बिहार में सुधा की तर्ज पर खुलेंगे 100 फ्रेश कैच कियोस्क, 10.56 करोड़ रुपये होंगे खर्च

बिहार में सुधा की तर्ज पर 100 फ्रेश कैच कियोस्क बनेंगे। 10.56 करोड़ रुपये की योजना से ताजी मछली, आधुनिक सुविधाएं और स्वच्छ बिक्री केंद्र उपलब्ध होंगे।
बिहार में सुधा की तर्ज पर खुलेंगे 100 फ्रेश कैच कियोस्क, 10.56 करोड़ रुपये होंगे खर्च
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बिहार में अब लोगों को साफ-सुथरे काउंटर पर ताजी मछली उपलब्ध कराने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार सुधा दूध बूथों की तर्ज पर पूरे बिहार में 100 फ्रेश कैच कियोस्क स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य मछली की बिक्री को व्यवस्थित बनाना, ग्राहकों को स्वच्छ वातावरण में मछली उपलब्ध कराना और मछली पालकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार देना है। योजना पर अधिकतम 10.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में 30 कियोस्क तैयार किए जा रहे हैं, जबकि दूसरे चरण में 70 और केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

सरकार की यह योजना सात निश्चय-3 के तहत मत्स्य कारोबार को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अभी कई शहरों में मछली की बिक्री सड़क किनारे, खुले स्थानों और पारंपरिक बाजारों में होती है। इन जगहों पर कई बार साफ-सफाई, पानी की निकासी और मछलियों को सही तापमान पर रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती। फ्रेश कैच कियोस्क बनने से मछली बेचने के लिए निर्धारित और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध होंगे। इससे बाजारों में स्वच्छता बनाए रखने और ग्राहकों को बेहतर खरीदारी का अनुभव देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस योजना के तहत पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, बेगूसराय, मोतिहारी, बेतिया, हाजीपुर, किशनगंज, कटिहार और मुंगेर सहित 13 प्रमुख शहरों में कियोस्क स्थापित करने की योजना है। इन केंद्रों के लिए सरकारी जमीन, नगर निकायों की भूमि या जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली उपयुक्त जगह का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में मछली की बिक्री को व्यवस्थित करने और ग्राहकों तक ताजी मछली पहुंचाने के लिए एक बेहतर नेटवर्क तैयार किया जा सकेगा।

फ्रेश कैच कियोस्क की सबसे बड़ी विशेषता इनमें मिलने वाली आधुनिक सुविधाएं होंगी। इन केंद्रों पर मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन, डीप फ्रीजर और डिस्प्ले काउंटर की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा स्वच्छ पानी, जल निकासी, बिजली, बैकअप और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है। डिजिटल भुगतान की सुविधा से ग्राहक आसानी से खरीदारी कर सकेंगे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखना और बिक्री केंद्रों पर साफ-सफाई सुनिश्चित करना है।

योजना के तहत एक कियोस्क की निर्धारित इकाई लागत 11 लाख रुपये रखी गई है। संभावित मूल्य वृद्धि को ध्यान में रखते हुए इसकी अधिकतम लागत 13.20 लाख रुपये तक आंकी गई है। सरकार निर्धारित इकाई लागत के 80 प्रतिशत या वास्तविक निर्माण लागत में से जो भी राशि कम होगी, उसका वहन करेगी। इस तरह योजना के माध्यम से कियोस्क स्थापित करने के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। निर्माण एजेंसियों का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से और संचालन की जिम्मेदारी संबंधित नियमों के अनुसार चयनित संचालकों को दी जाएगी

इस पहल से बिहार के मछली पालकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। राज्य में बड़ी संख्या में किसान तालाबों और अन्य जलस्रोतों में मछली पालन करते हैं। मछली तैयार होने के बाद उसे समय पर बाजार पहुंचाना और ताजा बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि कियोस्क के माध्यम से उत्पादकों और विक्रेताओं के बीच नियमित आपूर्ति व्यवस्था विकसित होती है, तो मछली पालकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कारोबार को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में भी मदद मिलने की संभावना है।

सरकार का जोर केवल नए बिक्री केंद्र बनाने पर ही नहीं, बल्कि उनके नियमित संचालन और रखरखाव पर भी है। बिहार के मत्स्य निदेशालय ने फ्रेश कैच कियोस्क के संचालन और रखरखाव के लिए निविदा संबंधी दस्तावेज जारी किए हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, चयनित संचालकों को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत केंद्र चलाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे कियोस्क के रखरखाव, मछलियों की उपलब्धता और ग्राहकों को मिलने वाली सुविधाओं को व्यवस्थित रखने का प्रयास किया जाएगा

मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में भी इस योजना को लेकर तैयारी की खबरें सामने आ चुकी हैं। जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शहर में लक्ष्मी चौक, भगवानपुर चौक, संजय सिनेमा चौक और नीम चौक पर चार फ्रेश कैच केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इन केंद्रों पर रोहू, कतला, नैनी, देशी मांगुर, सिंगी, टेंगरा और पंगेस जैसी मछलियां उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। मछलियों की साफ-सफाई, कटाई और सही वजन की सुविधा देने की भी योजना थी। हालांकि, इन केंद्रों के पूरी तरह चालू होने की स्थिति की अलग से पुष्टि जरूरी है

फ्रेश कैच कियोस्क योजना का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र कितनी जल्दी शुरू होते हैं और उनका संचालन कितनी प्रभावी ढंग से किया जाता है। ग्राहकों को नियमित रूप से ताजी मछली उपलब्ध कराने के लिए उत्पादकों से लेकर बिक्री केंद्रों तक आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करनी होगी। साथ ही, स्वच्छता, उचित भंडारण और मछलियों की गुणवत्ता पर लगातार ध्यान देना जरूरी होगा। यदि ये व्यवस्थाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो लोगों को मछली खरीदने के लिए दूर स्थित मंडियों पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है।

कुल मिलाकर, बिहार में 100 फ्रेश कैच कियोस्क स्थापित करने की योजना मछली कारोबार को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्राहकों को साफ-सुथरे काउंटर पर मछली खरीदने की सुविधा मिलने, मछली पालकों को बाजार उपलब्ध होने और शहरी क्षेत्रों में बिक्री व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। अब लोगों की नजर पहले चरण के 30 कियोस्क के शुरू होने और इसके बाद शेष केंद्रों की स्थापना पर रहेगी।

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