भारत में नई प्रोडक्शन लाइन मिलने के बाद वैश्विक एविएशन कंपनी Airbus की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। कंपनी का मानना है कि भारत में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के तेजी से विस्तार के चलते उसके 1,000 से अधिक हेलिकॉप्टरों की मांग पैदा हो सकती है।
नई दिल्ली: भारत वैश्विक एविएशन मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। यूरोप की अग्रणी एयरोस्पेस कंपनी Airbus ने घोषणा की है कि उसका पहला ‘मेड इन इंडिया’ H125 हेलिकॉप्टर 2027 की शुरुआत तक भारतीय असेंबली लाइन से तैयार होकर बाहर आएगा। यह हेलिकॉप्टर भारत में Tata Advanced Systems Limited के साथ संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) के तहत निर्मित किया जाएगा।
यह परियोजना न केवल भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देगी, बल्कि सिविल और डिफेंस एविएशन दोनों क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगी।
₹1,000 करोड़ का निवेश, कर्नाटक में नई असेंबली लाइन
एयरबस भारत में नई फाइनल असेंबली लाइन स्थापित करने के लिए लगभग ₹1,000 करोड़ का निवेश कर रहा है। यह उत्पादन सुविधा कर्नाटक के वेमगल में स्थापित की जा रही है। इस परियोजना का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया।
एयरबस हेलिकॉप्टर्स के सीईओ Bruno Even ने एक साक्षात्कार में कहा कि कंपनी भारत में H125 हेलिकॉप्टर के लिए 1,000 से अधिक यूनिट्स का संभावित बाजार देख रही है। इसमें क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आपदा प्रबंधन, एयर एम्बुलेंस, पर्यटन और रक्षा आवश्यकताएं शामिल हैं।
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सिविल एविएशन में बड़ा अवसर
भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क (Regional Connectivity) तेजी से विस्तार कर रहा है। छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को जोड़ने के लिए हेलिकॉप्टर सेवाओं की मांग बढ़ रही है। H125 हेलिकॉप्टर उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन, बेहतर विजिबिलिटी और कम वाइब्रेशन के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि इसे मल्टी-मिशन हेलिकॉप्टर के रूप में वैश्विक पहचान मिली है।
H125, एयरबस की इकोरियू (Écureuil) फैमिली का हिस्सा है। इस परिवार के 7,200 से अधिक हेलिकॉप्टर 137 देशों में डिलीवर किए जा चुके हैं और 2,600 से अधिक ऑपरेटर इन्हें संचालित कर रहे हैं। इसकी विश्वसनीयता और बहुउद्देश्यीय क्षमता इसे भारत जैसे विविध भौगोलिक परिस्थितियों वाले देश के लिए उपयुक्त बनाती है।
भारत बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब?
एयरबस को भारतीय सशस्त्र सेनाओं से भी बड़े ऑर्डर की उम्मीद है। भारतीय सेना पहले ही H125 हेलिकॉप्टर को लीज पर लेकर उत्तरी कमांड के अग्रिम क्षेत्रों में इसका परीक्षण कर चुकी है। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण इसे सैन्य अभियानों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। ब्रुनो इवेन ने संकेत दिया कि यदि भारतीय रक्षा बल H125 को अपने मिशनों के लिए चुनते हैं, तो कंपनी भारत में ही सैन्य संस्करण का निर्माण करने के लिए तैयार है। इससे भविष्य में भारत से सैन्य हेलिकॉप्टरों के निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरबस और टाटा के बीच यह साझेदारी भारत को वैश्विक हेलिकॉप्टर निर्माण श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिला सकती है। वेमगल सुविधा से अगले 20 वर्षों में लगभग 500 H125 हेलिकॉप्टरों का उत्पादन संभावित है। यह परियोजना स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को भी मजबूत करेगी, जिससे भारतीय एमएसएमई और एयरोस्पेस कंपनियों को तकनीकी और औद्योगिक लाभ मिलेगा। साथ ही, इससे उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।










