लिया। बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद शनिवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समर्थक, स्थानीय लोग, पार्टी कार्यकर्ता और उनके परिचित शामिल हुए। दावा किया जा रहा है कि करीब 20 हजार लोग अंतिम यात्रा में पहुंचे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई जगहों पर रास्ते पर लोगों की लंबी कतारें नजर आईं।
उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। समर्थक और स्थानीय लोग उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे। लोगों ने उनके समर्थन में ‘उमाशंकर सिंह अमर रहें’ के नारे लगाए। अंतिम यात्रा जिस रास्ते से गुजरी, वहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े दिखाई दिए।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के चेहरे पर दुख साफ नजर आया। कई समर्थक अपने नेता को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हो गए। लोगों का कहना था कि उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में क्षेत्र के लोगों के लिए लगातार काम किया और स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ थी।
उमाशंकर सिंह रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक थे और बहुजन समाज पार्टी के मौजूदा सदन में एकमात्र विधायक थे। उनके निधन के बाद बसपा के सामने विधानसभा में अपने प्रतिनिधित्व को लेकर भी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी और समर्थकों के लिए उनका निधन बड़ा झटका माना जा रहा है।
उनकी अंतिम यात्रा में सिर्फ राजनीतिक समर्थक ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में आम लोग भी शामिल हुए। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। कई लोगों ने बताया कि वे व्यक्तिगत संबंधों और क्षेत्र में उमाशंकर सिंह की सक्रियता के कारण उन्हें अंतिम विदाई देने आए हैं।
अंतिम यात्रा के दौरान रास्ते में जगह-जगह लोग खड़े रहे। कुछ लोगों ने फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी तो कई लोगों ने हाथ जोड़कर अंतिम विदाई दी। समर्थकों के बीच लगातार ‘अमर रहें’ के नारे सुनाई देते रहे।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण प्रशासन को भीड़ और यातायात व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े। अंतिम यात्रा के मार्ग पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। भीड़ को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने और किसी तरह की अव्यवस्था रोकने के लिए पुलिस लगातार निगरानी करती रही।
उमाशंकर सिंह की राजनीतिक पहचान लंबे समय से रसड़ा क्षेत्र से जुड़ी रही। विधानसभा चुनावों में उन्होंने बसपा के टिकट पर जीत दर्ज कर पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। मौजूदा विधानसभा में बसपा के पास सिर्फ एक विधायक होने के कारण उमाशंकर सिंह की भूमिका पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी शोक की लहर देखने को मिली। विभिन्न दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने उनके निधन पर दुख जताया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उमाशंकर सिंह क्षेत्र की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाते थे। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर वे विधानसभा और क्षेत्र दोनों जगह सक्रिय रहते थे। यही वजह है कि उनके निधन के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
अंतिम यात्रा में शामिल एक समर्थक ने कहा कि उमाशंकर सिंह सिर्फ विधायक नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों के बीच एक मजबूत आवाज थे। उनके जाने से स्थानीय राजनीति में एक खालीपन पैदा हुआ है। लोगों ने कहा कि उनके द्वारा किए गए काम और क्षेत्र में उनकी सक्रियता को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
अंतिम यात्रा के दौरान माहौल कई बार बेहद भावुक हो गया। पार्थिव शरीर के पास मौजूद परिवार के सदस्यों और करीबियों की आंखें नम थीं। समर्थक भी अपने नेता को आखिरी बार देखने के लिए बड़ी संख्या में आगे बढ़ते रहे।
भीड़ के बीच लगातार ‘उमाशंकर सिंह अमर रहें’ के नारे लगाए जाते रहे। लोगों ने हाथों में फूल लेकर अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया। कई जगह समर्थकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए और श्रद्धांजलि दी।
उमाशंकर सिंह के निधन से बसपा के राजनीतिक समीकरण पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले वह अकेले विधायक थे। उनके निधन के बाद रसड़ा सीट पर आगे की राजनीतिक प्रक्रिया और उपचुनाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो सकती है।
हालांकि फिलहाल पूरा ध्यान उनके अंतिम संस्कार और परिवार को सांत्वना देने पर है। समर्थक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उनके क्षेत्र में प्रभाव और लोकप्रियता की तस्वीर भी सामने रखी। करीब 20 हजार लोगों के शामिल होने के दावे के बीच जिस तरह से लोगों ने नारे लगाकर उन्हें अंतिम विदाई दी, उससे माहौल भावुक हो गया।
अंतिम यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। बड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार सक्रिय रहीं। यातायात को नियंत्रित करने के साथ-साथ अंतिम यात्रा के मार्ग पर लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित किया गया।
उमाशंकर सिंह के समर्थकों का कहना है कि उनका संघर्ष और क्षेत्र के लिए काम हमेशा याद रखा जाएगा। अंतिम यात्रा में पहुंचे लोगों ने कहा कि वे अपने नेता को आखिरी विदाई देने आए हैं और उनकी यादें हमेशा लोगों के बीच बनी रहेंगी।
बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में करीब 20 हजार लोगों की भीड़ जुटने से बलिया में माहौल पूरी तरह गमगीन रहा। समर्थकों ने फूलों के साथ अपने नेता को विदाई दी और लगातार ‘उमाशंकर सिंह अमर रहें’ के नारे लगाए। उनकी विदाई के साथ ही रसड़ा की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है, जिसका असर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।












