भारत के विदेश सचिव Vikram Misri ने अमेरिका के ऊर्जा मंत्री Chris Wright के साथ हुई बैठक में ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत में दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, कोयला गैसीकरण (ठोस कोयले को रासायनिक प्रक्रिया के जरिए गैस में बदलने की तकनीक) और एलपीजी निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को विस्तार देने पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर नई रणनीतियाँ बनाई जा रही हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार विस्तार पर फोकस
बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर चर्चा हुई:
- परमाणु ऊर्जा सहयोग
- कोयला गैसीकरण तकनीक
- एलपीजी (LPG) निर्यात और आपूर्ति
- द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ाना
- ऊर्जा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना
भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने और नई तकनीकों को साझा करने पर सहमति जताई।

परमाणु ऊर्जा सहयोग पर बड़ा कदम
बैठक में असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को एक प्रमुख विषय के रूप में देखा गया। हाल ही में भारत द्वारा पारित नए कानून के बाद इस क्षेत्र में निजी भागीदारी के द्वार खुले हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इस बदलाव के बाद भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को अधिक निवेश और तकनीकी सहयोग मिलने की उम्मीद है।
बैठक में कोयला गैसीकरण तकनीक पर भी विशेष चर्चा हुई। यह तकनीक ठोस कोयले को रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से गैस में बदलकर ऊर्जा उत्पादन में उपयोग करती है। दोनों देशों ने इस तकनीक को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
अमेरिका की भागीदारी और सहयोग प्रस्ताव
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा, कोयला गैसीकरण और एलपीजी आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी और यह वैश्विक ऊर्जा स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस यात्रा के दौरान विक्रम मिसरी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी भारत की सैन्य साझेदारी को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
अमेरिकी पक्ष ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को लगातार बढ़ता हुआ बताया। चर्चा में उन्नत रक्षा उपकरणों, तकनीकी समन्वय और संयुक्त सुरक्षा रणनीतियों पर भी विचार किया गया। दोनों देशों ने माना कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।










