BMC चुनाव से पहले बढ़ी राजनीति, MVA में दरार के संकेत तेज, जानें वजह

BMC चुनाव से पहले विपक्ष में खींचतान बढ़ी। कांग्रेस के अकेले लड़ने के संकेत से महाविकास अघाड़ी पर संकट गहरा गया है। शिवसेना (UBT) और NCP(SP) कांग्रेस

BMC चुनाव से पहले कांग्रेस के अलग लड़ने के संकेत से महाविकास अघाड़ी में तनाव बढ़ गया है। शिवसेना (UBT) और NCP(SP) कांग्रेस को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि राज ठाकरे की भूमिका पर विवाद विपक्ष की खिचड़ी और गहरा रहा है।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में होने वाले BMC चुनावों ने विपक्षी दलों में नई खिचड़ी पका दी है। कांग्रेस पार्टी ने संकेत दे दिए हैं कि वह चुनाव अकेले लड़ने पर विचार कर रही है, जिसके बाद महाविकास अघाड़ी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP(SP) के बीच बनी अघाड़ी पहले ही कई मुद्दों पर तनाव झेल रही थी, लेकिन BMC चुनावों के पहले कांग्रेस का बदला हुआ रवैया गठबंधन के समीकरणों को और जटिल बना रहा है। 

वहीं, उद्धव ठाकरे कांग्रेस को मनाने की कोशिशों में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर वे एक वैकल्पिक राजनीतिक गठजोड़ पर भी विचार कर रहे हैं। इससे यह साफ है कि BMC चुनाव की राजनीतिक तस्वीर हर घंटे बदल रही है और विपक्ष की रणनीति पर बड़ा असर पड़ रहा है।

कांग्रेस को मनाने की कोशिश

शिवसेना (UBT) के सूत्रों ने बताया है कि कांग्रेस ने BMC चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके बावजूद उद्धव ठाकरे दिल्ली में लगातार कांग्रेस हाईकमान से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस की नाराजगी की वजह राज ठाकरे के प्रति उद्धव ठाकरे की बढ़ती नजदीकियां बताई जा रही हैं। कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि यदि राज ठाकरे गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो वे महाविकास अघड़ी में शामिल नहीं रहेंगी। 

कांग्रेस का मानना है कि राज ठाकरे के शामिल होने से दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं में गलत संदेश जाएगा, इसलिए वह इस निर्णय को किसी भी हालत में स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे का तर्क है कि महायुति के खिलाफ खड़ी बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्ष की एकता अत्यंत जरूरी है और अलग-अलग चुनाव लड़ने से विपक्ष ही कमजोर होगा।

उद्धव द्वारा पेश तर्क

उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को यह समझाने की कोशिश की है कि यदि विपक्ष बिखरा हुआ चुनाव लड़ेगा तो नुकसान सभी दलों का होगा और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। उनका कहना है कि महायुति के सामने मजबूती से खड़े होने के लिए महाविकास अघाड़ी का एकजुट रहना ही सर्वोत्तम रणनीति है। सामना यह भी दावा कर चुका है कि कांग्रेस को समझाना आसान नहीं है, लेकिन बातचीत का सिलसिला जारी है। हालांकि, कांग्रेस का रवैया अभी भी सख्त दिखाई दे रहा है और वह किसी भी हाल में राज ठाकरे की मौजूदगी को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं है। इससे गठबंधन के भीतर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

NCP(SP) की भूमिका

NCP(SP) सूत्रों ने बताया है कि कांग्रेस आगामी BMC चुनाव NCP(SP) के साथ गठबंधन में लड़ने की इच्छा रखती है। लेकिन शरद पवार की कोशिश है कि चुनाव महाविकास अघाड़ी के बैनर तले ही लड़े जाएं। यानी वे चाहते हैं कि शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP(SP) एकजुट होकर मैदान में उतरें। पवार ने इस विषय पर खुद महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं से बातचीत की है और यह समझाने का प्रयास किया है कि महाविकास अघाड़ी को अलग-अलग चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। कांग्रेस और NCP(SP) के बीच गठबंधन पर अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण बैठक होगी जिसमें स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।

उद्धव का प्लान बी

कांग्रेस के इनकार की स्थिति को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने प्लान बी भी तैयार कर लिया है। यदि कांग्रेस राज ठाकरे को अघाड़ी में शामिल करने पर सहमत नहीं होती, तो उद्धव ठाकरे राज ठाकरे और शरद पवार के साथ एक नए गठबंधन पर विचार कर रहे हैं। 

बढ़ती राजनीतिक हलचल

BMC चुनाव को लेकर माहौल गरमाया हुआ है और लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। विपक्षी दलों के बीच रणनीतियों पर चर्चा जारी है लेकिन समीकरण बनते-बिगड़ते देखे जा रहे हैं। कांग्रेस के अकेले लड़ने की घोषणा ने राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। वहीं, शिवसेना (UBT) और NCP(SP) दोनों कांग्रेस को अघाड़ी में बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि विपक्ष मजबूत रूप से चुनाव में उतर सके।

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