CM मोहन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘चतुर्पुरुषार्थ’ चिंतन को बताया राष्ट्र निर्माण का मूल

मुख्यमंत्री मोहन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘चतुर्पुरुषार्थ’ चिंतन को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। जानें उनका पूरा बयान और चिंतन का महत्व।

व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले, विलक्षण व्यक्तित्व के धनी, एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के चरणों में कोटिशः नमन। पंडित दीनदयाल का जीवन भारत राष्ट्र के लिए दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ रहा।

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और चिंतन को राष्ट्र निर्माण के मूल स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल ने एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के संतुलित, स्वाभिमानी और सांस्कृतिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल को एक विलक्षण व्यक्तित्व वाला नेता और चिंतक बताया, जिन्होंने व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण तक के मार्ग को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, पंडित दीनदयाल का जीवन हमारे राष्ट्र के लिए एक प्रकाश स्तंभ है, जिन्होंने समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पण दिखाया। उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना और स्वतंत्र भारत की यात्रा को भारतीय दर्शन, संस्कृति और परंपरा के अनुरूप आकार देने का प्रयास किया।

एकात्म मानव दर्शन और चतुर्पुरुषार्थ

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया। इसमें व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है। यह दर्शन व्यष्टि से समष्टि तक की यात्रा को एक सूत्र में पिरोता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दीनदयाल का दृष्टिकोण चतुर्पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के आधार पर था। उनका मानना था कि इन चारों का संतुलन ही व्यक्ति और समाज को पूर्णता की ओर ले जाता है। यदि विकास के समान अवसर सभी को मिलें, तो समाज स्वावलंबी, समर्थ और सशक्त बनता है।

उन्होंने आगे कहा, पंडित दीनदयाल का विकास मॉडल केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं था। इसमें सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक संतुलन का समावेश था। विकास का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तभी वह सच्चा विकास कहलाता है। यही अंत्योदय का संदेश है।

वर्तमान भारत में पंडित दीनदयाल का चिंतन

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस विकास पथ पर अग्रसर है, उसका मूल पंडित दीनदयाल के चिंतन में निहित है। आत्मनिर्भर भारत, “वोकल फॉर लोकल” और सबका साथ, सबका विकास जैसे सिद्धांत आधुनिक समय में उनके दर्शन का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। मध्यप्रदेश में भी इस दृष्टिकोण को व्यवहार में लाया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और अंतरराष्ट्रीय रोड-शो आयोजित किए गए। इस तरह स्थानीय उद्योगों और वैश्विक निवेश को जोड़ने का प्रयास किया गया है।

कृषि, किसान और समग्र विकास

पंडित दीनदयाल ने कृषि को आर्थिक विकास का आधार माना। उनका मानना था कि यदि कृषि सुदृढ़ होगी, तो किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण जीवन स्थिर होगा और उद्योगों को कच्चा माल और श्रम सहज रूप से उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बेहतर बाजार तक पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा रहा है। प्रदेश में प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं:

  • पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना
  • ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना
  • 30 लाख से अधिक किसानों को सोलर पंप का वितरण
  • सिंचाई क्षेत्र को 65 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि पं. दीनदयाल के चिंतन को मध्यप्रदेश में लागू करते हुए गरीब कल्याण, किसान कल्याण, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए चार मिशनों के माध्यम से विकास कार्य किए जा रहे हैं। इससे समाज के सभी वर्गों का कल्याण सुनिश्चित होगा।

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