Budget 2026 से पहले शेयर बाजार में सतर्कता का माहौल है। इतिहास बताता है कि बजट से पहले निवेशक बड़े दांव लगाने से बचते हैं। इस दौरान बाजार अक्सर सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिखाता है।
Budget 2026: भारत वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट यानी Budget 2026 की ओर बढ़ रहा है। यह देश के सबसे बड़े आर्थिक आयोजनों में से एक है, लेकिन शेयर बाजार के लिए बजट से पहले का समय आमतौर पर सुस्त माना जाता है। इतिहास बताता है कि निवेशक इस दौरान बड़े फैसले लेने से बचते हैं और बाजार में साफ दिशा की कमी बनी रहती है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2003 से अब तक बजट से पहले वाले महीने में MSCI India Index औसतन करीब 1 फीसदी गिरा है। यह आंकड़ा दिखाता है कि बजट से पहले का माह निवेशकों के लिए उत्साह से ज्यादा सतर्कता का दौर रहा है।
आंकड़े क्या कहते हैं
रिपोर्ट के अनुसार, बजट से पहले वाले महीने में रिटर्न का ट्रेंड ज्यादातर नेगेटिव रहा है। इस अवधि में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी केवल दो बार देखने को मिली है। इसके उलट, 3 फीसदी या उससे ज्यादा की गिरावट नौ बार दर्ज की गई है। भारतीय बाजार में भी यही पैटर्न नजर आता है।
जनवरी महीने में Nifty 50 और Nifty 500 जैसे प्रमुख इंडेक्स अक्सर दबाव में रहे हैं। उदाहरण के तौर पर निफ्टी 50 जनवरी 2025 में 0.58 फीसदी, 2024 में 0.03 फीसदी, 2023 में 2.45 फीसदी, 2022 में 0.08 फीसदी और 2021 में 2.48 फीसदी गिरा था।
इसी तरह निफ्टी 500 जनवरी 2025 में 3.5 फीसदी, 2023 में 3.3 फीसदी, 2022 में 0.5 फीसदी और 2021 में 1.8 फीसदी फिसला था। केवल साल 2024 ऐसा रहा, जब निफ्टी 500 ने जनवरी में 1.9 फीसदी की बढ़त दर्ज की।
निवेशक क्यों रहते हैं सतर्क
इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट सर्विस कंपनी Invesasset PMS के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग के मुताबिक, इतिहास साफ तौर पर बताता है कि बजट से पहले का महीना आमतौर पर बिना किसी स्पष्ट दिशा के गुजरता है।
उनका कहना है कि निवेशक नीतियों को लेकर स्पष्टता आने तक बड़े दांव लगाने से बचते हैं। बजट में टैक्स, सरकारी खर्च और सेक्टर-स्पेसिफिक घोषणाओं की अनिश्चितता के चलते बाजार में कंसॉलिडेशन देखने को मिलता है।
जनवरी में कैसी रह सकती है चाल
एनालिस्ट्स का मानना है कि इस साल भी जनवरी का महीना स्टॉक-फोकस्ड रहने वाला है। अनिरुद्ध गर्ग के अनुसार, जनवरी में बाजार consolidation phase में रह सकता है।
इस दौरान निवेशक कंपनी नतीजों, वैश्विक संकेतों और बजट से जुड़ी उम्मीदों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे। इसका मतलब यह है कि बाजार किसी एक दिशा में तेज भागने के बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिखा सकता है।
निवेश की सही रणनीति
विश्लेषकों के मुताबिक, बजट जैसे बड़े इवेंट से पहले निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। फोकस ऐसे बिजनेस पर होना चाहिए, जिनमें स्थिर cash flow, मजबूत pricing power और नीति से जुड़े शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव का सीमित असर हो।
अनिरुद्ध गर्ग का मानना है कि कुछ कैश हाथ में रखना समझदारी भरा फैसला हो सकता है। यह बाजार को लेकर नकारात्मक सोच नहीं है, बल्कि बजट के बाद आने वाली संभावित अस्थिरता में अच्छे मौके तलाशने की तैयारी है। उनके शब्दों में, निवेश में साहस से ज्यादा संतुलन जरूरी है।
मौजूदा बाजार की स्थिति
जनवरी 2026 में अब तक बाजार पूरी तरह कमजोर भी नहीं दिखा है। निफ्टी इस महीने करीब 0.04 फीसदी ऊपर है, जबकि निफ्टी 500 में लगभग 0.61 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है।
5 जनवरी 2026 को निफ्टी ने 26,373.2 का नया रिकॉर्ड स्तर भी छुआ था। यह दिखाता है कि बाजार में पूरी तरह निराशा नहीं है, लेकिन निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
Budget 2026 से पहले सेक्टर ट्रेंड
ब्लूमबर्ग की ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार, बजट से पहले कुछ सेक्टरों ने दूसरों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। Capital Goods और IT Sector ऐसे सेक्टर रहे हैं, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से बजट से पहले अच्छा रिटर्न दिया है।
एसएंडपी बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स साल 2003 से अब तक बजट से पहले औसतन करीब 1 फीसदी की बढ़त दिखाता रहा है। इससे साफ होता है कि सरकारी खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टरों को इस दौरान सपोर्ट मिलता है।
कमजोर रहने वाले सेक्टर
दूसरी तरफ Real Estate और Power Sector लगातार कमजोर प्रदर्शन करने वालों में रहे हैं। इन सेक्टरों में बजट से पहले औसतन 1 फीसदी और 3 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं Automobile और FMCG जैसे कंज्यूमर सेक्टर आमतौर पर सीमित दायरे में कारोबार करते रहे हैं। इनमें न तो बहुत तेज तेजी दिखी है और न ही बड़ी गिरावट।
Capex बना ग्रोथ की रीढ़
अनिरुद्ध गर्ग के मुताबिक, Capex यानी पूंजीगत खर्च अभी भी ग्रोथ का सबसे बड़ा आधार बना हुआ है। इसे सरकार के वित्तीय अनुशासन का समर्थन मिल रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और औपचारिक अर्थव्यवस्था को सरकारी खर्च से फायदा होता है। वहीं फाइनेंशियल्स और मैन्युफैक्चरिंग थीम्स को उधारी, कैपेक्स फंडिंग और नीति समर्थन पर स्पष्टता मिलने के बाद मजबूती मिलती है।
सरकार का बदला हुआ फोकस
Equinomics Research के फाउंडर जी चोक्कलिंगम का मानना है कि Budget 2026 में सरकार का फोकस मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स की ओर शिफ्ट हो सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में मिडिल क्लास और कंज्यूमर को बड़ी टैक्स राहत दी गई थी। इनकम टैक्स में छूट, वेलफेयर स्कीम्स और जीएसटी में परोक्ष कटौती जैसे कदमों से उपभोक्ताओं को राहत मिली थी।
ग्रोथ एजेंडा पर जोर
चोक्कलिंगम के अनुसार, अब सरकार का एजेंडा ग्रोथ पर ज्यादा केंद्रित रहने की उम्मीद है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, कैपिटल खर्च में तेजी और आयात पर निर्भरता कम करने जैसे कदम अहम हो सकते हैं।
वैश्विक टैरिफ तनाव और निर्यात पर बने जोखिमों को देखते हुए ये फैसले और भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसके साथ ही Defence Sector भी सरकार के फोकस में रह सकता है।












