भारत का AI बाजार तेज रफ्तार पर, 2032 तक 131 अरब डॉलर पार करने का अनुमान

भारत में AI का तेजी से विस्तार, CCI रिपोर्ट में खुलासा। बिजनेस रणनीति में बढ़ती भूमिका के साथ डेटा नियंत्रण और प्राइस मैनिपुलेशन के जोखिम भी बढ़े।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जहां बड़े कॉर्पोरेट के साथ-साथ छोटे व्यवसाय भी इसे अपना रहे हैं। CCI रिपोर्ट के अनुसार AI अब बिजनेस रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है, हालांकि इसके साथ डेटा नियंत्रण और प्राइस मैनिपुलेशन जैसे जोखिम भी उभर रहे हैं।

India AI Market Growth: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जहां विभिन्न सेक्टर की कंपनियां अपने संचालन को बेहतर बनाने के लिए AI अपना रही हैं। CCI की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में बैंकिंग, रिटेल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ा है, जिसमें बड़े कॉर्पोरेट के साथ छोटे और मझोले व्यवसाय भी शामिल हैं। कंपनियां ग्राहक डेटा विश्लेषण और डिमांड फोरकास्टिंग के लिए AI का उपयोग कर रही हैं, जबकि सरकार इस ग्रोथ के साथ जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए नीतियां तैयार कर रही है।

हर सेक्टर में बढ़ रहा AI का इस्तेमाल

भारत में AI का उपयोग अब बड़े कॉर्पोरेट तक सीमित नहीं है। छोटे और मझोले व्यवसाय भी इसे तेजी से अपना रहे हैं। कंपनियां ग्राहक व्यवहार को समझने, डिमांड का अनुमान लगाने और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत कंपनियां ग्राहक डेटा एनालिसिस के लिए AI का सहारा ले रही हैं। वहीं, 69 प्रतिशत कंपनियां डिमांड फोरकास्टिंग में इसका उपयोग कर रही हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि AI अब बिजनेस रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।

AI इकोसिस्टम कैसे काम करता है

CCI की रिपोर्ट के मुताबिक, AI का पूरा इकोसिस्टम कई लेयर्स पर आधारित है। सबसे पहले डेटा कलेक्शन होता है, जिसके बाद क्लाउड कंप्यूटिंग और चिप्स जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। इसके बाद AI मॉडल तैयार किए जाते हैं और उन्हें अलग-अलग इंडस्ट्री में लागू किया जाता है।

इस इकोसिस्टम में जहां बड़ी ग्लोबल कंपनियां बेस लेयर पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, वहीं भारतीय स्टार्टअप्स एप्लिकेशन लेवल पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। खासतौर पर जनरेटिव AI और कस्टमर सर्विस टूल्स में भारतीय कंपनियां अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

ग्रोथ के साथ बढ़ रहे जोखिम

AI के तेजी से विस्तार के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। रिपोर्ट में डेटा कंट्रोल, एल्गोरिदमिक पारदर्शिता और प्राइस मैनिपुलेशन जैसे मुद्दों को लेकर चिंता जताई गई है।

करीब 37 प्रतिशत स्टार्टअप्स का मानना है कि AI के कारण कंपनियों के बीच मिलीभगत का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, 32 प्रतिशत स्टार्टअप्स ने प्राइस डिस्क्रिमिनेशन को लेकर चिंता जाहिर की है। ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा भी सुनिश्चित करे।

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