सोमवार को मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। HPCL, BPCL और IOC के शेयर 5-6 प्रतिशत तक टूटे, जबकि ONGC और ऑयल इंडिया के शेयर बढ़े।
Share Crash: सोमवार 2 मार्च को भारतीय तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के चलते डाउनस्ट्रीम तेल कंपनियों के शेयर ढह गए। शुरुआती कारोबारी में HPCL, BPCL और IOC के शेयर क्रमशः 5.3 से 6 प्रतिशत तक लुढ़क गए।
BPCL के शेयर 6 प्रतिशत टूटकर ट्रेड करने लगे, HPCL के शेयर 5.3 प्रतिशत और IOC के शेयर 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार में आए। निवेशकों में अस्थिरता की भावना और वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितता ने इस तेजी से शेयर में दबाव डाला।
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बढ़ी कीमतें
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतों में सोमवार को 10 प्रतिशत तक का उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया।
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और घरेलू तेल कंपनियों के कारोबार पर पड़ा। अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम दोनों तरह की कंपनियों पर इसका अलग असर देखने को मिला।
डाउनस्ट्रीम तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट
डाउनस्ट्रीम तेल कंपनियों का मुख्य काम कच्चे तेल को रिफाइन करना और ग्राहकों तक पेट्रोल, डीजल या अन्य उत्पाद बेचना है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि डाउनस्ट्रीम कंपनियां महंगे तेल को खरीद रही हैं लेकिन बिक्री पर ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पा रही हैं।
इसी वजह से HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने इस स्थिति को देखते हुए तेजी से बिकवाली की, जिससे शुरुआती कारोबार में 5 से 6 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ।
अपस्ट्रीम कंपनियों में तेजी
वहीं, अपस्ट्रीम तेल कंपनियों जैसे ONGC और ऑयल इंडिया के शेयरों में उछाल देखा गया। ONGC के शेयर BSE पर 5 प्रतिशत बढ़कर 293 रुपये तक पहुंच गए, जबकि ऑयल इंडिया के शेयर शुरुआती कारोबार में 4.5 प्रतिशत बढ़कर 505.50 रुपये पर ट्रेड हुए।
अपस्ट्रीम कंपनियों का काम कच्चे तेल और गैस के सोर्स की खोज और उसे निकालना होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों से इन कंपनियों को अधिक लाभ मिलता है क्योंकि वे अपने निकाले तेल को उच्च दर पर बेच सकती हैं।
तेल और गैस सेक्टर की श्रेणियां
तेल और गैस कंपनियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और मिडस्ट्रीम।
- अपस्ट्रीम कंपनियां कच्चे तेल और गैस को खोजती और निकालती हैं।
- डाउनस्ट्रीम कंपनियां तेल को रिफाइन करके उसे ग्राहकों तक पहुँचाती हैं।
- मिडस्ट्रीम कंपनियां तेल और गैस को पाइपलाइन या टैंकर के जरिए एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाती हैं और स्टोर करती हैं।
इन तीनों हिस्सों पर तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार की गतिविधियों का अलग-अलग असर पड़ता है।
क्यों अपस्ट्रीम शेयरों में तेजी
अपस्ट्रीम कंपनियों को कच्चे तेल के उत्पादन से सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार के रेट का लाभ मिलता है। ब्रेंट क्रूड के 82 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से इन कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। इसलिए ONGC और ऑयल इंडिया जैसे अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। निवेशकों ने बढ़ती कीमतों को देखते हुए इन शेयरों में खरीदारी की।
डाउनस्ट्रीम शेयरों में दबाव का कारण
डाउनस्ट्रीम कंपनियों का नुकसान इसलिए बढ़ता है क्योंकि वे महंगे तेल को खरीद रही हैं लेकिन घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए उन्हें ग्राहकों को उच्च कीमत नहीं दे सकते। इससे मार्जिन कम होता है और शेयर मार्केट में दबाव बनता है। HPCL, BPCL और IOC के शुरुआती कारोबार में यह असर साफ दिखा।










