वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम 5 से 7 मई के बीच भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं, जिसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह यात्रा भारत और वियतनाम के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
न्यूज़ दिल्ली: भारत की विदेश नीति और इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए एक अहम घटनाक्रम सामने आने वाला है। Vietnam के राष्ट्रपति To Lam 5 से 7 मई के बीच India की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरे को दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत और वियतनाम के बीच लगभग ₹5,800 करोड़ (लगभग 700 मिलियन डॉलर) की रक्षा डील, जिसमें BrahMos missile system शामिल हो सकती है, पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत-वियतनाम संबंधों में नया अध्याय
भारत और वियतनाम के संबंध दशकों पुराने हैं और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देशों ने 2016 में अपनी साझेदारी को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” (Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा दिया था, जो अब 10 वर्ष पूरे कर रही है।इस यात्रा को इसी विशेष अवसर से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे उम्मीद है कि द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलेगी।
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा सहयोग माना जा रहा है। भारत और वियतनाम के बीच पहले से ही सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग रहा है। अब संभावना जताई जा रही है कि दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति और तकनीकी सहयोग पर समझौते को आगे बढ़ा सकते हैं। यह सौदा यदि अंतिम रूप लेता है, तो यह दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा कूटनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और भारत यात्रा कार्यक्रम
वियतनाम के राष्ट्रपति के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा, जिसमें कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।विदेश मंत्रालय के अनुसार, 6 मई को राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद वे Narendra Modi और राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मुलाकात करेंगे।
इस दौरान दोनों देशों के नेता व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे। भारत और वियतनाम दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और स्वतंत्र नौवहन (freedom of navigation) के समर्थक हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
रूस और वियतनाम संबंधों का प्रभाव
वियतनाम के रूस के साथ भी लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं। इस कारण भारत के साथ बढ़ता सैन्य सहयोग क्षेत्रीय कूटनीति में एक नया संतुलन पैदा कर सकता है। विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और सामरिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह साझेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि इस दौरे का उद्देश्य आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना है, लेकिन दक्षिण एशियाई और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इसे व्यापक रणनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति तो लाम भारत यात्रा के दौरान बोधगया और मुंबई भी जाएंगे। यह यात्रा न केवल राजनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन सहयोग को भी बढ़ावा देगी।










