बैलेट पेपर लाओ लोकतंत्र बचाओ, EVM हटाओ लखनऊ में चंद्रशेखर बोले जहां पसीना पड़ेगा, वहां क्रांति के बीज पैदा होंगे

लखनऊ में चंद्रशेखर आजाद ने EVM के खिलाफ आवाज उठाई। बोले- बैलेट पेपर लाओ, लोकतंत्र बचाओ। जहां-जहां पसीना पड़ेगा, वहां क्रांति के बीज पैदा होंगे।
बैलेट पेपर लाओ लोकतंत्र बचाओ, EVM हटाओ लखनऊ में चंद्रशेखर बोले जहां पसीना पड़ेगा, वहां क्रांति के बीज पैदा होंगे
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर केंद्र और चुनाव व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने 'बैलेट पेपर लाओ, लोकतंत्र बचाओ, EVM हटाओ' का नारा देते हुए चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान की मांग उठाई। अपने संबोधन में चंद्रशेखर ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जनता को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।

कार्यक्रम के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघर्ष से ही बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां लोगों का पसीना पड़ेगा, वहां क्रांति के बीज पैदा होंगे। उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की।

चंद्रशेखर आजाद ने EVM के मुद्दे को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक बहस का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट पूरी तरह सुरक्षित है और उसके वोट का परिणाम सही तरीके से सामने आएगा।

लखनऊ में उनके संबोधन के दौरान समर्थकों ने बैलेट पेपर के समर्थन में नारे लगाए। मंच से 'बैलेट पेपर लाओ, लोकतंत्र बचाओ' और 'EVM हटाओ' जैसे नारे लगाए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।

चंद्रशेखर ने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव कराने का नाम नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब जनता को चुनाव प्रक्रिया पर पूरा भरोसा होगा तभी लोकतंत्र मजबूत होगा।

उन्होंने अपने समर्थकों से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि बदलाव किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं बल्कि जनता की सामूहिक भागीदारी से आता है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग सरकार और चुनाव व्यवस्था के सामने रखनी होगी।

चंद्रशेखर आजाद के भाषण में सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक अधिकार और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की राजनीतिक भागीदारी बढ़नी चाहिए। उनके मुताबिक, जब तक आम लोगों की आवाज सत्ता और व्यवस्था में प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचेगी, तब तक लोकतंत्र का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

उन्होंने युवाओं से भी सक्रिय राजनीति और सामाजिक मुद्दों से जुड़ने की अपील की। चंद्रशेखर ने कहा कि युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लें और अपने अधिकारों के लिए संगठित तरीके से आवाज उठाएं।

कार्यक्रम के दौरान EVM को लेकर लगाए गए नारों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी और उनके समर्थक चुनाव में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को प्राथमिकता देने की मांग करते रहेंगे।

हालांकि, भारत में EVM के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से बहस होती रही है। चुनाव आयोग EVM की सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर कई बार अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। दूसरी ओर, कुछ राजनीतिक दल और नेता EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान की मांग करते रहे हैं।

चंद्रशेखर आजाद का लखनऊ में दिया गया बयान इसी राजनीतिक बहस के बीच आया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जनता को चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने और अपनी मांग रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर जनता किसी व्यवस्था में बदलाव चाहती है तो उसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए।

चंद्रशेखर ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए संघर्ष और आंदोलन की भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि लोगों का संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा। 'जहां-जहां आपका पसीना पड़ेगा, वहां क्रांति के बीज पैदा होंगे' कहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से मैदान में सक्रिय रहने का आह्वान किया।

उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र बचाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर अपनी सहमति जताई।

लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम को चंद्रशेखर आजाद की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी पार्टी लगातार अपने संगठन को मजबूत करने और युवाओं तथा वंचित वर्गों के बीच अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जनता के अधिकारों और वोट की ताकत को कमजोर नहीं होने दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार चर्चा जरूरी है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से जुड़ें और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करें। उनका कहना था कि केवल चुनाव के समय सक्रिय होने के बजाय पूरे साल जनता के मुद्दों के साथ खड़ा रहना जरूरी है।

कार्यक्रम में EVM और बैलेट पेपर के मुद्दे के साथ सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों पर भी चर्चा हुई। चंद्रशेखर ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल नेताओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिक की भी इसमें बड़ी भूमिका है।

उन्होंने कहा कि यदि जनता अपने अधिकारों को लेकर जागरूक रहेगी और लोकतांत्रिक तरीके से सवाल पूछती रहेगी तो व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहेगी। उन्होंने अपने समर्थकों से किसी भी आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की।

लखनऊ में दिए गए इस भाषण के बाद चंद्रशेखर आजाद के बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। EVM का मुद्दा पहले से ही विपक्षी दलों और चुनाव सुधार की बहस में महत्वपूर्ण विषय रहा है। ऐसे में बैलेट पेपर की मांग को लेकर उनका यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकता है।

चंद्रशेखर आजाद ने लखनऊ में EVM के खिलाफ अपना राजनीतिक रुख दोहराते हुए बैलेट पेपर से मतदान की मांग उठाई। उन्होंने समर्थकों से संघर्ष और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने की अपील की और कहा कि जहां-जहां जनता का पसीना पड़ेगा, वहां क्रांति के बीज पैदा होंगे। उनके इस बयान ने एक बार फिर EVM बनाम बैलेट पेपर की राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

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