भारत बना रहा छठी पीढ़ी का फाइटर जेट, 2040 तक IAF में शामिल होने की संभावना

भारत छठी पीढ़ी के स्वदेशी फाइटर जेट पर काम कर रहा है, जिसे 2040 तक भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा सकता है। जानें इस एडवांस लड़ाकू विमान की खासियत, टेक्नोलॉजी

भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट एएमसीए का डिजाइन प्लान तैयार हो चुका है और इसके प्रोटोटाइप पर काम भी जारी है। इसी के साथ भारतीय सशस्त्र बलों ने छठी पीढ़ी के स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रम पर भी शुरुआती पहल शुरू कर दी है।

नई दिल्ली: भारत अब उन्नत सैन्य तकनीक की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास पर गंभीरता से विचार कर रहा है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने संसद की रक्षा संबंधी समिति को बताया कि भारत भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छठी पीढ़ी के फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल होने के विकल्प तलाश रहा है।

उन्होंने संकेत दिया कि यदि योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो भारतीय वायु सेना वर्ष 2040 तक ऐसे उन्नत लड़ाकू विमानों का उपयोग शुरू कर सकती है। यह कदम भारत की रक्षा क्षमता को अगले स्तर पर ले जाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

दो अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम में शामिल होने का विकल्प

सीडीएस जनरल चौहान के अनुसार, दुनिया में इस समय छठी पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करने के लिए दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह काम कर रहे हैं। पहला समूह ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) है, जिसमें

  • यूनाइटेड किंगडम,
  • इटली और
  • जापान शामिल हैं

दूसरा समूह फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) है, जिसमें

  • फ्रांस,
  • जर्मनी और
  • स्पेन मिलकर काम कर रहे हैं

भारत इन दोनों में से किसी एक कार्यक्रम के साथ जुड़ने की संभावना पर विचार कर रहा है ताकि वह भविष्य की लड़ाकू विमान तकनीक में पीछे न रह जाए।

पांचवीं पीढ़ी के बाद अगला लक्ष्य

भारत पहले से ही पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) पर काम कर रहा है। यह स्वदेशी परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी एयरोस्पेस योजनाओं में से एक मानी जा रही है। इस परियोजना में निजी और सरकारी कंपनियों की भागीदारी है, जिनमें

  • Tata Advanced Systems,
  • Larsen & Toubro,
  • Bharat Electronics Limited और
  • Bharat Forge शामिल हैं

रिपोर्ट के अनुसार AMCA का पहला प्रोटोटाइप 2029 तक तैयार हो सकता है और 2034–35 के आसपास इसका उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इसी वजह से भारत अब अगली पीढ़ी के विमान पर भी शुरुआती स्तर पर काम शुरू करना चाहता है।

छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की खासियत

छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को वर्तमान पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों से भी अधिक उन्नत माना जा रहा है। इनमें कई ऐसी तकनीकें होंगी जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही हैं। संभावित विशेषताएं:

  • मानव रहित या वैकल्पिक रूप से पायलट-रहित संचालन
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नियंत्रण प्रणाली
  • अत्याधुनिक रडार और सेंसर नेटवर्क
  • सैटेलाइट आधारित संचार
  • डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (लेजर जैसे हथियार)
  • उन्नत इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस सिस्टम
  • सुपरकंप्यूटिंग आधारित मिशन कंट्रोल

इन तकनीकों के कारण छठी पीढ़ी के विमान भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

दुनिया में कहां तक पहुंचा विकास

वर्तमान में दुनिया के किसी भी देश के पास पूरी तरह तैयार छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान नहीं है, लेकिन कई बड़े कार्यक्रम चल रहे हैं। अमेरिका Next Generation Air Dominance (NGAD) कार्यक्रम पर काम कर रहा है, जबकि चीन भी अपने उन्नत लड़ाकू विमानों पर काम कर रहा है, हालांकि उसने आधिकारिक जानकारी सीमित रखी है। अभी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट मुख्य रूप से

  • अमेरिका,
  • रूस और
  • चीन के पास हैं

भारत का AMCA इस सूची में शामिल होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत समय रहते अंतरराष्ट्रीय साझेदारी करता है और अपनी स्वदेशी परियोजनाओं को गति देता है, तो 2040 तक छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकते हैं।

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