Budget 2026 में सरकार PSU कैपेक्स बढ़ाकर निवेश को प्रोत्साहित करेगी। निवेशक टेलीकॉम, आईटी, कंज्यूमर, सीमेंट और केमिकल सेक्टर पर ध्यान दें। बैंकिंग, ऑटो और पावर सेक्टर में सतर्क निवेश की सलाह दी जा रही है।
Budget 2026: भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल नाजुक दौर से गुजर रही है। गिरावट की गति थमती जरूर दिख रही है, लेकिन तेजी अभी भी साफ नजर नहीं आ रही। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अब मजबूत नीतिगत समर्थन नहीं मिला, तो सुधार टिकाऊ नहीं रहेगा। पिछले एक साल में खपत कमजोर रही है, निवेश की रफ्तार धीमी रही और निर्यात भी सुस्त रहा।
हालांकि टैक्स कटौती से कुछ हिस्सों में राहत मिली है, लेकिन पूरी अर्थव्यवस्था में जान नहीं आई। ऐसे में सबकी नजर सरकार के अगले कदम और बजट 2026 पर है। निवेशक और बाजार दोनों इस साल की नीतियों के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
FY26 में टैक्स वसूली
रिपोर्ट के अनुसार FY26 में टैक्स वसूली उम्मीद से कम रह सकती है। अर्थव्यवस्था की धीमी चाल और कमजोर कैपिटल गेंस के चलते सरकार के राजस्व पर लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का दबाव पड़ सकता है। राजकोषीय घाटे को 4.4 फीसदी पर बनाए रखने के लिए सरकार को खर्च घटाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर पूंजीगत खर्च और विकास से जुड़े खर्च पर पड़ेगा।
यानी FY26 में सरकारी खर्च से अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलना मुश्किल होगा। ऐसे समय में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। शेयर बाजार में मुनाफे के मार्जिन और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है।
FY27 में राहत की उम्मीद
नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक FY27 में वित्तीय दबाव कम हो सकता है। सरकार राजकोषीय घाटे को 4.4 फीसदी पर बनाए रखने के बावजूद ज्यादा सख्ती नहीं कर सकती। जीएसटी सेस हटाने जैसे कदम से अर्थव्यवस्था को GDP के करीब 0.2 फीसदी की राहत मिल सकती है। टैक्स कलेक्शन में सुधार की उम्मीद है, जिससे सरकारी खर्च बढ़ाने की थोड़ी गुंजाइश बन सकती है।
इसका मतलब है कि FY27 में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के पास संसाधन उपलब्ध रहेंगे। निवेशक इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को अपडेट कर सकते हैं।
PSU कैपेक्स और निवेश को बढ़ावा
सरकार FY27 में बजट के बाहर भी निवेश को बढ़ावा दे सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) को ज्यादा कैपेक्स करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। PSU का निवेश कई सालों से सुस्त रहा है, लेकिन अब इसे बढ़ाने से निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूती मिल सकती है।
इसके अलावा कम आय वाले लोगों को सहारा देने के लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना लाने की संभावना है। FY26 में जहां सरकार ने खपत बढ़ाने पर जोर दिया, वहीं FY27 में फोकस निवेश पर हो सकता है। नियमों में ढील और कारोबार को आसान बनाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
पसंदीदा सेक्टर
नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार FY27 में निवेशकों के लिए कुछ सेक्टर विशेष रूप से आकर्षक रहेंगे। इनमें टेलीकॉम, इंटरनेट, आईटी, कंज्यूमर, सीमेंट और केमिकल्स शामिल हैं। इन सेक्टरों में सरकारी नीतियों का समर्थन और मजबूत मांग देखने को मिल सकती है।
कम पसंद सेक्टर
वहीं बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, इंडस्ट्रियल्स, ऑटो और पावर सेक्टर में निवेश फिलहाल सतर्कता के साथ करना बेहतर होगा। इन सेक्टरों में सरकार के निवेश या नीतिगत समर्थन सीमित रहने की संभावना है। इसलिए निवेशक इन सेक्टरों में जोखिम को ध्यान में रखें।
बाजार पर असर
शेयर बाजार के लिहाज से FY27 का बजट उम्मीद जगाएगा, लेकिन बड़ी राहत देने में नाकाम रह सकता है। कंपनियों की कमाई पर दबाव बना रहेगा और मुनाफे के मार्जिन घट सकते हैं। ऐसे माहौल में डिफेंसिव रणनीति अपनाना बेहतर माना जा रहा है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे पोर्टफोलियो में सुरक्षित और मजबूत सेक्टर के शेयर रखें। साथ ही नए निवेश से पहले सरकारी योजनाओं और सेक्टर की प्राथमिकताओं पर नजर रखें।











