दिल्ली और नौगाम ब्लास्ट पर महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया: कहा-‘निर्दोषों को प्रताड़ित न करें'

महबूबा मुफ्ती ने दिल्ली और नौगाम ब्लास्ट पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि निर्दोषों को प्रताड़ित न किया जाए। जानें उनका पूरा बयान और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।

दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके और जम्मू-कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट ने देश को झकझोर दिया है। इन दोनों घटनाओं पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गहरा दुख व्यक्त किया है। 

जम्मू: पीडीपी प्रधान महबूबा मुफ्ती ने दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट और नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए आकस्मिक ब्लास्ट पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे दुखद समय में देश को बातचीत, सहानुभूति और एकता के साथ खड़ा होना चाहिए और आज सबसे अधिक आवश्यकता सब्र और मानवता की है। 

महबूबा मुफ्ती ने जोर देकर कहा कि किसी भी विचारधारा या शिकायत का समाधान निर्दोष लोगों की हत्या नहीं हो सकती, क्योंकि हिंसा मानवता की आत्मा को घायल करती है। उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।

लाल किले और नौगाम ब्लास्ट पर शोक 

महबूबा मुफ्ती ने दोनों घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमलों से आम लोगों में भय का वातावरण बनता है, जिसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंसा केवल मानवता को घायल करती है और समाज को पीछे धकेलती है। उनके अनुसार, यह समय देश के लिए धैर्य और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने का है।

रविवार को पार्टी की कार्यकारिणी बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विचारधारा, शिकायत या राजनीतिक मतभेद का समाधान निर्दोष लोगों के जीवन के बदले में नहीं हो सकता। हिंसा केवल घाव बढ़ाती है, समाधान नहीं देती। उन्होंने कहा, न्याय की प्रक्रिया गरिमा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। किसी भी निर्दोष व्यक्ति को पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित करना मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।

अतीत के अनुभवों से सीखने की जरूरत

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने वर्षों तक दमन, हिंसा और अविश्वास का दौर देखा है, लेकिन इन तरीकों ने समस्याओं को हल करने के बजाय और जटिल बना दिया। उन्होंने कहा कि लगातार बल प्रयोग ने लोगों में निराशा और दूरियां बढ़ाई हैं, इसलिए अब संवेदनशीलता और प्रभावी संवाद से हालात सुधारने की आवश्यकता है।

उनके अनुसार, कश्मीर को 5 अगस्त 2019 के फैसलों के बाद से उबरने का मौका भी नहीं दिया गया। आज जरूरत इस बात की है कि राष्ट्रीय नेतृत्व उन पीढ़ियों से बात करे जिनके पूर्वजों ने भारत के साथ खड़े होने का फैसला किया था।

युवाओं के लिए करुणा और अवसर की अपील

जम्मू-कश्मीर के युवाओं पर टिप्पणी करते हुए महबूबा ने कहा कि राज्य की वास्तविक ताकत उसका युवा वर्ग है। उन्होंने चिंता जताई कि कई शिक्षित युवा आज संदेह के घेरे में आ गए हैं, जो एक खतरनाक प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि युवाओं को हिंसा या कट्टरपंथ की ओर धकेलना समाज के लिए नुकसानदेह है।
महबूबा ने यह भी कहा कि केवल शिक्षा अत्यधिक विचारधाराओं को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है—युवाओं को अवसर, सुरक्षित माहौल और अपनत्व की भी आवश्यकता होती है।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि देश के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण समय है जब सभी समुदायों को एक दूसरे के साथ संवेदनशीलता के साथ जुड़ने की जरूरत है। बढ़ती दूरियों और अलगाव को खत्म करने का तरीका दमन नहीं, बल्कि करुणा और बातचीत है।

Leave a comment