नगर निगम चुनाव से पहले चंडीगढ़ की सियासत में उथल‑पुथल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के वार्ड नंबर‑17 से पार्षद दमनप्रीत सिंह ने रविवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया।
Politics News: चंडीगढ़ की सियासत में नगर निगम चुनाव से पहले एक बार फिर हलचल मची है। ढाई महीने के भीतर आम आदमी पार्टी (आप) को दूसरा बड़ा झटका लगा है, जब वार्ड नंबर-17 से पार्षद दमनप्रीत सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस बदलाव के साथ ही पार्टी के कई जमीनी और प्रभावशाली नेता कांग्रेस में शामिल हुए हैं, जिससे आप की स्थिति कमजोर नजर आने लगी है।
आप को दूसरा बड़ा झटका
रविवार को सेक्टर-35 के राजीव गांधी कांग्रेस भवन में आयोजित कार्यक्रम में दमनप्रीत सिंह ने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस जॉइन किया। उनके साथ पूर्व आप नेता और डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन सेक्टर-43 के कोषाध्यक्ष उज्ज्वल भसीन, अधिवक्ता विशाल शर्मा और युवराज अष्ट भी शामिल हुए। दमनप्रीत ने इसे घर वापसी बताते हुए कहा, "कांग्रेस ही वह मंच है जहां से मैं अपने वार्ड और शहर की बेहतर सेवा कर सकता हूं।
इस कदम के साथ ही आप के पार्षदों की संख्या घटकर 9 रह गई है। वहीं, भाजपा के पास 18 पार्षद और कांग्रेस के पास अब 8 पार्षद और एक सांसद का वोट है।

पहले भी झटके लग चुके हैं
चंडीगढ़ में आप को इससे पहले भी कई झटके लग चुके हैं। दिसंबर 2025 में पार्टी की दो महिला पार्षद सुमन और पूनम भाजपा में शामिल हो गई थीं। फरवरी 2026 में पार्षद प्रेमलता का कांग्रेस में शामिल होना भी आप के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे नगर निगम चुनाव नजदीक आएंगे, दल-बदल की यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है। कांग्रेस इस मौके को भुनाने में लगी है, जबकि भाजपा विकास के मुद्दे पर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है।
दिसंबर 2026 में नगर निगम चुनाव होने की संभावना है। वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, हालांकि चुनाव की तारीख का अभी आधिकारिक एलान नहीं हुआ है। हाल ही में हुए मेयर चुनाव में भाजपा के सौरभ जोशी मेयर बने थे, जो मौजूदा हाउस का अंतिम मेयर चुनाव माना जा रहा है। चुनाव से पहले पार्षदों का लगातार पाला बदलना राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौती बन गया है। यह स्थिति शहर की सियासी जमीनी ताकत और दलों की चुनावी रणनीति को सीधे प्रभावित कर रही है।










