Google के CEO सुंदर पिचाई ने India AI Impact Summit 2026 में भारत में 15 अरब डॉलर (1,36,650 करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक निवेश की घोषणा की। निवेश के तहत विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक AI हब स्थापित होगा, जिसमें गीगावाट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और लाखों नौकरियों के अवसर होंगे। यह कदम भारत के डिजिटल भविष्य को मजबूत करेगा।
India AI Investment Update: Google के CEO सुंदर पिचाई ने India AI Impact Summit 2026 में भारत में 15 अरब डॉलर का सबसे बड़ा निवेश करने की घोषणा की, जो अगले पांच वर्षों में विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक AI हब स्थापित करेगा। इस हब में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्लीन एनर्जी और इंटरनेशनल सबसी केबल गेटवे शामिल होंगे। पीएम मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी में यह घोषणा भारत के डिजिटल और तकनीकी विकास को नया impulso देगी और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी खोलेगी।
Google का भारत में ऐतिहासिक निवेश
Google के CEO सुंदर पिचाई ने India AI Impact Summit 2026 में भारत में 15 अरब डॉलर (करीब 1,36,650 करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की। यह निवेश अगले पांच वर्षों में विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक AI हब स्थापित करेगा। हब में गीगावाट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता होगी और यह देश में लाखों नौकरियों का अवसर भी लाएगा। सुंदर पिचाई ने इस दौरान पीएम मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियों के साथ अपने पुराने अनुभव भी साझा किए।

विशाखापत्तनम में AI हब
विशाखापत्तनम में बनने वाला Google AI हब हाई-परफॉर्मेंस और लो-लेटेंसी सेवाओं के लिए डिज़ाइन किया जाएगा। इसमें बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर, एडवांस्ड AI इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी सोर्स शामिल होंगे। यह इंटरनेशनल सबसी केबल गेटवे के जरिए भारत के डिजिटल बैकबोन और कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इस हब के जरिए भारतीय बिज़नेस और डेवलपर्स को AI समाधान बनाने में मदद मिलेगी।
Google का यह निवेश भारत में अब तक का सबसे बड़ा है। पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने कहा था कि यह फैसिलिटी AI रिसर्च, एप्लिकेशन और सर्विसेज को बड़े पैमाने पर सपोर्ट करेगी।
वैश्विक दृष्टिकोण और UN का बयान
समिट में UN महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने कहा कि AI का भविष्य कुछ अरबपतियों के हाथों में नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI हर किसी के लिए होना चाहिए और इसके प्रचार और भय को साझा साक्ष्य और वैश्विक ज्ञान से बदलना जरूरी है। उनका मानना है कि बिना पर्याप्त निवेश के कई देश AI की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
गुटारेस के इस बयान ने स्पष्ट किया कि तकनीकी निवेश केवल बड़े देशों या कंपनियों का ही मुद्दा नहीं है, बल्कि वैश्विक समानता और डिजिटल न्याय का भी प्रश्न है।













