Closing Bell: कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बिगाड़ी बाजार की चाल, सेंसेक्स 261 अंक फिसला, निफ्टी में भी गिरावट

कमजोर वैश्विक संकेतों और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट रही। सेंसेक्स 261 अंक फिसला, निफ्टी 25,157 पर बंद।

कमजोर वैश्विक संकेतों और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली के दबाव से भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 261 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,157 के स्तर पर आ गया।

Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार बुधवार 21 जनवरी 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली ने घरेलू बाजार पर दबाव बनाए रखा। सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के बैंकिंग शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दिनभर दबाव में रहे। इसके साथ ही ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी, जिसका सीधा असर बाजार की चाल पर पड़ा।

शुरुआती कारोबार में तेज उतार-चढ़ाव

बुधवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स बड़ी गिरावट के साथ 81,794 अंक पर खुला। बाजार खुलते ही तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 700 अंक तक टूट गया था, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ नजर आई। हालांकि दिन के आखिरी हिस्से में कुछ हद तक रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद बाजार गिरावट से उबर नहीं सका। अंत में सेंसेक्स 261.41 अंक या 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,919.06 के स्तर पर बंद हुआ।

निफ्टी भी दबाव में रहा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी कमजोर शुरुआत के साथ 25,141 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान निफ्टी 25,500 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जिसने बाजार की कमजोरी को और गहरा किया। दिन के अंतिम घंटों में वैल्यू बायिंग जरूर आई, लेकिन वह गिरावट को पूरी तरह संभाल नहीं पाई। निफ्टी आखिरकार 75 अंक या 0.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,157 के स्तर पर बंद हुआ।

बैंकिंग शेयरों ने बढ़ाई बाजार की मुश्किल

इस कारोबारी सत्र में बैंकिंग सेक्टर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बना रहा। सरकारी और प्राइवेट दोनों बैंकिंग शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। बैंकिंग इंडेक्स 1.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई। कमजोर तिमाही नतीजों और ग्लोबल अनिश्चितताओं के कारण निवेशक बैंकिंग शेयरों में जोखिम लेने से बचते नजर आए।

एक्सपर्ट की राय क्या कहती है

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि घरेलू शेयर बाजारों में वैश्विक जोखिम कारकों के चलते तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इससे निवेशकों की धारणा पर दबाव बना रहा। उन्होंने बताया कि कारोबार के अंतिम दौर में वैल्यू बायिंग आने से शुरुआती नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकी, लेकिन चुनौतीपूर्ण माहौल बना रहा।

उन्होंने आगे कहा कि इस समय बैंकिंग और आईटी सेक्टर के कमजोर तिमाही नतीजों ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है। रुपये में कमजोरी और व्यापारिक संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता से आगे भी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, मौजूदा नतीजों का दौर चुनिंदा शेयरों में निवेश के मौके भी दे सकता है और मजबूत घरेलू मांग के सहारे आने वाले सत्र में सुधार की उम्मीद जताई जा सकती है।

सेंसेक्स के टॉप लूजर्स और गेनर्स

सेंसेक्स की कंपनियों में आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एक्सिस बैंक और लार्सन एंड टुब्रो सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहे। इन शेयरों में बिकवाली का दबाव पूरे दिन बना रहा।

वहीं दूसरी ओर कुछ शेयरों ने बाजार की गिरावट के बीच मजबूती दिखाई। इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंडिगो सेंसेक्स के टॉप गेनर्स रहे। इन शेयरों में आई तेजी ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया, लेकिन कुल मिलाकर गिरावट का असर ज्यादा भारी रहा।

मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कमजोरी

ब्रोडर मार्केट की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। मिडकैप इंडेक्स 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.9 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इससे साफ है कि सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मझोले और छोटे शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्कता बरती।

सेक्टोरल परफॉर्मेंस का हाल

सेक्टोरल आधार पर देखें तो केमिकल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई और यह 2.12 प्रतिशत टूट गया। इसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स 1.66 प्रतिशत और बैंकिंग इंडेक्स 1.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

वहीं कुछ सेक्टरों में सीमित मजबूती देखने को मिली। मेटल इंडेक्स 0.57 प्रतिशत और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। इन सेक्टरों में आई तेजी ने बाजार को आंशिक सपोर्ट दिया।

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी

ग्लोबल संकेतों की बात करें तो एशियाई बाजारों में भी बुधवार को गिरावट का माहौल रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों को दी गई धमकी ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी। जापान का निक्केई इंडेक्स 0.35 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।

एक दिन पहले तेज बिकवाली के बाद बुधवार को बॉन्ड बाजार में कुछ सुधार जरूर देखने को मिला, लेकिन शेयर बाजार में दबाव बना रहा।

टैरिफ और ट्रेड टेंशन का असर

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 1 फरवरी से लागू होगा और जून में बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। इन देशों ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी योजना का विरोध किया था। इस फैसले ने ग्लोबल ट्रेड टेंशन को और बढ़ा दिया है, जिसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है।

वॉल स्ट्रीट पर भी हालात ज्यादा बेहतर नहीं रहे। पिछले साल अप्रैल की बड़ी गिरावट के बाद यह सबसे खराब कारोबारी सत्र माना जा रहा है। बाजार में उतार-चढ़ाव नवंबर के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। S&P 500 और Nasdaq दोनों इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए।

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