पश्चिम बंगाल में मेसी कार्यक्रम से जुड़े कुप्रबंधन विवाद के बाद खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने इस्तीफा दे दिया। युवा भारती स्कैंडल में पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई और मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई।
West Bengal Sports Minister Resigned: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा उस विवाद के बाद सामने आया, जो फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान हुए कथित कुप्रबंधन को लेकर खड़ा हुआ था। इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा था और अब मंत्री का इस्तीफा इस विवाद को और गहरा करता नजर आ रहा है।
मेसी कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
कोलकाता के युवा भारती क्रीड़ांगन में आयोजित मेसी से जुड़े कार्यक्रम को लेकर पहले ही दिन से सवाल उठने लगे थे। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और प्रशासनिक समन्वय में गंभीर चूक के आरोप सामने आए। दर्शकों और आयोजकों के बीच अव्यवस्था की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद यह मामला सिर्फ खेल आयोजन तक सीमित न रहकर सीधे राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया।
अरूप बिस्वास का इस्तीफा और पत्र
खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने इस विवाद के बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वह नहीं चाहते कि उनके पद पर बने रहने से जांच प्रक्रिया पर कोई सवाल खड़ा हो। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि खेल विभाग से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने मीडिया को बताया कि अरूप बिस्वास का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और सरकार की प्राथमिकता है कि सच सामने आए। कुणाल घोष के मुताबिक युवा भारती स्कैंडल से जुड़े विवादों के कारण ही अरूप बिस्वास से खेल विभाग छोड़ने को कहा गया था।

युवा भारती स्कैंडल ने बढ़ाई मुश्किलें
युवा भारती क्रीड़ांगन पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा खेल परिसर माना जाता है। मेसी से जुड़े इस कार्यक्रम में हुए कुप्रबंधन ने इसकी साख पर सवाल खड़े कर दिए। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में प्रशासनिक तैयारी बेहद कमजोर थी। इसी कारण सरकार को अब सख्त कदम उठाने पड़े और सबसे पहले इसकी गाज खेल मंत्री पर गिरी।
पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई
इस पूरे मामले में सिर्फ मंत्री ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और विधाननगर के पुलिस आयुक्त मुकेश कुमार को मुख्य सचिव की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि कार्यक्रम वाले दिन स्टेडियम में कुप्रबंधन क्यों हुआ और समय रहते जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
24 घंटे में जवाब देने का आदेश
डीजीपी राजीव कुमार और सीपी मुकेश कुमार को 24 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। नोटिस में साफ किया गया है कि यह बताना होगा कि कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए आयोजकों और अन्य हितधारकों के साथ उचित समन्वय क्यों नहीं किया गया। यह कार्रवाई दिखाती है कि राज्य सरकार अब इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
डीसीपी का निलंबन
मामले में सबसे सख्त कार्रवाई विधाननगर के डीसीपी अनीश सरकार के खिलाफ की गई है। इवेंट वाले दिन ड्यूटी में कथित लापरवाही को लेकर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी वाले अधिकारी से ऐसी चूक स्वीकार्य नहीं है।
प्रधान सचिव से भी मांगा गया जवाब
सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि युवा मामले और खेल विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार सिन्हा से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनसे पूछा गया है कि आयोजन के दिन कुप्रबंधन और प्रशासनिक चूक कैसे हुई। इससे साफ है कि सरकार अब पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करना चाहती है, न कि सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई कर मामला खत्म करना।
जांच के लिए SIT का गठन
इस पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है। इस टीम में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल किए गए हैं। इनमें IPS पीयूष पाण्डेय, IPS जावेद शमीम, IPS मुरलीधार और IPS सुप्रतिम सरकार के नाम शामिल हैं। SIT को पूरे मामले की तह तक जाने और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने का जिम्मा सौंपा गया है।












