मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुंदेली समागम में लाड़ली बहना योजना को लेकर टिप्पणी की। बुंदेली क्रिएटर बिन्नू रानी के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योजना की आर्थिक मार का उन्हें अंदाजा नहीं था।
मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुंदेली समागम के दौरान लाड़ली बहना योजना को लेकर अपनी टिप्पणी से ध्यान खींचा। बुंदेली क्रिएटर बिन्नू रानी के सवाल पर सीएम ने कहा, “तुमको मालूम नहीं, लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई।” उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें इतनी “भारी मार” पड़ने का अंदाजा नहीं था।
बुंदेली समागम में लाड़ली बहना योजना पर बोले CM मोहन यादव
भोपाल, मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुंदेली समागम के दौरान लाड़ली बहना योजना को लेकर एक टिप्पणी की, जो अब चर्चा में है। बुंदेली क्रिएटर बिन्नू रानी के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “तुमको मालूम नहीं, लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे क्या पता था मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।”
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी कार्यक्रम के दौरान हुई बातचीत के संदर्भ में सामने आई है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना से जुड़े खर्च और मुख्यमंत्री के तौर पर सामने आने वाली जिम्मेदारियों की बात अपने जवाब के दौरान कही।
बिन्नू रानी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
बुंदेली समागम में बुंदेली क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया। इसी सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना योजना का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “तुमको मालूम नहीं, लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई।” इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे क्या पता था मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।”
मुख्यमंत्री के इस जवाब में लाड़ली बहना योजना को लेकर सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय भार का संदर्भ दिखाई देता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी किस विशेष वित्तीय आंकड़े या बजट प्रावधान के संदर्भ में की थी।
लाड़ली बहना योजना क्या है?
मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। योजना का उद्देश्य पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उनके आर्थिक स्वावलंबन और घरेलू स्तर पर उनकी भूमिका को मजबूत किया जा सके।
योजना के तहत पात्र महिलाओं को सरकार की ओर से निर्धारित आर्थिक सहायता दी जाती है। इस तरह की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता वाली योजनाओं में बड़ी संख्या में लाभार्थियों के कारण सरकार पर वित्तीय व्यय भी बढ़ता है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बयान में इसी आर्थिक बोझ की ओर संकेत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें इसकी “भारी मार” का सामना करना पड़ा।
बुंदेली समागम में चर्चा में आया बयान
बुंदेली समागम का आयोजन बुंदेली क्षेत्र की संस्कृति, भाषा और स्थानीय पहचान से जुड़े विषयों को सामने लाने के लिए किया गया। कार्यक्रम में अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री और बुंदेली क्रिएटर के बीच हुई बातचीत का यह हिस्सा चर्चा में आ गया।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी का एक हिस्सा सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि उन्होंने लाड़ली बहना योजना के वित्तीय भार को लेकर सीधे तौर पर अपनी बात रखी।
हालांकि, मुख्यमंत्री के बयान को उसके पूरे संदर्भ में देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने यह बात बिन्नू रानी के सवाल के जवाब में कही थी। इसे योजना को बंद करने या उसमें किसी बदलाव की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इस बातचीत में ऐसी कोई घोषणा सामने नहीं आई है।
योजना और सरकारी खर्च पर फिर चर्चा
लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की राजनीति और शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली इस योजना के कारण राज्य के बजट पर होने वाले खर्च को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।
ऐसे में मुख्यमंत्री मोहन यादव की बुंदेली समागम में की गई टिप्पणी ने एक बार फिर योजना से जुड़े सरकारी खर्च और वित्तीय जिम्मेदारी के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल मुख्यमंत्री की ओर से इस टिप्पणी के अलावा योजना को लेकर किसी नए बदलाव या निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।











