BRICS Summit: ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत पर दक्षिण अफ्रीका का जोर, भारत की भूमिका को बताया अहम

BRICS Summit 2026 से पहले दक्षिण अफ्रीका ने ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत पर जोर दिया और भारत की भूमिका को अहम बताया। जानें पूरी खबर BRICS Summit 2026, ग्लोबल साउथ

BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत में दक्षिण अफ्रीका के हाई कमिश्नर अनिल सूकलाल ने इस मंच में भारत की भूमिका और ग्लोबल साउथ के लिए इसकी बढ़ती अहमियत को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं।

BRICS Summit: आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने इस समूह की बढ़ती वैश्विक भूमिका और भारत के महत्व को लेकर कई अहम बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के विस्तार ने ग्लोबल साउथ के देशों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी आवाज मजबूत करने का एक प्रभावी मंच दिया है। उनके मुताबिक, बदलती वैश्विक व्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

सोमवार को एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अनिल सूकलाल ने ब्रिक्स, ग्लोबल साउथ, बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार जैसे मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कई मायनों में महत्वपूर्ण बताया।

पहली बार ग्लोबल साउथ को मिला मजबूत मंच

दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पहली बार ग्लोबल साउथ के देशों के पास एक ऐसा मजबूत मंच मौजूद है, जहां वे सामूहिक रूप से अपनी प्राथमिकताओं और चिंताओं को सामने रख सकते हैं। उन्होंने ब्रिक्स के उदय को वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में बताया।

उनके अनुसार, ब्रिक्स केवल विकासशील देशों के हितों तक सीमित मंच नहीं है, बल्कि इसके सदस्य वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति में व्यापक भूमिका निभाते हैं। इन देशों के बीच सहयोग से ग्लोबल साउथ के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए बेहतर परिणाम हासिल करने की संभावना है। अनिल सूकलाल ने भारत में होने वाले सम्मेलन को देश के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन कई मोर्चों पर भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है और बदलती वैश्विक व्यवस्था पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

ब्रिक्स में 11 स्थायी सदस्य

दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त ने मौजूदा ब्रिक्स की संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि समूह में अब 11 स्थायी सदस्य देश हैं। इन देशों का संबंध दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से है। उनके मुताबिक, यह विविधता ब्रिक्स की एक बड़ी ताकत है और इससे समूह को वैश्विक मुद्दों पर व्यापक दृष्टिकोण के साथ चर्चा करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के महत्वपूर्ण देशों का एक मंच पर आना इस बात का संकेत है कि दुनिया तेजी से एक नई और बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World Order) की ओर बढ़ रही है। ब्रिक्स के सदस्य इस उभरती व्यवस्था को किस तरह अधिक प्रभावी और संतुलित बनाया जाए, इस पर विचार कर सकते हैं।

BRICS Summit: ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत पर दक्षिण अफ्रीका का जोर, भारत की भूमिका को बताया अहम

दिल्ली में जुटेंगे कई बड़े वैश्विक नेता

अनिल सूकलाल ने भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रमुख नेताओं की संभावित मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा सहित कई प्रमुख वैश्विक नेता एक मंच पर नजर आएंगे।

उनके मुताबिक, इन नेताओं की बैठक केवल ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक वैश्विक स्तर पर भी देखा जा सकता है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में प्रमुख शक्तियों के बीच संवाद और सहयोग को उन्होंने जरूरी बताया।

UNSC में सुधार की जरूरत

दक्षिण अफ्रीका ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। अनिल सूकलाल ने कहा कि ब्रिक्स के घोषणापत्रों में लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा शामिल रहा है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद कई वैश्विक संघर्षों का प्रभावी समाधान निकालने में कठिनाइयों का सामना कर रही है। 

उनके अनुसार, दुनिया की वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताएं 1945 के समय से काफी बदल चुकी हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना में उसी अनुपात में बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि UNSC Reform के मुद्दे को लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा में बनाए रखने की जरूरत है। साथ ही, सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए गंभीर और निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

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