ग्लोबल टीचर प्राइज से सम्मानित हुई भारत की रूबल नागी, पढ़ाई में योगदान के लिए मिली पहचान

रूबल नागी ने 800+ शिक्षा केंद्र और मिसाल परियोजना के माध्यम से वंचित बच्चों को शिक्षा और भावनात्मक सहयोग दिया, बस्तियों में सीखने की नई रोशनी जगाई।

भारत की टीचर और कलाकार रूबल नागी ने वंचित बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के अपने प्रयासों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। मुंबई और अन्य राज्यों में 800 से अधिक शिक्षण केंद्र स्थापित कर, कला आधारित शिक्षा और भावनात्मक सहयोग के माध्यम से उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और जीवन में बदलाव लाया है। उनकी मिसाल परियोजना ने बस्तियों को खुली कक्षाओं में बदल दिया है।

Education and Social Impact: भारत की टीचर और कलाकार रूबल नागी ने वंचित बच्चों की शिक्षा को नए आयाम दिए हैं। मुंबई की बस्तियों से शुरू होकर देशभर में फैले उनके 800 से अधिक शिक्षा केंद्रों में कला आधारित पढ़ाई और मार्गदर्शन दिया जाता है। बच्चों को गणित, भाषा और जीवन कौशल सिखाने के साथ-साथ भावनात्मक सहयोग भी मिलता है। यह पहल बच्चों की शिक्षा में रुचि बढ़ाने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए की गई है।

जम्मू-कश्मीर से शुरू हुआ सफर, कला से बनी पहचान

रूबल नागी का जन्म 8 जुलाई 1980 को जम्मू-कश्मीर में हुआ। बचपन से ही उन्हें पेंटिंग और मूर्तिकला में रुचि थी, लेकिन उन्होंने अपनी कला को सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कला को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया और जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का मिशन शुरू किया।

उनके करियर का एक अहम पड़ाव तब आया, जब उन्हें राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिला। इस उपलब्धि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके प्रयासों को नई दिशा दी।

ग्लोबल टीचर प्राइज से सम्मानित हुई भारत की रूबल नागी, पढ़ाई में योगदान के लिए मिली पहचान

बस्तियों में शिक्षा की नई रोशनी, 800 से ज्यादा केंद्र स्थापित

मुंबई के कोलाबा क्षेत्र की एक बस्ती में शुरू हुआ उनका छोटा प्रयास आज देशव्यापी अभियान बन चुका है। उनकी संस्था, रुबल नागी आर्ट फाउंडेशन, वंचित बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा केंद्र संचालित करती है, जहां बच्चों को गणित, भाषा और बुनियादी शिक्षा सिखाई जाती है। कई बच्चों ने पहली बार यहीं से पढ़ना-लिखना सीखा और स्कूल में दोबारा दाखिला लिया।

अब तक उनके फाउंडेशन ने देशभर में 100 से अधिक वंचित समुदायों में 800 से ज्यादा शिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों में कला आधारित शिक्षा पद्धति अपनाई जाती है, जिससे कठिन विषयों को भी आसान और रोचक बनाया जाता है। स्वयंसेवक बच्चों को पढ़ाने के साथ जरूरी शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं।

‘मिसाल परियोजना’ से बदली बस्तियों की तस्वीर

रूबल नागी की ‘मिसाल परियोजना’ के तहत झुग्गी-झोपड़ियों की दीवारों को शिक्षा का माध्यम बनाया गया है। इन दीवारों पर विज्ञान, स्वच्छता, पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े भित्ति चित्र बनाए जाते हैं, जिससे पूरी बस्ती एक खुली कक्षा में बदल जाती है। इससे बच्चों और समुदाय में सीखने की रुचि और जागरूकता बढ़ी है।

इसके अलावा, फाउंडेशन सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चों को भावनात्मक सहयोग भी देता है। स्वयंसेवक बच्चों और उनके परिवारों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो और वे अपने भविष्य के लिए बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।

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