बाल दिवस के मौके पर देश आज भी पंडित जवाहरलाल नेहरू को याद करता है, जिन्होंने शिक्षा और बच्चों के विकास को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला माना। इलाहाबाद में जन्मे नेहरू ने इंग्लैंड के हैरो, कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में आधुनिक भारत की नींव रखी।
बाल दिवस 2025: हर साल 14 नवंबर को देशभर में बाल दिवस मनाया जाता है, जो भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की याद में समर्पित है। 1889 में इलाहाबाद में जन्मे नेहरू ने इंग्लैंड से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वकालत की डिग्री हासिल करने के बाद देश लौटकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। बच्चों के प्रति उनके स्नेह और शिक्षा के प्रति समर्पण के कारण ही उनका जन्मदिन आज भी पूरे देश में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
नेहरू जी का बचपन और प्रारंभिक शिक्षा
पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। वे एक शिक्षित और सम्पन्न परिवार से थे। उनके पिता मोतीलाल नेहरू उस समय के प्रसिद्ध वकील और समाजसेवी थे। बचपन से ही नेहरू को किताबों से लगाव और ज्ञान की जिज्ञासा थी।
नेहरू की शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई, जहां उन्हें अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं की शिक्षा दी गई। बचपन में ही वे जिज्ञासु स्वभाव के थे और विज्ञान, इतिहास और दर्शनशास्त्र में उनकी गहरी रुचि थी। इसी स्वभाव ने उन्हें आगे चलकर एक प्रगतिशील और आधुनिक नेता बनाया।
हैरो, कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड से मिली उच्च शिक्षा
उच्च शिक्षा के लिए नेहरू को इंग्लैंड भेजा गया। वहां उन्होंने हैरो और ईटन स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां से उन्होंने स्नातक की डिग्री प्राप्त की। आगे उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एम.ए. की उपाधि हासिल की।
कानून में रुचि होने के कारण नेहरू ने इंग्लैंड के इनर टेम्पल से वकालत की पढ़ाई की और बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की। उनकी शिक्षा का यह सफर न केवल बौद्धिक रूप से गहरा था, बल्कि इससे उनके विचारों में अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण भी विकसित हुआ।

विदेश में रहकर भी भारत की स्वतंत्रता का सपना देखा
नेहरू की शिक्षा-दीक्षा भले विदेश में हुई, लेकिन उनका मन हमेशा अपने देश से जुड़ा रहा। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति और आज़ादी के संघर्ष को गहराई से महसूस किया। स्नातक और वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने देश लौटकर राष्ट्रसेवा का संकल्प लिया।
भारत आने के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और महात्मा गांधी के साथ मिलकर देश की आज़ादी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। आगे चलकर वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने और आधुनिक भारत की नींव रखी।
बाल दिवस पर याद करें चाचा नेहरू का स्नेह और शिक्षा से प्रेम
चाचा नेहरू का बच्चों के प्रति प्रेम सर्वविदित था। वे मानते थे कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें अच्छी शिक्षा, संस्कार और अवसर मिलना चाहिए। यही कारण है कि उनके जन्मदिन 14 नवंबर को हर साल बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा केवल डिग्री पाने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव होती है।











