बिहार को पर्यटन का बड़ा हब बनाने की तैयारी: 25 हजार करोड़ से बदलेगी तस्वीर, विष्णुपद-महाबोधि कॉरिडोर समेत कई बड़े प्रोजेक्ट

बिहार में पर्यटन विकास के लिए 25 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है। विष्णुपद और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर समेत कई परियोजनाओं से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
बिहार को पर्यटन का बड़ा हब बनाने की तैयारी: 25 हजार करोड़ से बदलेगी तस्वीर, विष्णुपद-महाबोधि कॉरिडोर समेत कई बड़े प्रोजेक्ट
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बिहार को देश के बड़े पर्यटन केंद्रों में बदलने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य के ऐतिहासिक, धार्मिक और बौद्ध स्थलों को विकसित कर यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की योजना सामने आई है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया है कि केंद्र के माध्यम से बिहार में पर्यटन के लिए करीब 25 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर और बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के लिए बड़े कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।

मनोज तिवारी ने यह बात संसदीय कमेटी के साथ बिहार दौरे के दौरान कही। बोधगया पहुंचे सांसद ने बिहार की पर्यटन क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की कमी नहीं है। जरूरत इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए बेहतर तरीके से विकसित करने की है। उनके मुताबिक पर्यटन क्षेत्र में प्रस्तावित बड़े निवेश से बिहार की तस्वीर बदल सकती है और राज्य को पर्यटन के बड़े हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।

गया और बोधगया इस पूरी योजना के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं। गया में विष्णुपद मंदिर हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, जबकि बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में इन दोनों स्थानों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।

विष्णुपद मंदिर के लिए कॉरिडोर विकसित किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के आवागमन, दर्शन व्यवस्था, आसपास के क्षेत्र के विकास और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना हो सकता है। कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर क्षेत्र में आने वाले लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ने के साथ आसपास के बाजार और स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिल सकता है।

बोधगया के महाबोधि मंदिर के लिए भी कॉरिडोर विकसित करने की योजना बताई गई है। बोधगया पहले से ही अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुनिया के कई देशों से बौद्ध धर्म के अनुयायी यहां पहुंचते हैं। यदि यहां परिवहन, ठहरने, पर्यटन सूचना, स्वच्छता, सुरक्षा और स्थानीय कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं में सुधार होता है तो विदेशी पर्यटकों के लिए बिहार की यात्रा और आसान हो सकती है।

बिहार की पर्यटन क्षमता केवल गया और बोधगया तक सीमित नहीं है। नालंदा, राजगीर, वैशाली, पावापुरी, पटना साहिब, वाल्मीकिनगर, रोहतास, कैमूर और कई अन्य क्षेत्रों में धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। हाल में नालंदा क्षेत्र में पर्यटन गलियारा विकसित करने को लेकर भी चर्चा हुई है। संसदीय समिति के बिहार दौरे के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय में पर्यटन गलियारे के विकास पर विचार-विमर्श की जानकारी सामने आई थी।

नालंदा की ऐतिहासिक पहचान बिहार के लिए सबसे बड़े पर्यटन अवसरों में से एक है। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया भर में भारत की ज्ञान परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यहां देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन सुविधाओं और आसपास के स्थलों को एक साथ विकसित करने की जरूरत है। यदि नालंदा, राजगीर और बोधगया को एक व्यापक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाता है तो पर्यटकों के ठहरने की अवधि भी बढ़ाई जा सकती है।

राजगीर भी इस संभावित पर्यटन नेटवर्क का अहम हिस्सा हो सकता है। यहां धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन के कई केंद्र हैं। पहाड़, गर्म जलकुंड, प्राचीन स्थल और धार्मिक महत्व वाले स्थान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे स्थलों को बेहतर सड़क, पार्किंग, होटल, सार्वजनिक सुविधाओं और पर्यटन सूचना केंद्रों से जोड़ने पर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है।

बिहार के पर्यटन विकास का असर केवल बड़े शहरों या प्रसिद्ध मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, टूर गाइड, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, दुकानों और छोटे कारोबारों को भी फायदा मिल सकता है। बड़ी संख्या में पर्यटक आने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय लोगों की आय बढ़ सकती है।

विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए पर्यटन रोजगार का बड़ा क्षेत्र बन सकता है। पर्यटकों के लिए वाहन सेवा, गाइड, होटल और होम-स्टे, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण पर्याप्त नहीं होगा। पर्यटकों को वहां तक पहुंचने के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था चाहिए। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से पर्यटन स्थलों तक सड़क कनेक्टिविटी, सार्वजनिक परिवहन, पार्किंग और साइनेज जैसी सुविधाएं मजबूत करनी होंगी। साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।

बिहार में पर्यटन के लिए हवाई कनेक्टिविटी को भी लगातार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पटना, गया और दूसरे हवाई अड्डों के जरिए देश के प्रमुख शहरों से संपर्क बेहतर होने पर विदेशी और दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटकों को फायदा मिलेगा। बोधगया जैसे अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल के लिए एयर कनेक्टिविटी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

पर्यटन विकास के साथ सबसे बड़ी चुनौती विरासत स्थलों की मूल पहचान को सुरक्षित रखना भी होगी। ऐतिहासिक मंदिरों, प्राचीन अवशेषों और धार्मिक स्थलों के विकास में आधुनिक सुविधाएं जोड़ते समय उनकी सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्ता का ध्यान रखना जरूरी है। विकास ऐसा होना चाहिए जिससे पर्यटकों की सुविधा बढ़े, लेकिन ऐतिहासिक विरासत प्रभावित न हो।

