गया जिले के टनकुप्पा रेलवे स्टेशन के पास अंडरपास निर्माण की योजना को मंजूरी मिलने से स्थानीय ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। गया-कोडरमा रेलखंड पर स्थित इस स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों को लंबे समय से रेल पटरी के आर-पार जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को कई बार जोखिम उठाकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। अब अंडरपास बनने से इस समस्या का समाधान होने की संभावना है।
टनकुप्पा स्टेशन के पूर्वी गेट के पास प्रस्तावित अंडरपास को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मांग उठाई जा रही थी। रेलवे लाइन के दोनों ओर सड़क होने के बावजूद बीच में सुरक्षित संपर्क मार्ग नहीं होने से ग्रामीणों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर किसानों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों को इससे परेशानी होती है। कई लोग कम दूरी तय करने के लिए सीधे रेल पटरी पार करने का जोखिम उठाते रहे हैं। ऐसी स्थिति में ट्रेन आने के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग रही है कि स्टेशन के पास ऐसा रास्ता बनाया जाए, जिससे रेलवे लाइन के दोनों ओर बसे गांवों के बीच आवागमन आसान हो सके। रिपोर्टों के अनुसार, अंडरपास का निर्माण पूरा होने पर कुछ मार्गों पर लोगों की यात्रा की दूरी करीब 30 किलोमीटर से घटकर लगभग पांच किलोमीटर रह सकती है। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि बाइक, साइकिल और अन्य छोटे वाहनों से आने-जाने वाले लोगों को भी राहत मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित मार्ग और निर्माण के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा।
इस परियोजना को आगे बढ़ाने में गया के सांसद और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की ओर से भी पहल की गई थी। टनकुप्पा क्षेत्र की रेल समस्याओं को लेकर रेलवे अधिकारियों और रेल मंत्रालय के समक्ष मांग रखी गई थी। जुलाई 2026 में धनबाद रेल मंडल की संसदीय समिति की बैठक में भी क्षेत्र की रेल सुविधाओं और अंडरपास निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, टनकुप्पा स्टेशन के पूर्वी केबिन के पास रेल किलोमीटर 449/4 से 449/5 के बीच प्रस्तावित अंडरपास को मंजूरी मिल चुकी है और इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी भी सामने आई थी।
अंडरपास निर्माण का एक बड़ा उद्देश्य रेल पटरी को असुरक्षित तरीके से पार करने की घटनाओं को कम करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह लोग खेतों, बाजारों, स्कूलों और दूसरे गांवों तक पहुंचने के लिए रेलवे लाइन पार करने को मजबूर होते हैं। ट्रेन की गति और लगातार रेल परिचालन के कारण ऐसी जगहों पर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सुरक्षित अंडरपास बनने से लोगों को निर्धारित रास्ते से आने-जाने का विकल्प मिलेगा और रेल परिचालन में भी अनावश्यक बाधा कम हो सकती है।
टनकुप्पा के ग्रामीणों को अब निर्माण कार्य शुरू होने और उसे पूरा किए जाने की समयसीमा से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। रेलवे की योजना को स्वीकृति मिलना राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन लोगों को इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब निर्माण कार्य जमीन पर शुरू होकर पूरा होगा। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि परियोजना में और देरी नहीं होगी और वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा।








