसार, उनका आकस्मिक अवकाश आवेदन प्राप्त हुआ था। इसी संदर्भ में विश्वविद्यालय ने यह जानकारी भी मांगी कि उनकी अनुपस्थिति में कॉलेज के दैनिक प्रशासनिक कार्यों को संभालने के लिए किसे अधिकृत किया गया था। विश्वविद्यालय के पत्र में प्राचार्य से स्पष्टीकरण मिलने के 24 घंटे के भीतर उसे कुलपति के अवलोकन के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

इस प्रकरण के सामने आने के बाद छात्र नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कॉलेज के संसाधनों का इस्तेमाल विद्यार्थियों की पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थान के आधिकारिक कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। यदि जांच में किसी प्रत्याशी के निजी चुनावी कार्य के लिए कॉलेज के उपकरण के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो नियमों के अनुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। छात्र नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोष साबित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

एलएस कॉलेज उत्तर बिहार के पुराने और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल है। ऐसे संस्थान में उपलब्ध संसाधनों के उपयोग को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ध्यान खींचा है। फिलहाल, मामले में प्राचार्य के स्पष्टीकरण और विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

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