BPSC Success Story: दारोगा की नौकरी के साथ की तैयारी, प्रियंका कुमारी बनीं DSP, अब IPS बनने का लक्ष्य

BPSC Success Story: प्रियंका कुमारी ने दारोगा की नौकरी के साथ 70वीं BPSC परीक्षा पास कर DSP पद हासिल किया। अब UPSC से IPS बनने का लक्ष्य है।

भागलपुर की प्रियंका कुमारी ने पुलिस की नौकरी के साथ BPSC की तैयारी जारी रखी। लखीसराय में दारोगा की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा पास कर DSP पद हासिल किया। अब उनका लक्ष्य UPSC पास कर IPS बनना है।

BPSC Success Story: बिहार के भागलपुर की प्रियंका कुमारी ने नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाकर मिसाल कायम की है। वर्ष 2020 में बिहार पुलिस में दारोगा बनने के बाद उन्होंने लखीसराय में अपनी ड्यूटी के साथ BPSC की तैयारी जारी रखी। लगातार प्रयास के बाद उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा पास की और DSP पद हासिल किया। अब वह UPSC के जरिए IPS बनने की तैयारी कर रही हैं।

साधारण परिवार से निकलकर सरकारी सेवा तक पहुंचीं प्रियंका

भागलपुर जिले के पीरपैंती की रहने वाली प्रियंका कुमारी एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता महेश रजक स्थानीय राशन डीलर हैं। परिवार ने उनकी पढ़ाई और आगे बढ़ने की इच्छा को समर्थन दिया। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रियंका ने सरकारी नौकरी और सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया।

उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। शुरुआती प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। एक समय ऐसा भी आया जब वह BPSC परीक्षा पास करने के काफी करीब पहुंचकर कुछ अंकों के अंतर से पीछे रह गईं। इस असफलता के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और अपनी रणनीति में बदलाव किया।

दारोगा बनने के बाद भी जारी रखी पढ़ाई

प्रियंका ने वर्ष 2020 में बिहार पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा पास की। इसके बाद उन्हें लखीसराय में पोस्टिंग मिली, जो उनके घर से करीब 100 किलोमीटर दूर था। पुलिस की नौकरी में जिम्मेदारियां और व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने BPSC की तैयारी छोड़ने का फैसला नहीं किया।

एक इंटरव्यू में प्रियंका ने बताया कि वर्ष 2022 में लखीसराय में पोस्टिंग के दौरान नौकरी के साथ पढ़ाई करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। पुलिस अधिकारी के तौर पर ड्यूटी निभाने के बाद परीक्षा की तैयारी के लिए समय निकालना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को लगातार जारी रखा।

उनकी तैयारी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भी अहम भूमिका रही। जब उन्हें नोट्स की समीक्षा या उत्तर लेखन की जांच के लिए कोई व्यक्तिगत मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं था, तब उन्होंने ऑनलाइन माध्यमों से मदद ली। इससे उन्हें अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में सहायता मिली।

मॉक इंटरव्यू में मिली निराशा को बनाया ताकत

BPSC की तैयारी के दौरान प्रियंका ने कई मॉक इंटरव्यू में हिस्सा लिया। इन इंटरव्यू के दौरान मिले अनुभवों से कभी-कभी उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ। हालांकि, उन्होंने इन चुनौतियों को अपनी तैयारी रोकने की वजह नहीं बनने दिया।

उन्होंने अपनी कमियों को समझने और उन्हें सुधारने पर ध्यान दिया। पहली कोशिश से मिली सीख के आधार पर उन्होंने दूसरी बार अपनी रणनीति में बदलाव किया। पढ़ाई पर ज्यादा फोकस करने के साथ उन्होंने परीक्षा के अलग-अलग चरणों की तैयारी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया।

नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने लगातार मेहनत की। इसी प्रयास का परिणाम रहा कि उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और DSP पद प्राप्त किया।

अब UPSC के जरिए IPS बनने का लक्ष्य

BPSC में सफलता के बाद प्रियंका कुमारी का लक्ष्य यहीं खत्म नहीं हुआ है। DSP पद हासिल करने के बाद अब वह संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहती हैं। उनका अगला लक्ष्य IPS अधिकारी बनना है।

प्रियंका की कहानी यह दिखाती है कि सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए अनुशासन और समय प्रबंधन जरूरी है। दारोगा के पद पर रहते हुए BPSC की तैयारी जारी रखना और DSP पद हासिल करना उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

उनका सफर उन अभ्यर्थियों के लिए भी एक उदाहरण है जो नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। प्रियंका ने अपनी पहली असफलता के बाद तैयारी नहीं छोड़ी और बाद के प्रयास में अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

Leave a comment