हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज दिल्ली पहुंचेंगे। उनका यह दौरा राज्य के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को केंद्र सरकार के सामने उठाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री की तीन केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात प्रस्तावित है। इन बैठकों में हिमाचल प्रदेश से जुड़े लंबित मुद्दों, केंद्रीय सहायता और राज्य के हितों से जुड़े विभिन्न मामलों पर चर्चा होने की संभावना है। मुख्यमंत्री केंद्र के समक्ष हिमाचल की जरूरतों और प्राथमिकताओं को मजबूती से रखने की तैयारी में हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू का दिल्ली दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब हिमाचल प्रदेश सरकार कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और आर्थिक मामलों में केंद्र से सहयोग की अपेक्षा कर रही है। राज्य प्राकृतिक आपदाओं, विकास परियोजनाओं की वित्तीय जरूरतों, सड़क और परिवहन व्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र तथा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े मामलों में केंद्र से सहायता की मांग करता रहा है। ऐसे में केंद्रीय मंत्रियों के साथ होने वाली बैठकों को हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुक्खू सरकार की ओर से लगातार यह मुद्दा उठाया जाता रहा है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी राज्यों से अलग हैं। यहां सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और दूसरी आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की लागत अपेक्षाकृत अधिक आती है। पहाड़ी क्षेत्रों में किसी परियोजना को जमीन पर उतारने में भी अतिरिक्त समय और संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में राज्य सरकार केंद्र से विशेष सहयोग और आवश्यक वित्तीय सहायता की पैरवी करती रही है।
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। तीन केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के दौरान वह हिमाचल के विभिन्न विभागों और परियोजनाओं से जुड़े मामलों को सामने रख सकते हैं। हालांकि किन-किन मुद्दों पर अंतिम रूप से चर्चा होगी, इसका पूरा ब्यौरा बैठकों के बाद ही सामने आएगा। राज्य सरकार की प्राथमिकता लंबित मामलों को आगे बढ़ाना और केंद्र से आवश्यक सहयोग हासिल करना बताई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के लिए वित्तीय संसाधनों का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू पहले भी दिल्ली जाकर केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर सहायता की मांग कर चुके हैं। एक बैठक में उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता पैकेज की मांग रखी थी। इससे साफ है कि केंद्र से वित्तीय सहयोग राज्य सरकार के एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
ऊर्जा क्षेत्र भी हिमाचल के लिए अहम मुद्दा है। राज्य में बड़ी संख्या में जलविद्युत परियोजनाएं हैं और सरकार इनसे जुड़े अधिकारों तथा आर्थिक लाभ को लेकर केंद्र के सामने अपनी बात रखती रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाल के महीनों में बिजली परियोजनाओं से जुड़े मामलों में केंद्र के संबंधित मंत्रियों से मुलाकात भी की है। राज्य सरकार का तर्क रहा है कि हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होने के बावजूद राज्य को उसके हिस्से का पर्याप्त लाभ मिलना चाहिए।
इसी तरह पर्यटन और परिवहन से जुड़ी परियोजनाएं भी हिमाचल के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सड़क, हवाई और रोपवे परियोजनाओं पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने हाल में कहा था कि पर्यटन स्थलों को रोपवे के माध्यम से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। अधिक लागत वाली परियोजनाओं को PPP और बाहरी सहायता परियोजना मॉडल के जरिए आगे बढ़ाने पर भी सरकार विचार कर रही है।
हिमाचल में कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार का मामला भी केंद्र के सामने राज्य की प्रमुख मांगों में रहा है। मुख्यमंत्री पहले केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात कर गगल एयरपोर्ट के विस्तार के लिए केंद्र के सहयोग और विशेष वित्तीय सहायता की मांग कर चुके हैं। राज्य सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट का विस्तार होने से कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हिमाचल के कई मामलों का संबंध सीधे केंद्रीय मंत्रालयों से है। किसी परियोजना के लिए पर्यावरण या वन मंजूरी, वित्तीय सहायता, केंद्रीय योजनाओं में हिस्सेदारी या मंत्रालय स्तर पर लंबित अनुमति होने की स्थिति में राज्य सरकार को केंद्र के साथ लगातार समन्वय करना पड़ता है। ऐसे में मुख्यमंत्री की सीधी मुलाकातें कई मामलों को गति देने में मदद कर सकती हैं।