बिहार के लिए पर्यटन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के पास अलग-अलग प्रकार के पर्यटन की संभावनाएं मौजूद हैं। यहां धार्मिक पर्यटन, बौद्ध पर्यटन, ऐतिहासिक पर्यटन, इको-टूरिज्म और आध्यात्मिक पर्यटन को एक साथ विकसित किया जा सकता है। एक पर्यटक अगर गया और बोधगया आता है तो उसे नालंदा, राजगीर और अन्य आसपास के स्थलों तक जोड़ने की व्यवस्था की जा सकती है।

इससे बिहार में आने वाले पर्यटकों के ठहरने का समय बढ़ सकता है। अभी कई पर्यटक किसी एक प्रमुख स्थल पर जाकर वापस लौट जाते हैं। यदि अलग-अलग पर्यटन स्थलों को सर्किट के रूप में विकसित किया जाए तो एक ही यात्रा में कई स्थानों को देखने का अवसर मिलेगा। इससे होटल, परिवहन और स्थानीय बाजार में खर्च बढ़ेगा।

मनोज तिवारी के मुताबिक बिहार तेजी से बदल रहा है और विकास के काम लगातार जारी रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि संसदीय कमेटी के दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों से आए सांसदों ने भी बिहार की बदलती तस्वीर को महसूस किया। उनका कहना था कि बिहार को सजाना और आगे बढ़ाना सभी का लक्ष्य होना चाहिए।

इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पर्यटन को केवल घूमने-फिरने की गतिविधि के तौर पर नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के इंजन के रूप में देखा जा रहा है। अगर 25 हजार करोड़ रुपए का प्रस्तावित निवेश अलग-अलग पर्यटन परियोजनाओं, कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं में लगाया जाता है तो निर्माण से लेकर संचालन तक कई स्तरों पर रोजगार पैदा हो सकते हैं।

पर्यटन बढ़ने से राज्य को राजस्व भी मिल सकता है। होटल, परिवहन, मनोरंजन, स्थानीय बाजार और अन्य सेवाओं में कारोबार बढ़ने पर सरकार को अलग-अलग माध्यमों से आर्थिक लाभ होगा। साथ ही स्थानीय उत्पादों और बिहार की पारंपरिक कला-संस्कृति को भी नए बाजार मिल सकते हैं।

बोधगया में आने वाले विदेशी पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए बहुभाषी पर्यटन सुविधाएं, डिजिटल गाइड, सूचना केंद्र और बेहतर साइन बोर्ड विकसित करना भी उपयोगी होगा। इसी तरह गया आने वाले धार्मिक पर्यटकों के लिए सुविधाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकसित करना जरूरी होगा।

नालंदा और राजगीर जैसे क्षेत्रों में पर्यटन सर्किट तैयार होने पर इतिहास और शिक्षा से जुड़े पर्यटकों को भी आकर्षित किया जा सकता है। विश्वविद्यालय, संग्रहालय, पुरातात्विक स्थल और सांस्कृतिक केंद्रों को पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने पर बिहार की प्राचीन ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।

बिहार में पहले भी कई पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर योजनाएं बनाई गई हैं। उदाहरण के तौर पर केंद्र की विशेष सहायता के तहत सहरसा की मत्स्यगंधा झील और रोहतास-कैमूर सीमा के करमचट डैम को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजनाएं सामने आ चुकी हैं। करमचट डैम को इको और एडवेंचर टूरिज्म के हब के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई थी।

ऐसे में 25 हजार करोड़ रुपए के बड़े पर्यटन निवेश की घोषणा को व्यापक पर्यटन विकास के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि मनोज तिवारी ने इस निवेश की बात कही है, लेकिन पूरी परियोजना के तहत कौन-कौन से प्रोजेक्ट, किस समय सीमा में और किस बजट से पूरे होंगे, इसका विस्तृत आधिकारिक प्रोजेक्ट-वाइज ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। इसलिए 25 हजार करोड़ रुपए को फिलहाल सांसद द्वारा बताई गई प्रस्तावित पर्यटन निवेश योजना के रूप में देखना उचित होगा।

यदि यह योजना जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू होती है तो बिहार के पर्यटन क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। गया-बोधगया से लेकर नालंदा-राजगीर और दूसरे धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाएं विकसित होने से राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है।

सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को देश-दुनिया के सामने नए तरीके से प्रस्तुत किया जा सकेगा। 25 हजार करोड़ रुपए के प्रस्तावित पर्यटन निवेश, विष्णुपद और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर तथा नालंदा जैसे क्षेत्रों में पर्यटन गलियारे की चर्चा से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में पर्यटन बिहार के विकास एजेंडे का बड़ा हिस्सा बन सकता है।

अगर योजनाएं समय पर पूरी होती हैं और पर्यटकों को सड़क, रेल, हवाई संपर्क, होटल, स्वच्छता, सुरक्षा और स्थानीय सुविधाओं का बेहतर नेटवर्क मिलता है, तो बिहार केवल धार्मिक यात्रा का केंद्र नहीं बल्कि देश के प्रमुख मल्टी-डेस्टिनेशन टूरिज्म हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

 

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