संयुक्त अरब अमीरात ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता स्वीकार किया। यह बोर्ड गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और स्थिरता पर काम करेगा, जिससे UAE की क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका सामने आई।
America: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है। यह बोर्ड गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और स्थिरता की देखरेख करेगा। UAE इस बोर्ड में शामिल होने वाला पहला प्रमुख अरब देश बन गया है, जो क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भूमिका दिखाता है।
क्या है बोर्ड ऑफ पीस
बोर्ड ऑफ पीस को डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में युद्ध के बाद स्थायी शांति और पुनर्निर्माण के लिए स्थापित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य गाजा संघर्ष के बाद वहां के नागरिकों के लिए स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करना है। बोर्ड ट्रंप की अध्यक्षता में काम करेगा और शुरुआत में इसका फोकस गाजा पर रहेगा। हालांकि इसके दायरे को भविष्य में और भी बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सकता है। कई देशों को इसमें शामिल होने का न्योता दिया गया है, और UAE पहला प्रमुख अरब देश बन गया है जो इसे स्वीकार कर रहा है।
UAE का योगदान
UAE विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। UAE विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद ने कहा कि यह कदम ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना को लागू करने की अहमियत को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि योजना फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों को सुनिश्चित करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए महत्वपूर्ण है। UAE ने बोर्ड के मिशन में सक्रिय योगदान देने का आश्वासन भी दिया, ताकि सहयोग, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके।

UAE और ट्रंप प्रशासन के बीच पहले से मजबूत संबंध हैं। 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में अबू धाबी ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे UAE के इजराइल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित हुए। बोर्ड में शामिल होना इस दोस्ती को और मजबूत करने का संकेत है।
सदस्यता की शर्तें
बोर्ड ऑफ पीस को लेकर कुछ विवाद भी हैं। इसमें शामिल होने के लिए देशों से 1 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान मांगा गया है। बोर्ड के चार्टर के अनुसार, सामान्य सदस्यता तीन साल के लिए होती है। हालांकि यदि कोई देश पहले साल में 1 अरब डॉलर से अधिक का योगदान करता है, तो उसे स्थायी सदस्यता दी जा सकती है। ट्रंप इस बोर्ड के चेयरमैन रहेंगे और सदस्यता उनकी मंजूरी पर निर्भर करेगी।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र (UN) के वैश्विक नेतृत्व को चुनौती दे सकता है। इसका चार्टर सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में वैश्विक संघर्षों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। कई पश्चिमी देश इस कदम पर सतर्कता बरत रहे हैं।
बोर्ड ऑफ पीस का महत्व
ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई थी। इसका पहला फेज सीजफायर, बंधकों की रिहाई और राहत कार्यों पर केंद्रित था। अब फेज-2 में गाजा का पुनर्निर्माण, डिमिलिटराइजेशन और ट्रांजिशनल गवर्नेंस शामिल है। बोर्ड ऑफ पीस इसी फेज का मुख्य हिस्सा है।
योजना के तहत गाजा में फिलिस्तीनी तकनीकी प्रशासन स्थापित किया जाएगा। इसके संचालन में अंतरराष्ट्रीय निगरानी होगी। ट्रंप का दावा है कि यह योजना क्षेत्र में स्थायी शांति लाएगी और गाजा के नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने में मदद करेगी।