हिमाचल की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन और पुनर्निर्माण भी राज्य की बड़ी चुनौती है। भारी बारिश, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं के कारण प्रदेश को हर साल बड़ी क्षति का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में सड़क, पुल, पेयजल योजनाओं और सरकारी ढांचे की मरम्मत पर भारी खर्च होता है। राज्य सरकार केंद्र से आपदा के बाद मिलने वाली सहायता को बढ़ाने और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए अतिरिक्त सहयोग की मांग करती रही है।
मुख्यमंत्री सुक्खू के दिल्ली दौरे के दौरान हिमाचल के अधिकारों से जुड़े पुराने मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। इनमें चंडीगढ़ में राज्य की हिस्सेदारी और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े विषय शामिल हैं। सुक्खू पहले भी चंडीगढ़ में हिमाचल के हिस्से की पैरवी कर चुके हैं और राज्य के लिए वैधानिक अधिकारों की बात उठाते रहे हैं।
वहीं, किन्नौर के शिपकी ला सीमा व्यापार से जुड़ा मामला भी हाल में केंद्र के सामने उठाने की बात सामने आई है। पारंपरिक सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने के बाद IGST से जुड़े मुद्दे पर व्यापारियों ने आपत्ति जताई थी। मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री के सामने इस विषय को रखने की जानकारी सामने आई है। यह मामला सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा होने के कारण हिमाचल सरकार के लिए महत्वपूर्ण है।
दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्रियों को राज्य की मौजूदा जरूरतों और लंबित परियोजनाओं की जानकारी भी दे सकते हैं। राज्य सरकार की कोशिश होगी कि जिन योजनाओं और मामलों में केंद्र स्तर पर निर्णय की आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। इससे परियोजनाओं की मंजूरी मिलने के साथ-साथ राज्य को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा हिमाचल की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में सुक्खू दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर चुके हैं। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों में संभावित फेरबदल को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज रही हैं। हालांकि मौजूदा दौरे का प्रमुख उद्देश्य हिमाचल के हितों से जुड़े मामलों की केंद्र के सामने पैरवी करना बताया जा रहा है।
राज्य सरकार के लिए केंद्र के साथ बेहतर समन्वय इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हिमाचल में कई बड़ी परियोजनाएं केंद्रीय मंत्रालयों की मंजूरी और आर्थिक सहयोग पर निर्भर करती हैं। मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली बैठकों में अगर किसी मामले पर सकारात्मक निर्णय या समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन मिलता है तो उसका सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
सुक्खू सरकार लगातार यह संदेश देती रही है कि हिमाचल के संसाधनों और अधिकारों से जुड़े मामलों में राज्य के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। जलविद्युत, चंडीगढ़ में हिस्सेदारी, वित्तीय सहायता, पर्यटन ढांचे, एयरपोर्ट विस्तार और आपदा के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। केंद्र के साथ बातचीत के जरिए इन मामलों को आगे बढ़ाना सरकार की रणनीति का हिस्सा है।
अब सभी की नजर मुख्यमंत्री की दिल्ली में होने वाली बैठकों पर रहेगी। तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ चर्चा के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि हिमाचल से जुड़े किन मामलों पर केंद्र स्तर से आगे की कार्रवाई का रास्ता खुलता है। मुख्यमंत्री यदि लंबित परियोजनाओं और वित्तीय सहायता के मुद्दों पर ठोस आश्वासन हासिल करते हैं तो इससे प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का दिल्ली दौरा हिमाचल प्रदेश के आर्थिक, विकासात्मक और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ प्रस्तावित मुलाकातों में राज्य की जरूरतों और लंबित मामलों पर चर्चा होगी। अब इन बैठकों से हिमाचल को क्या हासिल होता है और किन मुद्दों पर केंद्र की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है, इस पर प्रदेश की नजर बनी रहेगी।









