BMC चुनाव के बाद मेयर पद पर संग्राम, संजय राउत ने शिंदे गुट पर लगाए गंभीर आरोप

BMC चुनाव के बाद मेयर पद पर संग्राम, संजय राउत ने शिंदे गुट पर लगाए गंभीर आरोप

BMC चुनाव 2026 के बाद मुंबई की राजनीति में उबाल है। संजय राउत ने शिंदे गुट पर पार्षदों को ताज होटल में रोकने का आरोप लगाया, जबकि महायुति को बहुमत मिलने के बावजूद मेयर पद पर सस्पेंस बना हुआ है।

BMC Election: बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद मुंबई की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। बहुमत मिलने के बावजूद महापौर पद को लेकर महायुति के भीतर हलचल तेज है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा बयान दिया है। राउत ने इसे सीधे तौर पर होटल पॉलिटिक्स करार देते हुए कहा कि शिंदे गुट ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के ताज होटल में बंधक बनाकर रखा है।

उनके इस बयान के बाद न सिर्फ महायुति बल्कि पूरी मुंबई की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मेयर पद की लड़ाई अब केवल संख्या का खेल नहीं रह गई है, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप और सियासी रणनीति का केंद्र बन चुकी है।

संजय राउत का आरोप

संजय राउत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि चुनाव जीतने के बाद भी शिंदे गुट को अपने पार्षदों पर भरोसा नहीं है। इसी डर के चलते उन्हें ताज होटल में रखा गया है। राउत ने कहा कि यह लोकतंत्र का मजाक है और जनप्रतिनिधियों को कैद करके रखने जैसा है।

उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि एकनाथ शिंदे ने देश के सबसे प्रतिष्ठित होटलों में से एक ताज होटल को जेल बना दिया है। वहां करीब 25 से 29 पार्षदों को इस डर से रखा गया है कि कहीं कोई उन्हें बहला-फुसलाकर या दबाव बनाकर दूसरी तरफ न ले जाए। राउत ने यह भी कहा कि यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक तरीका है और इसका विरोध किया जाना चाहिए।

पार्षदों को तुरंत रिहा करने की मांग

संजय राउत ने साफ तौर पर मांग की कि शिंदे गुट को अपने पार्षदों को तुरंत होटल से बाहर निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये सभी लोग जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और उन्हें स्वतंत्र रूप से फैसले लेने का अधिकार है।

राउत के मुताबिक, अगर किसी पार्टी को अपने ही पार्षदों पर भरोसा नहीं है, तो यह उसकी अंदरूनी कमजोरी को दिखाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि डर और दबाव की राजनीति ज्यादा दिन नहीं चल सकती।

बीजेपी मेयर पर राउत का बड़ा दावा

इस पूरे विवाद के बीच संजय राउत ने सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बयान यह दिया कि मुंबई में बीजेपी का मेयर कोई नहीं चाहता, यहां तक कि खुद एकनाथ शिंदे भी नहीं।

राउत ने कहा कि महायुति के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बीजेपी और शिंदे गुट के बीच अंदरखाने कई मुद्दों पर मतभेद हैं। मेयर पद को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। उन्होंने दावा किया कि शिंदे गुट के कई नेता और पार्षद नहीं चाहते कि मुंबई की सत्ता पूरी तरह बीजेपी के हाथ में जाए।

शिंदे गुट के पार्षद हमारे संपर्क में

संजय राउत ने आगे दावा किया कि शिंदे गुट के कई पार्षद शिवसेना यूबीटी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास यह जानकारी है और समय आने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।

राउत ने यह भी कहा कि यह कहना गलत है कि खेल खत्म हो चुका है। राजनीति में अंतिम फैसला तब होता है, जब वोटिंग होती है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में मुंबई की राजनीति में और बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।

महायुति को बहुमत, फिर भी असमंजस

बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों में बीजेपी और शिंदे गुट की महायुति ने बहुमत हासिल किया है। 227 सीटों वाली बीएमसी में महायुति को कुल 118 सीटें मिली हैं। इनमें बीजेपी ने 89 सीटें और शिवसेना शिंदे गुट ने 29 सीटें जीती हैं।

वहीं शिवसेना यूबीटी को 65 सीटें मिली हैं। कांग्रेस ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि बाकी सीटें अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं। संख्या के लिहाज से महायुति मजबूत स्थिति में है, लेकिन मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाना सवाल खड़े कर रहा है।

मेयर पद पर क्यों है सबसे ज्यादा सस्पेंस

मुंबई का मेयर पद सिर्फ एक प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का प्रतीक माना जाता है। बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निगमों में से एक है। ऐसे में मेयर का पद जिस पार्टी के पास होता है, उसकी पकड़ मुंबई की राजनीति में मजबूत हो जाती है। यही वजह है कि बीजेपी और शिंदे गुट दोनों इस पद को लेकर सतर्क हैं। बीजेपी जहां अपनी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते मेयर पद पर दावा ठोक रही है, वहीं शिंदे गुट भी अपनी अहमियत कम नहीं होने देना चाहता।

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