इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार और वैश्विक बाजारों पर जल्द देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, जबकि कच्चे तेल की कीमतें सबसे बड़ा जोखिम कारक बनकर उभर रही हैं।
बिजनेस न्यूज़: Israel और Iran के बीच युद्ध का असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ Indian stock market पर भी देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते निकट अवधि में बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें इस समय सबसे बड़ा जोखिम कारक बनकर उभर रही हैं, जो निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए वित्तीय चिंता का कारण बन सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल पर है और हाल ही में इसमें करीब 2% की तेजी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए ऊंची ऊर्जा कीमतें पहले से दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ाने का जोखिम रखती हैं, जिसका असर एविएशन, पेट्रोलियम, ऑटो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है।
किन सेक्टरों पर असर होगा?
विश्लेषकों का कहना है कि इस युद्ध का असर अलग-अलग सेक्टरों पर अलग ढंग से दिख सकता है:
- सोने की कीमतें बढ़ेंगी: सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के लिए सोने में निवेश बढ़ सकता है।
- कच्चा तेल महंगा होगा: तेल कीमतों में तेजी से ईंधन और पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होंगे।
- शेयर मार्केट में बिकवाली: अल्पकालिक दबाव और भावनात्मक बिकवाली हो सकती है।
- एविएशन और ऑटो शेयरों पर खतरा: ईंधन महंगा होने से मार्जिन कम होगा और इन सेक्टरों पर दबाव बढ़ सकता है।
- डिफेंस सेक्टर में तेजी: युद्ध और सुरक्षा बढ़ने की आशंका से रक्षा कंपनियों के शेयरों को समर्थन मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक सेफ हेवन असेट्स जैसे सोना और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश बढ़ा सकते हैं।

बाजार कितना प्रभावित होंगे?
हालांकि, कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में घबराने की जरूरत नहीं है। स्टैलियन एसेट्स के अमित जेसवानी का कहना है कि बाजार इन घटनाओं को पहले ही काफी हद तक कीमतों में शामिल कर चुके हैं और बड़ी गिरावट की संभावना कम है। इक्विटी विशेषज्ञ पवन भराड़िया का मानना है कि यह प्रतिक्रिया ज्यादा से ज्यादा अल्पकालिक और भावनात्मक हो सकती है।
तेहरान, इस्फहान, क़ोम, कराज और केरमानशाह में विस्फोट हुए हैं। इस युद्ध में अमेरिका भी सक्रिय हो गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें, रक्षा और ऊर्जा सेक्टर के शेयर, और वैश्विक निवेश धाराएं इस टकराव के स्वरूप पर निर्भर करेंगी।
निवेशकों के लिए क्या करना चाहिए
- शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग में सतर्क रहें: अल्पकालिक बिकवाली का दबाव हो सकता है।
- सेफ हेवन असेट्स में निवेश: सोना और ट्रेजरी बॉन्ड सुरक्षित विकल्प हैं।
- ऊर्जा और डिफेंस सेक्टर पर नजर: बढ़ती तेल कीमतों और सुरक्षा चिंता से ये सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे भावनाओं में आकर जल्दी निर्णय न लें और बाजार की मौजूदा स्थिति को समझकर ही निवेश करें।










