भारत के IT और सोलर PLI फैसलों को लेकर WTO पहुंचा चीन, उठाए सवाल, जानिए पूरा मामला

भारत के IT और सोलर PLI फैसलों को लेकर WTO पहुंचा चीन, उठाए सवाल, जानिए पूरा मामला

चीन ने WTO में भारत के IT प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी और सोलर PLI स्कीम को चुनौती दी है। भारत का कहना है कि ये कदम घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने और निर्माण क्षमता मजबूत करने के लिए जरूरी हैं।

World News: चीन ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत भारत की ओर से आईटी प्रोडक्ट्स पर लगाए गए कस्टम ड्यूटी और सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए घोषित PLI (Production Linked Incentive) स्कीम को लेकर है। WTO के नियमों के मुताबिक, किसी भी व्यापारिक विवाद में पहला कदम परामर्श यानी consultation लेना होता है। चीन ने इस प्रक्रिया को शुरू करने की मांग की है और इस मामले में भारत के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है।

IT प्रोडक्ट्स पर चीन की आपत्ति

चीन का आरोप है कि भारत ने कुछ तकनीकी सामानों पर जो कस्टम ड्यूटी लगाई है, वह वैश्विक टैरिफ सीमा से अधिक है। इन तकनीकी उत्पादों में सेमीकंडक्टर डिवाइस, मोबाइल और वायरलेस नेटवर्क के फोन, सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनें और अन्य आईटी संबंधित उत्पाद शामिल हैं। चीन का कहना है कि इस तरह का टैरिफ WTO के नियमों के खिलाफ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने घरेलू उद्योगों को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने के मकसद से यह टैरिफ लागू किया है। लेकिन चीन का मानना है कि इससे उसकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश कठिन हो गया है और इसे व्यापारिक भेदभाव के तौर पर देखा जा सकता है।

सोलर PLI स्कीम पर चीन की चुनौती

चीन ने भारत की सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI स्कीम को भी चुनौती दी है। इसका मुख्य आरोप यह है कि स्कीम में लोकल वैल्यू एडिशन की शर्तें हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के अनुरूप नहीं हैं। चीन का कहना है कि यह योजना घरेलू उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है और आयातित सामानों के खिलाफ भेदभाव करती है। इसे सब्सिडी की श्रेणी में रखा जा सकता है, जो WTO नियमों के अनुसार सही नहीं है।

PLI स्कीम 2021 में भारत सरकार द्वारा सोलर सेक्टर में घरेलू निवेश बढ़ाने और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए शुरू की गई थी। इस स्कीम का उद्देश्य था आयात पर निर्भरता कम करना और देश में सोलर उत्पादन को बढ़ावा देना। चीन का तर्क है कि इस योजना के तहत केवल भारत में निर्मित मॉड्यूल को लाभ मिलता है, जबकि विदेशी उत्पादों को फायदा नहीं मिलता।

WTO की प्रतिक्रिया

WTO ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। चीन ने आरोप लगाया है कि भारत की टैरिफ नीति और PLI स्कीम में घरेलू इनपुट के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है, जिससे चीनी आयात पर भेदभाव होता है। यह अनुरोध 23 दिसंबर को WTO के सभी सदस्यों के बीच साझा किया गया।

WTO के नियमों के अनुसार, अगर भारत और चीन के बीच परामर्श से समाधान नहीं निकलता है, तो चीन WTO से विवाद निपटान पैनल बनाने की मांग कर सकता है। इस पैनल का काम होगा कि दोनों पक्षों के दावों और तथ्यों की जांच करके निष्पक्ष निर्णय दे।

भारत और चीन के व्यापारिक संबंध

चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और सबसे बड़ा आयात स्रोत है। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत ने चीन को करीब 10 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि चीन से आयात लगभग 74 अरब डॉलर रहा। यह ट्रेड डिफिसिट दिखाता है कि भारत ने चीन से काफी अधिक मात्रा में माल आयात किया।

भारत की नीति का मकसद

भारत सरकार का मानना है कि IT और सोलर PLI फैसले घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं। IT प्रोडक्ट्स पर टैरिफ से भारत की टेक इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धा में फायदा मिलेगा और देश में निर्माण बढ़ेगा। वहीं सोलर PLI स्कीम का उद्देश्य अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना और देश में ग्रीन एनर्जी पर निर्भरता को मजबूत करना है।

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