देश के सरकारी कर्मचारियों ने समान कार्य-समान वेतन, स्थायी नियुक्ति और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अब आर-पार की जंग शुरू कर दी है। झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के हालिया सम्मेलन में यह स्पष्ट हो गया कि कर्मचारी 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रीय आम हड़ताल के जरिए अपनी मांगों को मजबूती से सरकार के सामने रखेंगे।
नई दिल्ली: देशभर के सरकारी कर्मचारी अब ‘समान कार्य – समान वेतन’ और पुरानी पेंशन बहाली जैसी मांगों को लेकर आर-पार के मूड में हैं। जमशेदपुर के सिदगोड़ा टाउन हॉल में आयोजित झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के आठवें राज्य स्तरीय सम्मेलन में यह साफ हो गया कि कर्मचारी अब झुकने वाले नहीं हैं।
दो दिनों तक चले इस मंथन में राज्यभर के 500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए और उन्होंने 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रीय आम हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया। इस हड़ताल को लेकर कर्मचारियों में जोश और संगठित निर्णय लेने की भावना स्पष्ट तौर पर देखी गई।
झारखंड सम्मेलन में कर्मचारी बोले साफ
झारखंड के जमशेदपुर स्थित सिदगोड़ा टाउन हॉल में आयोजित आठवें राज्य स्तरीय सम्मेलन में राज्यभर से 500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। दो दिनों तक चले इस मंथन में कर्मचारियों ने यह साफ कर दिया कि अब वे झुकने वाले नहीं हैं। कर्मचारियों ने कहा कि संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से उन्हें शोषण का सामना करना पड़ रहा है।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "देश के विभिन्न सरकारी विभागों में एक करोड़ से अधिक पद खाली पड़े हैं, फिर भी स्थायी नियुक्तियों के बजाय सरकार संविदा और आउटसोर्सिंग का सहारा ले रही है। यह कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ अन्याय है।

आउटसोर्सिंग को बताया 'शोषण का हथियार'
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित कर रही है। लांबा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो 12 फरवरी को पूरे देश में सड़कें जाम होंगी। कर्मचारी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि नए चार लेबर कोड्स (44 पुराने श्रम कानूनों के स्थान पर) लागू करने का मकसद कर्मचारियों के यूनियन बनाने और अपनी आवाज उठाने के अधिकारों को कुचलना है।
साथ ही, 12 घंटे काम कराने की योजना को मजदूर विरोधी बताया गया और इसे वापस लेने की मांग की गई। कर्मचारियों ने 18 माह का बकाया डीए-डीआर जारी न करने को भी गंभीर अन्याय बताया। 12 फरवरी की हड़ताल में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) को छोड़कर देश की सभी 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने एक मंच पर आकर समर्थन दिया है। इसके साथ ही, केंद्र और राज्य स्तर के सैकड़ों अखिल भारतीय फेडरेशन भी इस आंदोलन में शामिल हैं।












