कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी के तीन फ्रीज बैंक खातों के संचालन की सशर्त अनुमति देते हुए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। पार्टी अब उनकी निगरानी में नियमित प्रशासनिक और कानूनी खर्चों के लिए खातों का उपयोग कर सकेगी।
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को उसके फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों के संचालन की सशर्त अनुमति देकर बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने इन खातों के संचालन की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार पार्टी इन खातों का उपयोग केवल नियमित प्रशासनिक कार्यों और कानूनी खर्चों के लिए कर सकेगी। किसी भी अन्य प्रकार का भुगतान विशेष अधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
क्या है पूरा मामला
टीएमसी के तीन बैंक खाते पश्चिम बंगाल पुलिस के निर्देश पर फ्रीज किए गए थे। यह कार्रवाई पार्टी के एक बागी विधायक विश्वनाथ दास द्वारा पार्टी फंड के कथित दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराने के बाद की गई थी। मामले की जांच जारी रहने के दौरान पार्टी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और बैंक खातों के संचालन की अनुमति मांगी।टीएमसी का कहना था कि खाते फ्रीज होने से पार्टी के नियमित प्रशासनिक कार्य और कानूनी दायित्व प्रभावित हो रहे हैं। इसी आधार पर अदालत से राहत की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया
मामले की सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक विशेष अधिकारी नियुक्त किया। अदालत ने निर्देश दिया कि बैंक खातों का संचालन उनकी निगरानी में होगा और खातों से केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही धनराशि निकाली जा सकेगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्टी के दैनिक संचालन, कर्मचारियों से जुड़े आवश्यक भुगतान और कानूनी मामलों में होने वाले खर्च इन खातों से किए जा सकते हैं। हालांकि किसी अन्य प्रकार के खर्च के लिए विशेष अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।
खर्चों पर अदालत की स्पष्ट शर्तें
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि खातों में उपलब्ध धनराशि का उपयोग केवल सीमित और वैध उद्देश्यों तक ही रहेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना विशेष अधिकारी की स्वीकृति के कोई बड़ा या छोटा अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर पार्टी के नियमित कामकाज को प्रभावित होने से बचाना है, वहीं दूसरी ओर जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता भी बनाए रखना है।

कानूनी खर्च की भी मिली अनुमति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पार्टी के बैंक खातों से वकीलों की फीस और अन्य कानूनी खर्च किए जाने पर आपत्ति जताई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को स्वीकार नहीं किया और कहा कि लंबित कानूनी मामलों में आवश्यक खर्च भी पार्टी इन खातों से कर सकती है।
अदालत का मानना था कि किसी भी संगठन को न्यायिक प्रक्रिया में अपनी कानूनी पैरवी का अवसर मिलना चाहिए, इसलिए कानूनी खर्च की अनुमति उचित है।
शिकायतकर्ता की चिंताओं का भी रखा गया ध्यान
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी माना कि शिकायतकर्ता की ओर से सबूतों के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंका जताई गई थी। इसी कारण अदालत ने खातों का पूर्ण नियंत्रण सीधे पार्टी को देने के बजाय विशेष अधिकारी की निगरानी वाली व्यवस्था लागू की।
अदालत ने कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है, ताकि जांच भी प्रभावित न हो और पार्टी का नियमित कार्य भी जारी रह सके।
राजनीतिक और कानूनी महत्व
यह आदेश पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीएमसी को अपने नियमित संगठनात्मक कार्यों के लिए वित्तीय संचालन की सीमित अनुमति मिलने से पार्टी की प्रशासनिक गतिविधियां सुचारु रूप से जारी रह सकेंगी।
साथ ही, अदालत की निगरानी वाली व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। अंतिम निर्णय जांच और आगे की न्यायिक कार्यवाही के आधार पर लिया जाएगा।
आगे क्या होगा
फिलहाल विशेष अधिकारी 30 सितंबर तक बैंक खातों के संचालन की निगरानी करेंगे। इस अवधि के दौरान सभी भुगतान अदालत द्वारा तय शर्तों के अनुसार किए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई और जांच की प्रगति के आधार पर अदालत भविष्य में आगे के निर्देश जारी कर सकती है।
यह फैसला दर्शाता है कि न्यायालय ने एक ओर जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया है, वहीं दूसरी ओर संबंधित राजनीतिक दल के नियमित प्रशासनिक अधिकारों का भी संतुलित संरक्षण किया है।













