स्टारलिंक को अमेरिका के FCC से 7,500 नए सैटेलाइट लॉन्च करने और पांच नई फ्रीक्वेंसी पर ऑपरेट करने की मंजूरी मिली है। इससे कंपनी के नेटवर्क की क्षमता दोगुनी होगी और भारत समेत दुनियाभर में तेज और भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलने की संभावना बढ़ गई है।
Starlink India Launch: अमेरिका के FCC ने एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को अपने नेटवर्क में 7,500 सेकंड जेनरेशन सैटेलाइट जोड़ने और पांच नई फ्रीक्वेंसी पर ऑपरेट करने की मंजूरी दी है। इससे कंपनी के कुल सैटेलाइट्स की संख्या 15,000 हो जाएगी। स्टारलिंक ने भारत में प्रोविजनल लाइसेंस हासिल कर लिया है और ट्रायल्स चल रहे हैं। इस मंजूरी के बाद भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस तेज और भरोसेमंद होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम दूरदराज क्षेत्रों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कवरेज बढ़ाने में मदद करेगा।
FCC से मिली अहम मंजूरी
FCC ने एलन मस्क की कंपनी को अपने नेटवर्क में नए सैटेलाइट जोड़ने की अनुमति दी है। इसके बाद स्टारलिंक के कुल सैटेलाइट्स की संख्या बढ़कर 15,000 हो जाएगी। यह मंजूरी कंपनी के लॉन्ग टर्म प्लान का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
FCC प्रमुख ब्रेंडन कार के मुताबिक, यह फैसला नेक्स्ट जेनरेशन सैटेलाइट सर्विस के लिए अहम साबित होगा। ज्यादा सैटेलाइट्स के जरिए हाई स्पीड और बेहतर ब्रॉडबैंड कवरेज संभव हो पाएगी।

फ्रीक्वेंसी पर भी खुला रास्ता
FCC ने स्टारलिंक को सिर्फ सैटेलाइट बढ़ाने की ही नहीं, बल्कि पांच नई फ्रीक्वेंसी और वेव्स पर ऑपरेट करने की भी इजाजत दी है। पहले इन बैंड्स पर कंपनी को काम करने की अनुमति नहीं थी।
नई फ्रीक्वेंसी मिलने से नेटवर्क की स्पीड, क्षमता और विश्वसनीयता में सुधार होगा। खासतौर पर दूरदराज और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों में इसका असर ज्यादा देखने को मिलेगा।
भारत को कैसे होगा फायदा
स्टारलिंक को भारत में प्रोविजनल लाइसेंस मिल चुका है और ट्रायल्स जारी हैं। नए सैटेलाइट्स की मंजूरी से भारत में लॉन्च होने वाली सर्विस को मजबूत बैकअप मिलेगा और यूजर्स को तेज इंटरनेट का अनुभव मिल सकेगा।
कंपनी की सीनियर टीम भारत सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में शुरू हो सकती है।












