कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद उन्हें स्टिंग ऑपरेशन के जरिए फंसाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सबूत के तौर पर उनके पास तस्वीरें और दस्तावेज मौजूद हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में स्टिंग ऑपरेशन और कथित हनीट्रैप को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद उन्हें स्टिंग ऑपरेशन के जरिए फंसाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि इस कथित साजिश से जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए उनके पास तस्वीरें और दस्तावेज मौजूद हैं।
शिवकुमार के इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हालांकि, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि और कथित साजिश से जुड़े सबूतों का सार्वजनिक होना अभी महत्वपूर्ण है।
डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मुताबिक, उन्होंने अपने पुलिस अधिकारियों की मदद से उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाई है, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें फंसाने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पता है कि संबंधित लोग किस बहाने से आए थे और किन व्यक्तियों से मिले थे। शिवकुमार ने यह भी कहा कि ऐसी कोशिश पहले भी की जा चुकी है। उनके अनुसार, जब वह राज्य सरकार में मंत्री थे, तब एक निजी टेलीविजन चैनल की ओर से भी इसी तरह की कोशिश की गई थी। मुख्यमंत्री के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू कर दी है।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में किसी निष्पक्ष जांच के निष्कर्ष या सार्वजनिक रूप से सत्यापित दस्तावेजों की जानकारी के बिना इन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और आधिकारिक जांच की स्थिति अहम होगी।
सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों को सतर्क करने का दावा
डीके शिवकुमार ने कथित हनीट्रैप की आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सहयोगियों और अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के कई स्तर होने की बात भी कही। उनके अनुसार, संदिग्ध इरादों वाले कुछ लोगों को पदों से हटाया गया है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों को राजनीतिक नेताओं ने नियुक्त किया था और उनके पास इससे जुड़े सबूत हैं।
हालांकि, उन्होंने जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं, उनके नाम और कथित भूमिका के बारे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। राजनीतिक रूप से संवेदनशील ऐसे मामलों में आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

जी. परमेश्वर और प्रियांक खरगे ने किया समर्थन
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने शिवकुमार के दावों का समर्थन किया है। उनके समर्थन से यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और महत्वपूर्ण हो गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा और कथित तौर पर उन्हें निशाना बनाने की कोशिशों से जुड़े आरोप गंभीर माने जाते हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के जरिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वास्तव में कोई साजिश हुई थी या नहीं और यदि हुई, तो इसके पीछे कौन लोग थे।
एचडी कुमारस्वामी ने भी लगाए थे आरोप
डीके शिवकुमार के बयान से पहले केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल किया। इस आरोप ने कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद और कांग्रेस के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब राज्य की राजनीति में नेतृत्व और सत्ता से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं। हालांकि, कुमारस्वामी के आरोपों की पुष्टि के लिए भी स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों का पक्ष जरूरी है।











