भोपाल मेट्रो ब्लू लाइन प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी, यूटिलिटी शिफ्टिंग और ट्रैफिक बना चुनौती

Bhopal मेट्रो ब्लू लाइन प्रोजेक्ट में यूटिलिटी शिफ्टिंग, ट्रैफिक और संकरी सड़कों जैसी चुनौतियों से काम की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

भोपाल मेट्रो की ब्लू लाइन परियोजना में यूटिलिटी शिफ्टिंग, संकरी सड़कों और ट्रैफिक डायवर्जन जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इन कारणों से दिसंबर 2028 तक प्रोजेक्ट पूरा करने के लक्ष्य पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

भोपाल: शहर में निर्माणाधीन भोपाल मेट्रो की ब्लू लाइन परियोजना कई तकनीकी और जमीनी चुनौतियों से जूझ रही है। भदभदा से रत्नागिरी-भेल तक बनने वाली इस लाइन को तय समय से पहले पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन अब यूटिलिटी शिफ्टिंग, ट्रैफिक दबाव और मानसून की आशंकाओं ने इसकी रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ब्लू लाइन प्रोजेक्ट की रफ्तार पर बढ़ीं मुश्किलें

भोपाल मेट्रो की ब्लू लाइन परियोजना शहर की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन योजनाओं में शामिल है। भदभदा से रत्नागिरी-भेल तक बनने वाली इस लाइन को पहले ऑरेंज लाइन से पहले पूरा करने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब जमीनी हालात अलग तस्वीर दिखा रहे हैं।

प्रोजेक्ट का काम कई हिस्सों में तेजी से चल रहा है, लेकिन निर्माण के दौरान सामने आ रही तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां इसकी गति को प्रभावित कर रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यदि मौजूदा समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हुआ तो दिसंबर 2028 की तय डेडलाइन प्रभावित हो सकती है।

जमीन के नीचे की यूटिलिटी बनी बड़ी चुनौती

मेट्रो रूट के नीचे पहले से मौजूद पाइपलाइन, बिजली के केबल और अन्य यूटिलिटी नेटवर्क को शिफ्ट करने में काफी समय लग रहा है। कई जगहों पर खुदाई के दौरान पुराने नेटवर्क सामने आने से काम रोकना पड़ रहा है।

इन कार्यों के कारण कुछ इलाकों में इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यूटिलिटी शिफ्टिंग किसी भी मेट्रो प्रोजेक्ट का सबसे जटिल हिस्सा होता है और इसमें अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

संकरी सड़कें और ट्रैफिक बना सिरदर्द

भदभदा, जवाहर चौक और आसपास के कई व्यस्त इलाकों में सड़कें पहले से ही संकरी हैं। मेट्रो निर्माण के कारण यहां ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है, जिससे लंबा जाम लग रहा है।

ऑफिस टाइम और स्कूल समय में स्थिति और ज्यादा खराब हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार छोटे रास्तों पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ने से आवागमन मुश्किल हो जाता है। दुकानदारों को भी व्यापार प्रभावित होने की शिकायत है।

मानसून और प्रदूषण को लेकर चिंता

निर्माण स्थलों के आसपास उड़ती धूल और मशीनों के शोर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आसपास रहने वाले नागरिकों ने स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

इसके अलावा आने वाले मानसून को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। बारिश के दौरान खुदाई वाले क्षेत्रों में जलभराव और ट्रैफिक अव्यवस्था की समस्या बढ़ सकती है। यदि समय रहते पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए तो निर्माण कार्य की गति और धीमी हो सकती है।

हालांकि, मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि चुनौतियों के बावजूद परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के प्रयास जारी हैं।

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