तमिलनाडु में TVK की नवनिर्वाचित विधायक मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा ने 12 अक्टूबर 2026 को विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। दोनों उपचुनाव में जीती थीं। इसके साथ 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK की संख्या बढ़कर 109 हो गई।
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की नवनिर्वाचित विधायक मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा ने तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। दोनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर की मौजूदगी में शपथ ग्रहण की। उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद सदन में उनकी औपचारिक एंट्री हुई है।
इन दोनों विधायकों के शपथ लेने के साथ 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में TVK की संख्या बढ़कर 109 हो गई है। दोनों ने मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों से उपचुनाव जीता था। ये दोनों सीटें अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।
मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा ने ली शपथ
तमिलनाडु विधानसभा में मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा का शपथ ग्रहण उपचुनाव के बाद विधायी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों नेताओं ने विधायक के रूप में शपथ लेकर सदन की कार्यवाही में भाग लेने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की।
मरगथम कुमारवेल मदुरांतकम विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई हैं, जबकि पी. सत्यबामा ने धारापुरम सीट से जीत दर्ज की। दोनों निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।
शपथ ग्रहण विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर की उपस्थिति में हुआ। इसके बाद दोनों नेता राज्य विधानसभा में अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए औपचारिक रूप से सदस्य बन गईं।
उपचुनाव के बाद TVK की संख्या 109 हुई
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं। दोनों नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ लेने के बाद TVK की सदन में संख्या बढ़कर 109 हो गई है। यह आंकड़ा राज्य की राजनीति में पार्टी की विधायी मौजूदगी को दर्शाता है।
विधानसभा में किसी पार्टी की संख्या उसके विधायी प्रभाव और सदन में उसकी भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, केवल सीटों की संख्या के आधार पर सरकार की स्थिति या बहुमत से जुड़े निष्कर्ष निकालने के लिए अन्य दलों की संख्या और समर्थन की स्थिति को भी देखना आवश्यक है।
दोनों विधायकों की जीत और शपथ ग्रहण से TVK को विधानसभा में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिला है। अब दोनों नेता अपने क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों को सदन में उठाने और विधायी गतिविधियों में हिस्सा लेने की भूमिका निभा सकेंगी।
AIADMK छोड़कर TVK में शामिल हुई थीं दोनों नेता
इन दोनों सीटों पर उपचुनाव पूर्व में AIADMK के विधायक रहे सदस्यों के इस्तीफे के बाद कराए गए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दोनों पूर्व विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ने के साथ AIADMK से भी इस्तीफा दे दिया था और सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम में शामिल हो गए थे।
इसके बाद TVK ने दोनों नेताओं को संबंधित सीटों से फिर उम्मीदवार बनाया। उपचुनाव में मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा ने जीत हासिल की।
इस घटनाक्रम में पार्टी बदलने, विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने और दोबारा चुनाव लड़ने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रही। उपचुनाव के नतीजों के बाद दोनों नेताओं को विधायक के रूप में शपथ लेने का अवसर मिला।
हालांकि, किसी भी उपचुनाव के राजनीतिक प्रभाव का आकलन करते समय उम्मीदवारों के प्रदर्शन के साथ स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं के रुझान और अन्य दलों की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।
मदुरांतकम और धारापुरम सीटों का महत्व
मदुरांतकम और धारापुरम तमिलनाडु के विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनकी सीटें अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। इन क्षेत्रों से निर्वाचित विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और राज्य विधानसभा में स्थानीय समस्याओं, विकास योजनाओं तथा सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों को उठा सकते हैं।
मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा की जीत के बाद इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों को विधानसभा में प्रतिनिधित्व मिला है। शपथ ग्रहण के बाद वे सदन की विधायी गतिविधियों में औपचारिक रूप से भाग ले सकेंगी।
राज्य विधानसभा में प्रतिनिधित्व का महत्व केवल पार्टी की संख्या तक सीमित नहीं है। निर्वाचित सदस्यों की जिम्मेदारी अपने क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं और अपेक्षाओं को संबंधित मंच पर उठाना भी है।
तमिलनाडु की राजनीति में आगे क्या होगा?
दोनों विधायकों के शपथ लेने से TVK की विधानसभा में संख्या 109 तक पहुंच गई है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में पार्टी की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, आगे की राजनीतिक दिशा विधानसभा में अन्य दलों की संख्या, गठबंधनों और सदन में होने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगी।
राजनीतिक दलों के लिए उपचुनाव महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनके परिणाम स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के रुझान और संगठनात्मक समर्थन के संकेत दे सकते हैं। लेकिन उपचुनाव के नतीजों को पूरे राज्य में राजनीतिक समर्थन का निर्णायक प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।
मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा अब विधानसभा में अपनी भूमिका निभाएंगी। उनके सामने अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दों को उठाने और राज्य के विधायी कार्यों में हिस्सा लेने की जिम्मेदारी होगी।









