भारत के सूर्यकांत ने पहली बार लद्दाख के लेह मिलिट्री कैंप में सैन्यकर्मियों को संबोधित किया। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मौके पर जोर देकर कहा कि दूर-दराज और सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात जवानों को न्याय तक आसान पहुँच मिलनी चाहिए।
नई दिल्ली: भारत के चीफ जस्टिस (CJI) संजय सूर्यकांत ने इतिहास रचते हुए पहली बार लेह मिलिट्री कैंप में सैनिकों को संबोधित किया। समुद्र स्तर से लगभग 3,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस कैंप में पहुंचे सीजेआई सूर्यकांत ने सैनिकों को आश्वस्त किया कि न्यायपालिका का दायित्व है कि कानून की पहुंच हर सैनिक तक हो।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, आप सीमा की रक्षा करते हैं, इसलिए देश का कर्तव्य है कि आपकी सुरक्षा और कानूनी अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। दूर-दराज इलाकों में रहने वाले सैनिकों के लिए न्याय तक पहुंच आसान होनी चाहिए।
सैनिकों को कानूनी चुनौतियों का सामना
सीजेआई ने कहा कि भारतीय सेना के जवान अक्सर कठिन और दुर्गम इलाकों में तैनात रहते हैं। ऐसे में अदालतों तक पहुंचना और कानूनी सहायता प्राप्त करना उनके लिए मुश्किल होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैनिकों को ड्यूटी छोड़कर व्यक्तिगत कानूनी मामलों से निपटना नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, कानून को सैनिकों तक पहुंचना चाहिए, क्योंकि वे हमेशा अदालतों तक नहीं पहुंच सकते। यह सिर्फ सहायता नहीं, बल्कि न्यायपालिका का संवैधानिक कर्तव्य है।
संवैधानिक दायित्व: आर्टिकल 39ए
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सीजेआई सूर्यकांत ने आर्टिकल 39ए का हवाला देते हुए बताया कि न्याय की पहुंच किसी भी व्यक्ति के धन, भूगोल या सामाजिक स्थिति पर निर्भर नहीं हो सकती। उन्होंने पिछले साल शुरू हुई वीर परिवार सहायता योजना का भी जिक्र किया। इस योजना के तहत:
- रक्षा कर्मियों, पूर्व सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाती है।
- उनके आश्रित परिजनों को भी यह सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
- यह योजना सैनिकों को न्यायिक चुनौतियों से निपटने में मदद करती है।
सीजेआई ने कहा, "यह किसी चैरिटी का मामला नहीं है, बल्कि संविधान का निर्देश है कि न्याय हर व्यक्ति तक पहुंचे। सैनिकों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सूर्यकांत ने सैनिकों की निष्ठा और साहस की सराहना की। उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि भारत रातों में शांति से सोता है, क्योंकि कोई वर्दी में है। आप कठिन हालातों में भी सतर्क रहते हैं और देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।










